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जज्बे को सलाम, एक पैर से नाप दिया ग्लेशियर

Wed, 20 May 2015 08:34 AM IST
आनंद नेगी/ अमर उजाला, बागेश्वर
आनंद नेगी/ अमर उजाला, बागेश्वर Updated Wed, 20 May 2015 08:34 AM IST
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amlan cross pindari glacier on one leg.

‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।’

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इसे साबित कर दिखाया मुंबई निवासी 40 वर्षीय अम्लान दत्ता ने। एक पैर से विकलांग होने के बावजूद वे उत्तराखंड के पिंडारी ग्लेशियर (समुद्रतल से ऊंचाई 3650 मीटर) के दुर्गम ट्रेकिंग रूट से बसुधारा (पकुवा बुग्याल) तक पहुंच गए। जबकि इस रूट पर स्वस्थ लोग भी बहुत सोच-विचारकर आगे कदम बढ़ाते हैं। बैसाखी के जरिए उन्होंने 58 किमी की दूरी चार दिन में पूरी की।

40 वषीय अम्लान दत्ता मुंबई में आनंद बाजार पत्रिका में फोटोग्राफर हैं। कुछ साल पहले एक हादसे में उनका दायां पैर घुटने से नीचे कट गया था। विकलांग होने के बावजूद उनमें गजब का जज्बा है। बताते हैं कि जब उन्होंने ट्रेकिंग की इच्छा जताई तो शुरू में सभी ने मजाक समझा।
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उन्हें समझाया, लेकिन उनका जज्बा देख उनकी पत्नी और बेटे ने उन्हें ट्रेकिंग पर ले जाने की ठान ली। पत्नी, बेटे समेत 15 लोगों के ग्रुप के साथ वे मुंबई से निकल पड़े। आठ मई को लोहारखेत से उन्होंने पदयात्रा शुरू की।

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यहां की यात्रा बेहद सुरक्षित

amlan cross pindari glacier on one leg.

ये लोग फुरकिया होते हुए पिंडारी ग्लेशियर के दुर्गम ट्रेकिंग रूट से खाती तक गए। यहां से पकुवा बुग्याल के पास पांगू के बसुधारा नामक खूबसूरत स्थल तक का भ्रमण करने के बाद 12 मई को वापस खाती होते हुए खरकिया आए। उसके बाद यहां से वाहन के जरिए बागेश्वर पहुंचे।

श्री दत्ता ने बताया कि रास्ते में कंक्रीट होने के कारण बैसाखी के सहारे चलने में कुछ दिक्कतें हुई, लेकिन जज्बा हो तो कोई काम मुश्किल नहीं। कहते हैं कि उत्तरांखड जितना सुंदर है, यहां की यात्रा भी उतनी ही सुरक्षित है।

उन्हें कहीं किसी तरह की समस्या नहीं आई। उन्होंने संकल्प लिया कि अगले साल पिंडारी ग्लेशियर की ट्रेकिंग के लिए आएंगे। वापसी में श्री दत्ता ने खाती जीआईसी में 100 छात्र-छात्राओं को अपनी ओर से पेंसिल, पैन, रबर, रुलर, इरेजर, ज्योमैटिकल बाक्स आदि वितरित कीं।

बुग्याल में मिलती है शांति
हिमालयी क्षेत्र में पहाड़ियों के मध्य हरे-भरे घास के बड़े मैदानों को बुग्याल कहा जाता है। हमेशा घास से भरे रहने वाले इन मैदानों में ग्रीष्मकाल में ग्रामीण भेड़ों को चराने आते हैं।

यह बुग्याल प्राय: जन शून्य, शांत और हिमालय की चोटियों के करीब होने के कारण यहां आने पर अद्भुत शांति प्राप्त होती है। पिंडारी और कफनी ग्लेशियर के पैदल रास्ते पर खाती गांव से तकरीबन सात किमी दूर पकुवा बुग्याल 11 हजार मीटर की ऊंचाई पर है।

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