उत्तराखंड कांग्रेसः सस्पेंस समाप्त, स्थितियां सामान्य नहीं
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मंत्री अमृता रावत ने सोमवार को देहरादून पहुंचकर इस्तीफे का सस्पेंस तो समाप्त कर दिया, लेकिन बयानों की तल्खी और संकेत फिलहाल स्थितियों को सामान्य नहीं बता रहे हैं।
उन्होंने महिला फैक्टर की आड़ में यह साफ कर दिया कि अगर उन्हें मंत्री पद से हटाया गया तो दूरगामी घातक परिणाम होंगे।
सोमवार को देहरादून पहुंची अमृता ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी में हूं और रहूंगी। मैं इस्तीफा नहीं दे रही लेकिन साथ ही यह भी अगर सोनिया गांधी इस्तीफे की पेशकश करती हैं तो ही इस्तीफा दूंगी। मुझे पद का मोह नहीं है।
इस्तीफा कतई नहीं
मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से इस्तीफे की पेशकश पर बोलीं कतई नहीं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को भी आलाकमान ने ही बनाया है।
मंत्री पद से हटाए जाने के संबंध में अमृता रावत का कहना है कि इस प्रदेश में पुरुषों से अधिक महिलाएं हैं। मैं तीन बार से जीतकर आई महिला विधायक हूं। राहुल गांधी पार्टी में महिलाओं को 50 फीसदी अधिकार की बात कहते हैं।
ऐसे में पार्टी को अपनी कथनी-करनी एक जैसी करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो पूरे देश में इस निर्णय का गलत संदेश जाएगा महिलाओं का अपमान होगा।
उनका कहना है कि हाईकमान के नाम पर भी कुछ फैसले हो जाते हैं। लेकिन हटाया गया तो दूरगामी और घातक परिणाम होंगे। मंत्री पद से हटाने पर क्या विधायकी से इस्तीफा देंगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे रामनगर की जनता से चुना है मैं विधायक बनी रहूंगी।
गलती सुधार करें
अधार्मिक क्या जानें जूठे पत्तल
सतपाल महाराज के खिलाफ साम्प्रदायिक भाजपा के जूठे पत्तल उठाने के बयान पर भी अमृता रावत ने मुख्यमंत्री हरीश पर तीखी टिप्पणी की। उनका कहना है कि जो धार्मिक लोग होंगे वहीं कृष्ण और जूठे पत्तल की कहानी जानेंगे। जो अधार्मिक होगा उसे क्या पता।
वो तो मंत्री हैं ही: हरीश रावत
देहरादून। मंत्री अमृता रावत के बयानों को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि वो तो मंत्री हैं ही, उन्होंने बयान दिया है अच्छी बात है मैंने भी टीवी पर देखा है। मंत्रिमंडल से हटाए जाने के संबंध में मुख्यमंत्री का कहना है कि यह एक काल्पनिक सवाल है जिसका कोई जवाब नहीं होता। यह बात कहां से आई अटकलों पर राजनीति नहीं होती है।