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राजाजी टाइगर रिजर्व से आयुध भंडार को हटाए सेना
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच स्थित आयुध भंडार को जल्द हटाने का आदेश शनिवार को जारी किया है। एनजीटी ने सेना को हिदायत दी है कि जमीन का चयन करके स्थानांतरण प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।
बता दें, सेेंटर फार वाइल्ड लाइफ इंनवायरमेंट लिटिगेशन (सीडब्ल्यूईएल) की ओर से एनजीटी में याचिका दाखिल की गई है कि रायवाला स्थित सेना के आयुध डिपो को राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बनाए जाने से वन्यजीवों पर विपरीत असर पड़ रहा है। साथ ही राजाजी टाइगर रिजर्व की इकोलाजी भी प्रभावित हो रही है। इस पर एनजीटी के चेयरमैन एके गोयल की अगुवाई वाली चार सदस्यीय बेंच ने मुख्य सचिव ने अद्यतन रिपोर्ट तलब की थी। अदालत को भेजी गई रिपोर्ट में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि आयुध भंडार के लिए सेना को वन विभाग की ओर से कई जमीनों को दिखाया गया है। जमीन का चयन सेना के अधिकारियों को करना है। इसके बाद ही जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। एनजीटी अधिवक्ता गौरव बंसल ने बताया कि एनजीटी ने सेना को वन विभाग समेत संबंधित विभागों के अफसरों के साथ बैठक कर जमीन का अंतिम चयन करने और आयुध डिपो को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के लिए आदेशित किया है।
यह है मामला
वर्ष 1976 में तत्कालीन यूपी सरकार ने सेना को राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 856.5 एकड़ जमीन यह कहते हुए दी थी कि वे अपनी जरूरतों के पूरा होने तक इस जमीन का इस्तेमाल करें, लेकिन जरूरत पूरी होने पर जमीन सरकार व वन विभाग को लौटा दी जाए। इसके बाद से अब तक उक्त जमीन सेना के अधिकार क्षेत्र में है। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सेना आयुध डिपो को अन्यत्र ले जाने से बार बार इनकार कर रही है।
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राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच स्थित आयुध भंडार को जल्द हटाने का आदेश शनिवार को जारी किया है। एनजीटी ने सेना को हिदायत दी है कि जमीन का चयन करके स्थानांतरण प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।
बता दें, सेेंटर फार वाइल्ड लाइफ इंनवायरमेंट लिटिगेशन (सीडब्ल्यूईएल) की ओर से एनजीटी में याचिका दाखिल की गई है कि रायवाला स्थित सेना के आयुध डिपो को राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बनाए जाने से वन्यजीवों पर विपरीत असर पड़ रहा है। साथ ही राजाजी टाइगर रिजर्व की इकोलाजी भी प्रभावित हो रही है। इस पर एनजीटी के चेयरमैन एके गोयल की अगुवाई वाली चार सदस्यीय बेंच ने मुख्य सचिव ने अद्यतन रिपोर्ट तलब की थी। अदालत को भेजी गई रिपोर्ट में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि आयुध भंडार के लिए सेना को वन विभाग की ओर से कई जमीनों को दिखाया गया है। जमीन का चयन सेना के अधिकारियों को करना है। इसके बाद ही जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। एनजीटी अधिवक्ता गौरव बंसल ने बताया कि एनजीटी ने सेना को वन विभाग समेत संबंधित विभागों के अफसरों के साथ बैठक कर जमीन का अंतिम चयन करने और आयुध डिपो को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के लिए आदेशित किया है।
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यह है मामला
वर्ष 1976 में तत्कालीन यूपी सरकार ने सेना को राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 856.5 एकड़ जमीन यह कहते हुए दी थी कि वे अपनी जरूरतों के पूरा होने तक इस जमीन का इस्तेमाल करें, लेकिन जरूरत पूरी होने पर जमीन सरकार व वन विभाग को लौटा दी जाए। इसके बाद से अब तक उक्त जमीन सेना के अधिकार क्षेत्र में है। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सेना आयुध डिपो को अन्यत्र ले जाने से बार बार इनकार कर रही है।
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