फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Assembly Monsoon session CM Dhami suspense over workload of Legislative and Parliamentary Affairs Minister

Uttarakhand: विधानसभा का मानसून सत्र...विपक्षी हमलों के खिलाफ अब कौन बनेगा ढाल, क्या सीएम ही संभालेंगे कमान

Fri, 27 Jun 2025 08:16 AM IST
रेनू सकलानी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 27 Jun 2025 08:16 AM IST
सार

विधायी एवं संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाना तलवार की धार पर चलने जैसे है। सदन के भीतर विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री का किरदार निभाने वाले प्रेमचंद अग्रवाल इस्तीफा दे चुके हैं। उनके विभाग मुख्यमंत्री संभाल रहे हैं। अभी तक की तो यही परंपरा रही है कि मुख्यमंत्री विस के भीतर विधायी एवं संसदीय कार्य मंत्री का किरदार नहीं निभाते हैं।

विज्ञापन
Assembly Monsoon session CM Dhami suspense over workload of Legislative and Parliamentary Affairs Minister
सीएम धामी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्रदेश की धामी सरकार अगस्त महीने में विधानसभा का मानसून सत्र आहूत करने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सत्र के स्थान और तारीख को लेकर निर्णय लेना है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने सीएम धामी को इसके लिए अधिकृत किया है। साथ ही सत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया है।

विज्ञापन


सवाल तैर रहा है कि विधानसभा के भीतर धामी सरकार पर विपक्षी हमलों के खिलाफ इस बार कौन ढाल बनेगा? यह प्रश्न इसलिए भी मौजूद है क्योंकि सदन के भीतर विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री का किरदार निभाने वाले प्रेमचंद अग्रवाल इस्तीफा दे चुके हैं। उनके विभाग मुख्यमंत्री संभाल रहे हैं। अभी तक की तो यही परंपरा रही है कि मुख्यमंत्री विस के भीतर विधायी एवं संसदीय कार्य मंत्री का किरदार नहीं निभाते हैं। क्या धामी इस रस्म को तोड़कर स्वयं सदन के भीतर विपक्षी हमलों के खिलाफ ढाल बनेंगे या फिर अपने मंत्रिमंडल के किसी अन्य मंत्री को वह ये जिम्मेदारी देंगे।
विज्ञापन


सियासी हलकों में ये प्रश्न तैरने लगे हैं। वर्तमान में धामी के पास 40 से भी अधिक विभाग हैं। सीएम होने के नाते राजकाज से जुड़ी उनकी अपनी व्यस्तताएं भी हैं। इन्हीं वजहों से सीएम सदन के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट के लिए एक चतुर, चपल और अनुभवी मंत्री पर दांव लगाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

जिम्मेदारी निभाना तलवार की धार पर चलने जैसा

विकल्प ऐसा चाहिए जो विपक्षी हमलों को तार्किक जवाबों से न सिर्फ नाकाम करे बल्कि तर्कों के तीरों से जवाबी हमला बोलने में भी पारंगत हो। पिछले ़सत्र का जो अनुभव रहा है, उसे देखते हुए सदन में विधायी एवं संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाना तलवार की धार पर चलने जैसा है।

ये भी पढ़ें...रुद्रप्रयाग हादसा: अलकनंदा में गिरी बस...चीख-पुकार सुन मदद के लिए दौड़े स्थानीय लोग, जान हथेली पर रखकर की मदद

यहां जुबान फिसलने और संयम खोने से क्या-क्या गंवाने की नौबत आ सकती है, पिछले सत्र से समझा जा सकता है। ऐसे में फ्लोर मैनेजर की खोज आसान नहीं होगी। बहरहाल, धामी कैबिनेट में अनुभव और वरिष्ठता के हिसाब से सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत और सुबोध उनियाल के तौर पर तीन प्रमुख चेहरे हैं, जिनकी चर्चा हो रही है। मगर फैसला अंतत: सीएम को ही लेना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed