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अटल आयुष्मान योजना : तीन साल पुराना राशन कार्ड, फिर भी नहीं बन रहे गोल्डन कार्ड

Tue, 17 Sep 2019 09:25 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal भूपेंद्र राणा , अमर उजाला, देहरादून
भूपेंद्र राणा , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 17 Sep 2019 09:25 AM IST
सार

  • आयुष्मान योजना में 2015 से पहले के राशन कार्ड ही मान्य
  • राशन कार्ड होने के बावजूद भी हजारों परिवार योजना के लाभ से वंचित

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atal Ayushman uttarakhand yojana Three year old ration card yet golden card is not being made
अटल आयुष्मान योजना का कार्ड देते सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

त्रिवेंद्र सरकार ने प्रदेश के 23.32 लाख परिवारों को अटल आयुष्मान योजना में कैशलेस इलाज की सुविधा तो दी है, लेकिन हजारों परिवारों के गोल्डन कार्ड न बनने से योजना के लाभ से वंचित हैं। इसकी असल वजह ये है कि आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए सरकार ने वर्ष 2015 से पहले के बने राशन कार्ड का डाटा लिया है। यदि किसी परिवार ने इसके बाद राशन कार्ड बनवाया है तो उसका गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। आयुष्मान योजना का सिस्टम इसे स्वीकार नहीं कर रहा है। इस कारण प्रदेश के हजारों परिवार योजना से बाहर हैं। 

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त्रिवेंद्र सरकार ने 25 दिसंबर 2018 को राज्य के सभी गरीब और अमीर परिवारों के आयुष्मान योजना शुरू की थी। जिसमें पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा है। योजना का लाभ लेने के लिए मरीज के पास गोल्डन कार्ड होना अनिवार्य है। इसके आधार पर सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिल पाएगी। योजना में गोल्डन कार्ड बनवाने में सबसे बड़ी दिक्कत उन परिवारों को आ रही। जिनके राशन कार्ड वर्ष 2015 के बाद बने हैं। इसमें ऐसे परिवार शामिल हैं, जो नौकरी या कारोबार करने कई सालों तक उत्तराखंड से बाहर रहे। अब वापस प्रदेश में लौटने के बाद उन्होंने अपना राशन कार्ड बनवाया है, लेकिन उनका गोल्डन कार्ड न बनने से आयुष्मान योजना के लाभ से वंचित हैं। 
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ये हैं कुछ मामले

केस -1
पटेल नगर निवासी अरविंद कुमार का कहना है कि उनके परिवार का राशन कार्ड वर्ष 2016 में बना है। योजना में गोल्डन कार्ड बनाने के लिए जन सेवा केंद्र और सरकारी अस्पताल में गया। पंजीयन करने पर उनका राशन कार्ड नंबर स्वीकार नहीं हुआ है। बताया गया कि योजना में वर्ष 2015 से पहले के राशन कार्ड का ही डाटा उपलब्ध है। 

केस - 2
दून अस्पताल में पथरी से संबंधित बीमारी के इलाज के लिए आए रोहित सिंह का कहना है कि कई बार संपर्क करने के बाद भी अभी तक उनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पाया है। एक तरफ सरकार सभी को कैशलेस इलाज देने की बात कह रही है। वहीं, राशन कार्ड होने पर भी आयुष्मान कार्ड नहीं बन रहा है। रोहित का कहना है उनके पास कार्ड होता तो किसी निजी अस्पताल में कैशलेस इलाज मिल जाता। उनके पास इतने पैसे नहीं है कि प्राइवेट में इलाज करा सके। 

आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए राशन कार्ड और आधार कार्ड होना जरूरी है। योजना में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 2015 से पहले के राशन कार्डों का डाटा लिया है। इसके बाद बने राशन कार्ड स्वीकार नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति राज्य का स्थायी निवासी है तो उसे अन्य प्रमाण देने पर योजना का लाभ मिल सकता है।
- डॉ.अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक (प्रशासन), राज्य अटल आयुष्मान योजना

60 प्रतिशत परिवारों के बने गोल्डन कार्ड
प्रदेश में आयुष्मान योजना शुरू होने से लेकर अब तक 60 प्रतिशत परिवारों के गोल्डन कार्ड बने हैं। लाभार्थियों की संख्या के आधार पर 32.87 लाख लोगों के कार्ड बन चुके हैं। गोल्डन कार्ड बनाने के लिए सरकार से सरकारी अस्पतालों में आरोग्य मित्र भी तैनात किए हैं। जिनके माध्यम से गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।

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