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उत्तराखंड में दिखेंगे अमेरिका और अंडमान के पेड़
ओमप्रकाश सती/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Thu, 04 Dec 2014 01:12 PM IST
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उत्तराखंड में अमेरिका और अंडमान की प्रजातियों के पेड़ भी दिखाई देंगे। वन विभाग की अनुसंधान शाखा ने अमेरिका के सबसे पुराने रेड वुड प्रजाति के बीज मंगाए हैं।
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अनुसंधान शाखा में पहुंचे रेड वुड के बीज
इसके अलावा अंडमान से बेहद संकटग्रस्त फाइकस अंडमानिका प्रजाति के संरक्षण की कोशिश शुरू की गई है। रेड वुड के बीज मंगाने के पीछे वन महकमा का तर्क प्रोडेक्शन फारेस्ट्री (हिल पॉपुलर, सागौन, यूकेलिप्टस की तरह) बढ़ावा देना है, जिससे लकड़ी की मांग को पूरा किया जा सके।
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वन महकमे ने सैलिक्स विलो (इसकी लकड़ी से बल्ला का निर्माण होता) आदि प्रजातियों का ट्रायल किया है। इससे स्थानीय लोगों को भी आय का नया विकल्प मिलेगा। इसी के तहत अमेरिका में फर्नीचर, घर समेत तमाम कामों में इस्तेमाल होने वाली रेड वुड प्रजाति के वृक्ष को भी तैयार करने की योजना बनाई गई है।
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रेड वुड के बीज वन विभाग के अनुसंधान शाखा में पहुंच भी गए हैं। अब इन बीजों का ट्रायल ज्योलीकोट नर्सरी में किया जाएगा। यहां का वातावरण रेड वुड के अनुकूल होने की संभावना है।
वहीं अंडमान में पाए जाने वाले फाइकस अंडमानिका के बीज भी वन विभाग ने मंगवाए हैं। जिन्हें लालकुआं स्थित विभाग की नर्सरी और फाइकेटम (यहां पर देश की विभिन्न प्रजातियों के फाइकस को लगाया गया है) में उगाने का प्रयास किया जा रहा है।
माना जा रहा है कि लालकुआं जैसी परिस्थितियों में फाइकस अंडमानिका तैयार हो सकता है। मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान एसके सिंह के अनुसार रेडवुड और फाइकस अंडमानिका के बीज हल्द्वानी पहुंच गए हैं, इसमें अंडमानिका संकटग्रस्त प्रजाति है, इसके संरक्षण और लोगों को जानकारी देने को ट्रायल भी लालकुआं नर्सरी में शुरू कर दिया गया है।
रेड वुड की खूबी
ज्योलीकोट नर्सरी में वन महकमा हिल पापुलर का ट्रायल किया है, जिसका व्यावसायिक इस्तेमाल होता है। अब रेड वुड को लगाने की तैयारी है। रेड वुड का इस्तेमाल फर्नीचर, घर निर्माण, घरों खंभे, चौखट आदि बनाने में किया जाता है। इस पेड़ पर मौसम, नमी आदि का प्रभाव नहीं पड़ता है।
लकड़ी को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों का प्रभाव भी बेहद कम रहता है। यह गांठरहित, दरार रहित बिल्कुल सीधी लकड़ी होती है। सीसीएफ एसके सिंह के अनुसार रेड वुड के जंगल को देखने को बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। अभी केवल इसका ट्रायल करने की योजना है। अगर ट्रायल सफल रहा है तो बड़े स्तर पर लगाने पर विचार किया जाएगा।