देहरादूनः शहीद अनूप थापा के अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़
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'जब तक सूरज चांद रहेगा अनूप थापा तेरा नाम रहेगा। भारत माता की जय।' इन नारों के साथ सोमवार को शहीद अनूप थापा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भावभीनी विदाई दी गयी।
सोमवार को शहीद अनूप थापा के आवास पर पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान मुख्यमंत्री सीएम हरीश रावत, खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल, देहरादून मेयर विनोद चमोली, एसएसपी डॉ. सदानंद दाते सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उत्तरी कश्मीर के शालबटु (कुपवाड़ा) में शनिवार तड़के एलओसी पर घुसपैठ के एक प्रयास को नाकाम बनाते हुए मुठभेड़ के दौरान देहरादून के नायक अनूप कुमार थापा (41) पुत्र उमाशंकर थापा शहीद हो गए।
शहीद थापा का पार्थिव शरीर रविवार शाम हेलीकाप्टर से क्लेमेंटटाउन कैंट लाया गया। सेना ने पार्थिव शरीर को मिलिट्री हास्पिटल के शवगृह में रखा है। सोमवार सुबह शहीद के अंतिम दर्शन के बाद चंद्रबनी स्थित श्मशान घाट में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सेना के अनुसार 3 गोरखा राइफल्स में तैनात नायक अनूप कुमार स्पेशल आपरेशन ग्रुप के सदस्य थे। ग्रुप ने कुछ आतंकियों को एलओसी के पास देखा और दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हुई। फायरिंग में अनूप कुमार को गोली लगी। घायल होने के बाद भी वे आतंकियों से लोहा लेते रहे।
घुसपैठ की कोशिश को किया नाकाम
भारतीय सेना ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया और आतंकी फरार हो गए। अनूप कुमार को घटनास्थल पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। जब अनूप को अस्पताल शिफ्ट किया जा रहा था, तो उनकी मौत हो गई। अनूप कुमार ने 19 साल की उम्र में सेना ज्वाइन की थी।
उनकी शहादत की सूचना मिलने के बाद डाटकाली मंदिर के समीप ग्राम आशारोड़ी स्थित उनके आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया। शहीद थापा के पिता डाटकाली मंदिर में पुजारी हैं। पत्नी नूतन थापा गृहणी हैं। दो बच्चे मौच थापा (12) और अर्श थापा (4) अभी पढ़ाई करते हैं।
नायक थापा की शहादत पर सीएम हरीश रावत ने उनके शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया है। खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, भाजपा नेता महेश पांडे ने भी परिवार से मुलाकात कर धैर्य बंधाया।
दिल में गम और आंखें नम
अनूप की शहादत और जिंदगी में 10 दिन का फासला रह गया। 10 दिन बाद तीन अगस्त को अनूप घर आने वाले थे। सितंबर में उनका रिटायरमेंट था। आखिरी महीने में उनकी एक महीने की ड्यूटी बनारस में थी। उन्होंने बच्चों को बनारस घुमाने का वादा किया था। आज न अनूप हैं और न उनका वादा।
पीछे रह गई हैं बूढ़े बाप की पथराई हुई आंखें, पत्नी का टूटता हौसला और बच्चों की बदहवासी। अनूप के पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पीछे कोई घर की जिम्मेदारी उठाने वाला नहीं रह गया है। पूरे इलाके में अनूप की विदाई पर शोक की लहर है।
अनूप थापा का सितंबर में रिटायरमेंट होने से पहले गोरखा रेजीमेंट में शनिवार को उनकी फेयरवेल पार्टी होने वाली थी। फेयरवेल पार्टी के बाद तीन अगस्त को अनूप को घर लौटना था। आखिरी ड्यूटी बनारस में करने से पहले अनूप ने पूरे परिवार को बनारस घुमाने का वादा किया था। जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा (केरन सेक्टर) में नियंत्रण रेखा पर ड्यूटी के दौरान 3 गोरखा रेजीमेंट के नायक अनूप थापा की आतंकियों से मुठभेड़ हो गई। जवाबी फायरिंग से घुसपैठ तो नाकाम हो गई, लेकिन आतंकियों की गोलियों से उनकी मौत हो गई।
1994 में सेना में हुए थे भर्ती
अनूप कुमार थापा वर्ष 1994 में सेना में भर्ती हुए थे। स्वभाव से बेहद मिलनसार अनूप गोरखा रेजीमेंट में तैनात थे। अनूप की शहादत की खबर उनके घर पहुंची तो पिता उमाशंकर बदहवास हो गए। दो साल पहले छोटे बेटे को उमाशंकर ने खोया था अब बड़े बेटे की मौत हो गई। अनूप की पत्नी नूतन सूचना मिलने के बाद से बेसुध हैं।
पड़ोसी रिश्तेदार उन्हें किसी तरह से संभाल रहे हैं। अनूप के 12 वर्षीय बेटे मोक्ष का पिता के अचानक छोड़कर चले जाने रो रोकर बुरा हाल है। छोटे बेटे अक्ष को अभी यह भी नहीं पता कि पता पापा अब कभी नहीं आएंगे।
छिना बुढ़ापे का सहारा
डाट काली मंदिर में पुजारी उमाशंकर की छह संतानों में अनूप थापा सबसे बड़े थे। चार बेटियों रेखा, रूपा, संजना व ममता की शादी हो चुकी हैं। पत्नी ललिता की वर्ष 2006 में मौत के बाद उमाशंकर अकेले पड़े तो अनूप ने उन्हें सहारा दिया।
दो साल पहले छोटे बेटे रोहित की बीमारी के चलते मौत हो गई तो पूरे घर की जिम्मेदारी अनूप के कंधों पर आ गई। हाल के वर्षों में घर में हुई दो मौतों के बाद उमाशंकर के चेहरे से हंसी गायब हो गई थी, लेकिन अब बड़े बेटे की मौत ने उन्हें गुमसुम कर दिया। बहू और उसके दो बच्चों की सारी जिम्मेदारी बुढ़ापे में उनके कंधों पर आ गई है।
ऐसे हुए शहीद
जानकारी के अनुसार चार आतंकी हथियारों से लैस शुक्रवार आधी रात के बाद कुपवाड़ा जिले में शालबटु इलाके में दाखिल होने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान वहां गश्त कर रहे अनूप थापा सहित अन्य जवानों ने उन्हें ललकारते हुए आत्मसमर्पण करने को कहा। आतंकियों ने जवानों पर गोली चलाई।
सेना ने जवाबी फायर किया। इस दौरान मुठभेड़ में थापा सहित दो जवानों को गोली लगी। तत्काल अन्य जवानों ने दोनों को वहां से हटाते हुए एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने थापा को मृत घोषित कर दिया, जबकि दूसरे जवान का उपचार चल रहा है।