अब बाजार में आएंगे सेब के क्लोन, जानिए इसके पीछे की वजह...
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अभी तक आपने इंसानों के क्लोन के बारे में सुना होगा, लेकिन अब फलों के भी क्लोन बनाए जा रहे हैं। जानिए इसके पीछे की वजह...
वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी (टिहरी) में पहली बार सेब को क्लोनिंग के जरिए उगाने का प्रयोग किया जा रहा है। टिश्यू कल्चर तकनीक से प्रयोगशाला में सेब के 3000 पौधे तैयार किए गए हैं। अब तक कलम उगाकर सेब के पौधे तैयार किए जाते थे।
लेकिन वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी अब क्लोनिंग के तहत सेब के पौधे तैयार करेगा। उत्तराखंड में पहली बार इस तरह से सेब के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। प्रयोगशाला में रसायनों की मदद से यह नर्सरी तैयार की गई है।
सफल हुआ प्रयोग...
इस तकनीक से हिमाचल का प्रसिद्ध एम-11 डेलिशियस सेब के पेड़ से पत्ती और जड़ों के सैंपल लेकर जार में पौधे बनाने की शुरुआत की गई। प्रयोग सफल रहा और पौधों में जड़ निकलनी शुरू हो गई हैं। डॉ. तेजपाल बिष्ट और देवप्रकाश कोठारी इस प्रयोग की देखरेख कर रहे हैं।
वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी (टिहरी गढ़वाल) के डीन प्रो. सीएम शर्मा ने बताया कि हम पहली बार टिश्यू कल्चर से सेब के पौधे उगा रहे हैं। यह प्रयोग अभी तक सफल रहा है। तीन हजार पौधे तैयार हो गए हैं, जिन्हें नर्सरी में लगाया गया। कुछ समय बाद इन्हें सेब लोगों में वितरित किया जाएगा।
नई तकनीक से फायदा
- सेब के पेड़ पर बीमारी कम लगेगी।
- अच्छी पैदावार मिलेगी।