फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Aparajita100 million Smiles program bring employment for village women

अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स: गांवों में महिलाओं को घर बैठे मिलेगा रोजगार 

Tue, 22 Jan 2019 02:56 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 22 Jan 2019 02:56 PM IST
विज्ञापन
Aparajita100 million Smiles program bring employment for village women
प्रशिक्षण लेती महिलाएं और युवतियां

महिलाओं को घर बैठे ही रोजगार मिल सके, इसके लिए अमर उजाला ‘अपराजिता महाभियान’ के तहत स्वरोजगार कार्यशाला का आयोजन किया गया। पांच दिवसीय इस कार्यशाला में महिलाओं एवं बालिकाओं को हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण के बाद बेहतर कार्य करने वाली महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मुहैया कराए जाएंगे। 

विज्ञापन


अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स महाभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए स्वरोजगार कार्यशाला आयोजित की गई। मालदेवता में आयोजित कार्यशाला में महिला उद्यमी गरिमा गुप्ता ने महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट उत्पाद तैयार करने सिखाए। इस दौरान बैग (जूट, कैनवस के बैग) ज्वैलरी, पेंटिंग आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। गरिमा ने बताया कि महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा हो सके, इसके लिए पहले उन्हें आसान चीजें बनानी सिखाई गईं। महिलाएं जल्दी क्या सीख सकती हैं शुरुआत में केवल वही सिखाया गया है। सबसे पहले महिलाओं को जूट के बैग बनाने सिखाए गए। इसके बाद महिलाओं ने स्वयं भी बैग बनाए। हर दिन महिलाएं कुछ नया सीख सकें, इसके लिए कई तरह के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। फिलहाल चार गांवों से 25 महिलाओं को यह प्रशिक्षण दिया गया। ट्रेनिंग के बाद इन महिलाओं को उत्पाद तैयार करने लिए कहा गया है। जो भी बेहतर हैंडीक्राफ्ट तैयार करेंगी, उनके बनाए उत्पाद को गरिमा स्वयं ही खरीदेंगी। 
विज्ञापन


गरिमा का कहना है कि महिलाओं को प्रशिक्षण तो दिया जाता है, लेकिन उसके बाद वह कुछ नहीं कर पाती। रोजगार नहीं मिल पाने की वजह से उनकी रुचि कम हो जाती है। इसलिए महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ ही रोजगार उपलब्ध कराना जरूरी है। पांच दिन के प्रशिक्षण में महिलाओं और बालिकाओं द्वारा बेहद आकर्षक हैंडीक्राफ्ट तैयार किए गए। कार्यशाला प्रशिक्षण लेने वाली बबली देवी, गुड्डी देवी, नैना राणा, सुमित्रा राणा, रेश्मा देवी, आसना, नीलम पंवार, पूजा पंवार, बसंती देवी, संगीता देवी, आरती पंवार, लता देवी, प्रेरणा पंवार, यशोदा सकलानी, गीता आदि ने कहा कि काम सीखने के साथ ही रोजगार का मौका पहली बार मिला है। इस एक अच्छी पहल से हम भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


गांव में ही हमें रोजगार का इतना बेहतर साधन मिल रहा है। इस तरह के प्रशिक्षण यदि मिलते रहें तो महिलाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
- काजल पंवार, घंतूकासेरा
यह काम बड़ा ही रुचिकर है और मुझे शौक भी है। प्रशिक्षण के जरिये और अच्छे तरीके से सीखने का अवसर मिला है।
- दीपा पंवार, सरखेत 
मैं पहले से सिलाई करती थी, लेकिन काम बहुत ज्यादा नहीं होता तो पूरे महीने काम नहीं मिलता, लेकिन अब सिलाई के साथ-साथ बैग, ज्वैलरी आदि बनाने का काम भी मिलेगा। 
- निधि रावत, सीतापुर
क्राफ्ट मुझे बहुत पसंद है, जिसे मैं सीखना चाहती थी। अब मौका मिला तो इसका फायदा भी उठा पाऊंगी।
- रूपल सकलानी, कुमाल्डा

दून की गरिमा गुप्ता ने उद्यमी के रूप में बनाई पहचान  
कम समय में स्वयं को उद्यमी के रूप में नाम करने वाली 27 साल की गरिमा गुप्ता अब अन्य महिलाओं को स्वावलंबी बना रही हैं। एमबीए करने के बाद गरिमा ने नोएडा की एक कंपनी में एचआर विभाग में नौकरी की, लेकिन उन्हें अपनी यह नौकरी रास नहीं आई क्योंकि गरिमा का सपना तो कुछ अलग करने का था। इसी सपने को पूरा करने के लिए साल 2015 में नौकरी छोड़ उन्होंने पिता के नाम से कंपनी शुरू कर नई शुरुआत की। 

नेहा ने नौकरी छोड़, स्वरोजगार की राह चुनी 
नौकरी छोड़ स्वरोजगार की राह चुनने वाली नेहा नेगी महिला सशक्तीकरण के लिए काम करना चाहती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं के आत्मनिर्भर नहीं होने के कारण ही वह स्वयं को आगे आने से रोकती हैं। इसलिए वह उनको आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं। देहरादून भंडारी बाग निवासी 31 वर्षीय नेहा नेगी दिल्ली में जॉब कर रही थी। उन्होंने अगस्त 2018 में ही नौकरी छोड़ हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया। वह बताती हैं कि उन्होंने इसके लिए कोई स्पेशल ट्रेनिंग नहीं ली। बल्कि खुद की रुचि के कारण वह आज स्वयं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ा रही हैं। एक महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी नेहा और महिलाओं को काम देना चाहती हैं। वह बताती हैं हैंडीक्राफ्ट का काम सीख कर कोई भी महिला स्वरोजगार कर सकती है। वह उत्पाद तैयार करें और उन्हें बाजार हम उपलब्ध कराएंगे। नेहा देहरादून की महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना चाहती हैं। वह महिलाओं के प्रशिक्षण देने के साथ ही रोजगार भी देंगी।

काम सीखो और घर बैठे पाओ रोजगार 
अपराजिता महाभियान के तहत महिलाओं के लिए किया जा रहा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन अमर उजाला अपराजिता महाभियान के तहत उन महिलाओं को सुनहरा मौका मिलेगा, जो रोजगार की तलाश में हैं। 27 एवं 28 जनवरी को दो दिवसीय स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण लेने के बाद बेहतर काम करने वाली महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा। इच्छुक महिलाएं 25 जनवरी तक आवेदन कर सकती हैं। 


अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स महाभियान के तहत महिलाओं के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए दो दिवसीय स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें महिला उद्यमी गरिमा गुप्ता, नेहा नेगी व स्वरोजगार पर काम कर रहे युवा स्वप्निल सिन्हा की टीम महिलाओं को प्रशिक्षण देगी। खास बात यह है कि प्रशिक्षण के साथ ही बेहतर काम करने वाली महिलाओं को काम भी दिया जाएगा, जिसके जरिये उन्हें रोजगार भी मिलेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट बनाने सिखाए जाएंगे। पहले रजिस्ट्रेशन कराने वाली 200 महिलाओं को ही प्रशिक्षण लेने का मौका मिलेगा। प्रशिक्षण कार्यशाला दो दिन तक चलेगी। पहले दिन सौ और दूसरे दिन सौ महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।  
इस नंबरों पर कराएं रजिस्ट्रेशन : 9412057039, 9639809748

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed