इस नन्हे वीर ने मां को बचाने के लिए बाघ से किए दो-दो हाथ
डर क्या होता है, बाघ क्या मुझे तो किसी चीज से डर नहीं लगता। उत्तराखंड के अर्जुन सिंह अपने इसी साहस के कारण राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों में संजय चोपड़ा अवार्ड से नवाजे जाएंगे।
अर्जुन सिंह ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बाघ का सामना कर अपनी मां के जीवन की रक्षा की। क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग के दीवाने अर्जुन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की खुशी को छिपा नहीं पा रहे हैं।
उत्तराखंड गढ़वाल के मालगांव बदियार निवासी 16 वर्षीय अर्जुन सिंह ने 16 जुलाई 2014 की घटना को याद करते हुए बताया कि उस दिन वे अपने घर पर संगीत सुन रहे थे। मां पशुओं को चारा खिला रही थी।
दंराती से किए बाघ पर कई प्रहार
अर्जुन ने अपनी मां की चीख सुनी। बाहर आकर देखा कि एक बाघ ने उनकी मां पर हमला कर दिया था। वह एक दरांती लेकर बाहर की ओर भागे। मां को अपनी तरफ खींचते हुए दरांती से बाघ पर प्रहार किया।
अचानक हुए हमले से बाघ विचलित हो गया और उनकी ओर बढ़ने लगा। उन्होंने आनन फानन में मां को अंदर धकेला और दरांती से बाघ पर प्रहार किया। बाघ गाय-भैंसों की तरफ जाने लगा। इसी बीच वहां और लोग आ गए तब बाघ वहां से भाग गया।
यह पूछे जाने पर कि क्या एक जंगली जानवर से उन्हें डर नहीं लगा, उन्होंने कहा कि बाघ तो रोज देखते हैं इसलिए डर नहीं लगता।
वीरेंद्र सहवाग के हैं दीवाने
12वीं के छात्र अर्जुन काफी पहले अपने पिता को खो चुके हैं। ऐसे में वे हर हाल में मां को बचाना चाहते थे। वे कहते हैं कि यदि मां की जगह कोई और होता तो भी ऐसा ही करते।
उनकी मां विक्रमा देवी कहती हैं कि अर्जुन ने उनका नाम बढ़ा दिया है पिता जिंदा होते तो गर्व करते। पीएम और राष्ट्रपति से मिलने की कितनी खुशी है इस पर वे कहते हैं कि उनके सामने जाना ही बड़ी बात है।
आर्मी ऑफिसर बनने की तमन्ना रखने वाले अर्जुन ने जिस दिन पहली बार क्रिकेट देखा, उस दिन वीरेंद्र सहवाग खेल रहे थे। लिहाजा वह उसी दिन से उनके दीवाने हो गए।