फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   animal sacrifices did not stop the haridwar

हरिद्वार में बलि की तैयारी, नेता तमाश्ाबीन

Fri, 11 Oct 2013 11:56 AM IST
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 11 Oct 2013 11:56 AM IST
विज्ञापन
animal sacrifices did not stop the haridwar

हरिद्वार के दक्षिण काली पीठ में पशुबलि की परंपरा जस की तस कायम है। कई सांसद, विधायक भी जुटते हैं, धर्म को मानने वाले भी।

विज्ञापन


सभी पशुबलि के साक्षी बनते हैं। इसके बाद भी कोई विरोध नहीं करता। शुक्रवार सप्तमी की रात यहां फिर पशुबलि की तैयारी है।

पढें, यहां 2014 का सबसे बड़ा सपना है 'सड़क' और 'मोबाइल'


अनेक जगह पशु बलि बंद हो गई
उत्तराखंड में जनविरोध के कारण अनेक जगह पशु बलि बंद हो गई है। विशेष रूप से नवरात्रों में कई मंदिरों में पशुबलि दी जाती रही है। इसके बावजूद हरिद्वार में आज भी सप्तम काल रात्रि में पशु बलि दी जाती है।

चंडी वन के भीतर तंत्र साधना करने वाले साधक भी पशुओं की बलि अपने-अपने स्तर पर देते हैं। इन बलियों में राजनेताओं के साथ-साथ प्रतिष्ठित नागरिक भी शामिल होते हैं।
विज्ञापन


पढें, नौ साल का विष्णु है अपने गिरोह का 'सरदार'
विज्ञापन
विज्ञापन


800 वर्ष पुरानी तंत्र पीठ
हरिद्वार की दक्षिण काली पीठ वास्तव में 800 वर्ष पुरानी तंत्र पीठ है। प्रत्येक नवरात्र में अखाड़ों के संत पूछे जाने पर जुबानी विरोध ही करते हैं, लेकिन प्रत्यक्षतया जाकर कोई भी बलि प्रथा को बंद नहीं कराता।


अर्धरात्रि में दी जाने वाली बलियों में हरिद्वार के अनेक राजनेता और धर्मावलंबी भी शामिल होते हैं। दूसरे प्रांतों के नेता भी बलि देने के लिए दक्षिण काली पीठ आते हैं।

बलि के खिलाफ
बलि प्रथा बंद होनी चाहिए। प्रतीकात्मक रूप से बलि दी जाए, तब भी काम चल सकता है। प्रत्येक नवरात्र में पीठाधीश्वर से आग्रह किया जाता है, लेकिन बलि प्रथा बंद नहीं होती। अभी सामूहिक विरोध का कोई कार्यक्रम नहीं है।
- श्रीमहंत हरि गिरि, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed