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अनदेखी पर बिफरीं आशा कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा

Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jul 2021 01:03 AM IST
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अपनी मांगों को लेकर के सीटू के समर्थन में गांधी पार्क से डीएम कार्यालय तक रैली निकालकर विरोध प्रद
अपनी मांगों को लेकर के सीटू के समर्थन में गांधी पार्क से डीएम कार्यालय तक रैली निकालकर विरोध प्रद - फोटो : DEHRADUN
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मांगों की अनदेखी से आक्रोशित आशा कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर जमकर हंगामा किया। जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए राजपुर रोड, घंटाघर, दर्शन लाल चौक, दून अस्पताल होते हुए आशाएं जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। प्रदर्शन करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो दो अगस्त से कार्यबहिष्कार किया जाएगा।
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शुक्रवार को सीटू से संबद्ध उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन के आह्वान नी आशा कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। 12 सूत्री मांगों की लंबे समय से अनदेखी से नाराज सैकड़ों आशाएं सुबह 11 बजे गांधी पार्क के पास सीटू कार्यालय ग्राउंड में एकत्रित हुईं। यहां हुई सभा में सीआईटीयू के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी, राज्य सचिव लेखराज, आशा यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे, जिलाध्यक्ष सुनीता चौहान, एक्टू के नेता केपी चन्दोला, एसएफआई के प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा, महामंत्री हिमांशु चौहान आदि ने कहा कि सरकार को आशाओं की न्यायोचित मांगों पूरा करने का अनुरोध किया गया है। कहा कि यदि मांगें पूरी नहीं की गई तो दो अगस्त से कार्यबहिष्कार किया जाएगा और व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके बाद कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए राजपुर कचहरी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे।

यहां कार्यकर्ता ने देर तक सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। इस दौरान बबीता शर्मा, कलावती चन्दोला, सुनीता चौहान, बिमला मैठाणी, अनिता भट्ट, प्रभा, रमा, कमला, धर्मिष्ठा, आशा चौधरी, सुनीता पाल, नीरा कण्डारी, पूजा, सीमा, नीलम, पिंकी, लोकेश देवी, सुनीता तिवारी, राधा, शुशीला जोशी, प्रमिला, मीनाक्षी, साक्षी सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
यह है प्रमुख मांगे
- आशा वर्करों को सरकारी सेवक का दर्जा देने
- न्यूनतम वेतन 21 हजार करने
- वेतन निर्धारण से पहले आशाओं को अन्य स्कीम वर्करों की तरह मानदेय
- आशाओं को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन का प्रावधान करने
- कोविड कार्य में लगी सभी आशाओं को 10 हजार रूपये भत्ता व 50 लाख का बीमा देने
- कोरना काल में मृतक आशा वर्करों के आश्रितों को 50 लाख का मुआवजा और चार लाख का अनुग्रह अनुदान दिया जाने
- उडी़सा की तरह ऐसे मृत कर्मियों को विशेष मासिक भुगतान किया जाए
- सेवा के दौरान दुर्घटना, हार्ट अटैक या बीमारी की स्थिति में नियम बनाया जाए।
- न्यूनतम दस लाख का मुआवजा देने। देय मासिक राशियों सभी बकाया मदों का बकाया भुगतान अबिलम्ब किया जाए।
- आशाओं के विभिन्न भुगतानों में हो रहे भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी पर रोक लगे।
- सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति हो।
- आशाओं के साथ सम्मान जनक व्यवहार किया जाए । जब तक कोरना ड्यूटी के लिए अलग से मासिक भत्ते का प्रावधान नहीं किया जाता तब कोरना ड्यूटी न दी जाए ।

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