देवभूमि से रूठे इंद्रदेव, औसत से कम हुई बारिश
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उत्तराखंड से इंद्रदेव रूठे रूठे से लग रहे हैं। प्रदेश में मानसून बीती एक जुलाई को सक्रिय हो गया था।
तब से लेकर 12 जुलाई तक का आंकड़ा बताता है कि सामान्य से 53 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस अवधि में औसत रूप से सामान्य बारिश 13.5 मिलीमीटर रहती है, लेकिन इस बीच 6.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
कुछ ऐसा ही हाल एक जून से लेकर 12 जुलाई के बीच तकरीबन डेढ़ माह के अंतराल का भी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों पर भरोसा करें तो इस अवधि में सामान्य बारिश 313.8 मिलीमीटर बारिश रहती है।
लेकिन इस बार यह केवल 125.2 मिलीमीटर रही है, जो सामान्य से 60 प्रतिशत कम है।
सूखा आपात योजना में उत्तराखंड भी शामिल
कृषि मंत्रालय ने सूखे के संकट से निपटने के लिए देश के 500 जिलों के लिए आपात योजना तैयार कराई है।
इसमें उत्तर भारत के 100 जिले शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के 36, हरियाणा के 19, पंजाब के 18, जम्मू और कश्मीर के 22, हिमाचल प्रदेश के 5 और उत्तराखंड के तीन जिलों को इसमें शामिल किया गया है।
इन जिलों में सूखे के हालात से निपटने के लिए बीज, खाद, बिजली और पानी मुहैया कराने पर जोर दिया जाएगा।
इस साल बारिश के लिए तरसे उत्तर और मध्य भारत में दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों के उत्पादन को तगड़ा झटका लग सकता है।
पिछले साल से घट गई खरीफ की बुवाई
पिछले साल 12 जुलाई तक देश के 517 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई हुई थी, जो इस साल घटकर 257 लाख हेक्टेअर रह गई है।
इससे महंगाई के साथ-साथ दाल व खाद्य तेलों का आयात बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, मोटे अनाजों की सिर्फ 30 फीसदी बुवाई हो पाई है जबकि दलहन की बुवाई करीब 48 फीसदी कम है।
सबसे बुरा हाल तिलहन का है। पिछले साल के मुकाबले तिलहन की सिर्फ 16-17 फीसदी बुवाई हो पाई है।
हालांकि, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के चलते धान की बुवाई केवल 20 फीसदी कम है, लेकिन डीजल और बिजली के बढ़ते खर्च ने किसानों की कमर तोड़ डाली है।
दालों व खाद्य तेल का बढ़ेगा आयात
भारत अपनी जरूरत का करीब 50 फीसदी खाद्य तेल और 25-30 फीसदी दालें विदेशों से मंगाता है।
हालांकि सरकार ने वर्ष 2013-14 में दलहन व तिलहन के बंपर उत्पादन की उम्मीद जताई है लेकिन सूखे को देखते हुए स्थिति उलट सकती है।
इससे महंगाई की आग भड़क सकती है। कमजोर मानसून को देखते हुए सरकार पहले ही वर्ष 2014-15 में खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य वर्ष 2013-14 के 264 लाख टन से घटाकर 261 लाख टन कर चुकी है।
अब टमाटर 40 रुपए किलो
आलू और प्याज के बाद अब टमाटर की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं। दिल्ली के खुदरा बाजार में टमाटर का भाव 35 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है।
जबकि कानपुर और लखनऊ में टमाटर 40 रुपए किलो तक बिक रहा है। दिल्ली में प्याज का भाव 32-35 रुपए और आलू 27-30 रुपए प्रति किलोग्राम है।
यह रहा फसल का हाल
खरीफ फसल - 2014 (11 जुलाई तक) - 2013 (12 जुलाई तक)
धान --- 86.4 --- 110.07
दलहन --- 13.5 --- 25.9
मोटे अनाज --- 35.3 --- 96.6
तिलहन --- 22.16 --- 136.0
गन्ना --- 46.0 --- 48.4
कपास --- 45.20 --- 92.4
नोट: बुवाई (लाख हेक्टेअर में है।)