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राजदूत को ‘राजा’ से न मिल पाने का अफसोस
जितेंद्र पपनै/अमर उजाला, रामनगर
Updated Mon, 30 Sep 2013 09:40 AM IST
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विश्व पयर्टन दिवस पर सेमिनार में पहुंचे चार देशों के राजदूतों के लिए यह यात्रा और कार्बेट के गढ़ तक पहुंचना बेशक यादगार रहा हो लेकिन यहां से लौटते समय उनके पास अफसोस था, निराशा थी।
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सिर्फ इसलिए क्योंकि वो कार्बेट के घर में ‘राजा’ से नहीं मिल पाए। उसे देखने का आत्मीय आनंद उन्हें नहीं मिल पाया लेकिन वो आश्वस्त थे कि भविष्य में फिर आना हुआ तो तब केवल टाइगर देखना ही उनका मकसद रहेगा।
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झिरना रेंज में जिप्सी सफारी का आनंद
कार्बेट के झिरना रेंज में जिप्सी सफारी का आनंद लेने के बाद मलाल ईक्वोडोर के राजदूत मेंटर विंलागोम्ज बोले कि बहुत तमन्ना थी कार्बेट टाइगर रिजर्व में बाघ देखने की। जिम कार्बेट साहब की यह नगरी आज पहले से ज्यादा समृद्ध और सुंदर है।
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उनका कहना है कि सफारी के दौरान बाघ कहीं नहीं दिखा, जिसका उन्हें मलाल है। पेरू के राजदूत जेगलर पेयलिनिच, पनामा के राजदूत जूलियो बिला गाडला ने पार्क प्रशासन की व्यवस्थाओं पर संतोष जताया और कहा कि अब दोबारा बाघ देखने आएंगे।
पर्यटकों के लिए अच्छे इंतजाम
उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए अच्छे इंतजाम और उनके साथ मृदु व्यवहार, उनकी सुरक्षा का जो इंतजाम यहां है, ऐसा ही वह अपने देश में करने का सुझाव रखेंगे।
पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए पनामा से भारत के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू करवाने की कोशिश होगी। चिली के राजदूत क्रिस्टीनयन बेरोफ ने क्षेत्रीय सांसद सतपाल महाराज का आभार जताया।