Amar Ujala Exclusive: प्राधिकरण की कवायद अटकी, विकास परियोजनाएं लटकी, अध्यक्ष सहित सदस्यों की कुर्सी आठ माह से खाली
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण प्रभाव आकलन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत राज्यों में राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण का गठन किया गया।
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इधर, दोनों संस्थाओं में खाली पदों को भरने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन केंद्र ने कुछ आपत्तियां लगाकर प्रस्ताव लौटा दिए हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण प्रभाव आकलन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत राज्यों में राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण का गठन किया गया।
प्राधिकरण का कार्यकाल तीन साल का होता है। उत्तराखंड में एसईआईएए के अध्यक्ष पद पर अभी तक डॉ. शरद सिंह नेगी नियुक्त थे। इनके अलावा सदस्य के तौर पर एसएस बिष्ट और सदस्य सचिव (पदेन) के पद पर मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल को नियुक्त किया गया था। इस कार्यकारिणी का कार्यकाल अगस्त, 2021 में समाप्त हो गया था, जिसे तीन माह आगे बढ़ा दिया गया था।
नवंबर, 2021 में यह बढ़ी हुई अवधि भी खत्म हो गई। इसके साथ ही राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति का कार्यकाल भी समाप्त हो गया। अब दोनों संस्थाएं निष्क्रिय हैं। इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि ऑरेंज कैटेगरी के नए प्रोजेक्ट और उद्योगों के विस्तार के लिए राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण की मंजूरी लेनी जरूरी होती है। प्राधिकरण के सक्रिय न होने से औद्योगिक विकास से जुड़े करीब 30 प्रस्ताव लंबित पड़े हैं।
क्या काम करता है एसईआईएए
एसईआईएए सौ हेक्टेयर तक माइनर खनन, 50 मेगावाट तक के हाइड्रो प्रोजेक्ट, थर्मल पावर प्लांट, नदी घाटी, बुनियादी अवसंरचना, सौ किमी तक नई सड़क के निर्माण, ऑरेंज केटेगरी के उद्योगों की स्थापना, बहुत छोटे इलेक्ट्रोप्लेटिंग या फाउंड्री इकाइयों और छोटे होटल स्थापित करने लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित परियोजनाओं का पर्यावरण और लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने और इस प्रभाव को कम करने का प्रयास करना है।
बीते कार्यकाल में छह सौ प्रस्तावों को दी थी मंजूरी
एसईआईएए ने अपने तीन साल के कार्यकाल में राज्य के विकास से जुुड़े करीब छह सौ प्रस्तावों को मंजूरी थी। इस तरह से देखें तो प्रतिवर्ष दो सौ प्रस्तावों को प्राधिकरण की ओर से मंजूरी दी गई थी।
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राज्यस्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसका प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। उसके संबंध में कुछ सूचनाएं मांगी गईं थीं। इन्हें उपलब्ध कराकर प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा रहा है। - आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यारण