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देहरादून में बेरोजगारों की फौज, रोजागर के आंकड़ों की हो रही खोज

Mon, 23 Sep 2019 03:54 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal गौरव ममगाईं, अमर उजाला, देहरादून
गौरव ममगाईं, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 23 Sep 2019 03:54 PM IST
सार

  • सेवायोजन विभाग के पास नहीं है रोजगार पाने वाले युवाओं के आंकड़े 
  • सरकारी सेवाओं की परीक्षा कराने वाली संस्थाएं नहीं करती जानकारी साझा

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Army of unemployed in Dehradun, employment statistics are being searched
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

सेवायोजन विभाग में बेरोजगारों का आंकड़ा तो हर साल बढ़ रहा है, लेकिन ताज्जुब की बात यह कि पिछले पांच सालों में देहरादून जिले में कितने युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिले, इसका कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है।

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पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो विभाग को महज 100 युवाओं को नौकरी मिलने की जानकारी मिल सकी है। कारण यह है कि सरकारी सेवाओं की परीक्षा कराने वाली एजेंसियां विभाग को सालों से रोजगार से जुड़ी जानकारी नहीं दे रही हैं। विभाग एजेंसियों को नोटिस व बार-बार रिमाइंडर भेजकर तंग आ चुका है, लेकिन एजेंसियां के रवैये में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। रोजगार का आंकड़ा न होने से विभाग को भी लगातार खासी फजीहत उठानी पड़ रही है। 
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विभाग के पास नहीं अधिकार
विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 1995 से पूर्व सेवायोजन विभाग के पास रोजगार से जुड़े कई अधिकार थे। सभी विभागों को रोजगार से जुड़ी जानकारी विभाग से साझा करनी अनिवार्य थी, लेकिन इसके बाद सेवायोजन विभाग से अधिकार छीन लिए गए। सरकारी सेवाओं के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग जैसी कई एजेंसियां बना दी गईं। 
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अब भी चल रहा वर्ष 1959 का जुर्माना
सेवायोजन विभाग के एक्ट में 1959 में आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया था। इसके तहत सेवायोजन विभाग उन विभागों पर यह आर्थिक दंड लगाने को अधिकृत था, जो विभाग के साथ रोजगार से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करते थे। इसकी राशि 500 रुपये निर्धारित थी, जो उस समय के हिसाब से काफी अधिक थी, जिससे अधिकारी डरते भी थे। लेकिन, आज इस राशि के मायने कुछ भी नहीं रह गए हैं, इसलिए एजेंसियां 500 रुपये का आर्थिक दंड झेलने को तैयार हैं, लेकिन रोजगार से जुड़ी जानकारी साझा करने को नहीं।


विभाग सरकारी सेवाओं की परीक्षा कराने वाली सभी एजेंसियों को कई बार नोटिस दे चुका है, लेकिन किसी ने रोजगार संबंधी जानकारी साझा नहीं की। इस तरह का रवैया सही नहीं है। इससे विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ता है। - ममता चौहान, क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी (गढ़वाल)

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