अमर उजाला वेबीनार : व्यापारियों ने कहा - शाम सात बजे तक खुले बाजार, लेकिन सुरक्षा के हों इंतजाम
- अमर उजाला की ओर से आयोजित वेबीनार में व्यापारियों ने अपनी चिंताओं और चुनौतियों को रखा सामने
- व्यापारियों के सामने व्यापार और खुद को बचाने की कड़ी चुनौती
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देहरादून में कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। हर दिन बड़ी संख्या में संक्रमित सामने आ रहे हैं। लॉकडाउन में व्यापारी आर्थिक संकट के कगार पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में इनके सामने अपने व्यापार को बचाने की तो चिंता है ही खुद और परिवार को संक्रमण से बचाने की भी चुनौती है। इन्हीं चिंताओं और चुनौतियों को लेकर व्यापारियों में बाजार खोलने को लेकर मतभेद उभरे थे।
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हालांकि अब व्यापारी बाजार खोलने के समय को (सुबह सात बजे से शाम सात बजे) लेकर एकमत हैं। लेकिन कोरोना का खौफ बरकरार है। इन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रशासन को सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए, लॉकडाउन के नियमों का सख्ती से पालन करवाना चाहिए। अमर उजाला की ओर से आयोजित वेबीनार में व्यापारियों ने अपनी इन चिंताओं और चुनौतियों को खुलकर रखा।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पीक पर आना बाकी है। बाजार में हर किस्म का व्यक्ति आता है। कौन संक्रमित है, कौन नहीं है। इसका पता नहीं लग सकता। बाजार खोलने के समय का कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन व्यापारियों को खुद संक्रमण से बचना होगा और व्यापार को भी बचाना होगा।
- नवीन वर्मा, अध्यक्ष, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
बाजार खोलने को लेकर अब सब एकमत हैं। संक्रमण बढ़ने पर व्यापार मंडल ने मांग की थी कि बाजार खोलने की पूर्व व्यवस्था रहनी चाहिए। सरकार के निर्णय के बाद बैठकें आयोजित की। फिर व्यापारियों की स्थिति को देखते हुए निर्णय लिया गया कि वह दुकान खोलने के लिए स्वतंत्र हैं।
-सिद्धार्थ अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष, दून व्यापार मंडल
परिस्थिति के हिसाब से बाजारों का समय तय होना चाहिए। समय कितना भी हो लेकिन सुरक्षा के इंतजाम पूरे होने चाहिए। कोरोना संकट में जितना ग्राहक शाम चार बजे तक आ रहे थे, उतना ही शाम सात बजे तक भी है। इसलिए समय मायने नहीं है। व्यापारी अपने हिसाब से दुुकानें खोलें और खुद सावधानी बरतें।
- लालचंद शर्मा, व्यापारी नेता
कोरोना के कारण बाजार में ग्राहक नहीं है। व्यापारी आर्थिक तंगी की मार झेल रहे हैं। ऐसे में बाजारों के खोलने के समय से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि संक्रमण शाम चार बजे तक भी हो सकता है और रात नौ बजे तक भी। इसलिए व्यापारियों को खुद सावधानी बरतनी होगी।
-पंकज मैसोन, अध्यक्ष, दून वैली
महानगर व्यापार मंडल
जिस तरह से कोरोना का संकट बढ़ता जा रहा है, उससे ग्राहकों के साथ व्यापारियों में भी खौफ है। इसलिए व्यापार मंडल की कई इकाइयों ने बाजारों का समय पूर्व व्यवस्था के अनुरूप करने को कहा था। लेकिन, अब यह व्यापारियों पर निर्भर है कि वह दुकान कब तक खोलना चाहते हैं।
- सुनील मैसोन, महामंत्री
दून उद्योग व्यापार मंडल
बाजारों का समय जितना ज्यादा होगा, उससे भीड़ कम होगी, इसलिए सुबह सात से शाम सात बजे तक का समय सही है। भीड़ कम होगी तो बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होगा। लिहाजा, अब बाजारों में भीड़ नियंत्रित हो इसके प्रयास किए जाने चाहिए।
- प्रमोद गोयल, पदाधिकारी, प्रांतीय व्यापार मंडल
लॉकडाउन में व्यापारी कर्जदार हो गए हैं। उन्हें अपने व्यापार की चिंता हो रही है। इसलिए अब व्यापारी चाहता है कि ग्राहक बाजारों में आए। संक्रमण का खतरा तो रहेगा ही। लेकिन हमें और खुद लोगों को बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग के बेहतर तरीकों को खोजना होगा।
- राजेश अग्रवाल, संयुक्त मंत्री, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल
बाजारों के एंट्री प्वाइंट पर हो चेकिंग सुविधा
बाजारों को शाम सात बजे तक खोलने के लिए सभी व्यापारी एकमत हैं। लेकिन, बढ़ते संक्रमण पर इनका कहना है कि बाजार चाहे रात नौ बजे तक खुले पर ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे संक्रमण का खतरा कम से कम हो। बुधवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित वेबीनार में इन्होंने कहा कि जिस तरह कोरोना से बचाव के रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर व्यवस्था है उसी तरह प्रशासन को बाजार में एंट्री करते समय अधिक से अधिक लोगों की जांच की व्यवस्था करनी चाहिए।
अब बाजारों में भीड़ उमड़ने लगी है। इससे सोशल डिस्टेंसिंग व्यवस्था तार-तार होती नजर आ रही है। न सड़कों पर और न दुकानों पर इनका पालन होता दिख रहा है। जबकि प्रदेश के साथ ही दून में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में संक्रमण पर कैसे अंकुश लगे? इसके लिए आमजन के साथ-साथ व्यापारी भी चिंतित है। व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन संक्रमण को रोकने के लिए अपने हिसाब से इंतजाम कर रहा है, लेकिन जब तक बाजारों में एंट्री प्वाइंट पर चेक प्वाइंट नहीं बनाए जाते तब तक संक्रमण का खतरा बना रहेगा।
व्यापारी नेता लाल चंद शर्मा, सिद्धार्थ अग्रवाल, नवीन वर्मा, सुनील मैसोन, पंकज मैसोन, राजेश अग्रवाल का कहना है कि बाजारों में भीड़ में यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं। यदि बाजार में प्रवेश के समय चेकिंग की सुविधा हो जाए तो इससे संक्रमण पर कुछ अंकुश लग सकता है। व्यापारियों का भी दायित्व है कि वह सोशल डिस्टेंसिंग का खुद भी पालन करें और दूसरों से भी कराएं।