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अमर उजाला की इस पहल को देश और दुनिया के प्रसिद्ध लेखकों ने खूब सराहा, पढ़िए क्या कहा...

Wed, 28 Mar 2018 09:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 28 Mar 2018 09:56 PM IST
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amar ujala shabda samman dehradun
Writer : Nayantara Shagal - फोटो : amar ujala

‘इस पहल से साहित्य को नई ऊर्जा और साहित्यकारों को बेहतर मंच मिलेगा।’- अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ‘शब्द सम्मान’ दिए जाने की घोषणा पर पंडित जवाहर लाल नेहरु की भांजी और प्रख्यात लेखिका नयनतारा सहगल ने शुभकामनाओं के साथ यह प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस पहल से साहित्य को नई ऊर्जा और साहित्यकारों को बेहतर मंच मिलेगा। लिखने वाले जितने भी लोग हैं उनकी तरफ अमर उजाला ने ध्यान दिया, यह सराहनीय है। ऐसा करने से नए साहित्यकारों का जन्म होगा। युवा, साहित्य के क्षेत्र की ओर अग्रसर होंगे। एक दौर था जब अखबारों की खबरों में साहित्य देखने को मिलता था। इस प्रयास से एक बार फिर से खबरों में साहित्य की छाप दिखाई देगी।

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वे कहतीं हैं कि यह बात ध्यान देने वाली है कि इस पुरस्कार के लिए जो किताब या उपन्यास चुना जाए, उसका विषय हो समाज के लिए हमेशा के लिए जरूरी हो। दरअसल, आज-कल ज्यादातर जो साहित्य रचना हो रही, उसे लोग पढ़ते हैं और भूल जाते हैं। ऐसी किताबें भी हैं जो भटकाव की तरफ ले जाने वाली हैं। इसलिए चुनाव करते वक्त अमर उजाला के पैनल को इस बात का ध्यान विशेष रूप रखना होगा। अमर उजाला की यह पहल तभी सफल होगी जब ऐसे साहित्य को सम्मानित किया जाए जो देश को एकता से बांधे रखने वाला हो। उन्होंने कहा कि इस मुल्क में मेरे जैसे लाखों हिंदू हैं, जिन्हें हिंदुत्व को केवल एक धर्म मात्र बनाने देने पर दुख होता है। जो हिंदू धर्म से नहीं हैं, उनसे कहा जाता है कि वह देश में न रहें। ये बेहद दुखदायी बात है। ऐसी विचारधारा की कई किताबें भी प्रकाशित की जा रही हैं। हमें ऐसे साहित्य से बचना चाहिए। हिंदुस्तान सारे हिंदुस्तानियों का है। किताबों के भविष्य पर उन्होंने कहा कि रोज-रोज हालात बदल रहे हैं। टेक्नॉलॉजी तो समय के साथ बदलेगी ही, लेकिन ख्याल नहीं बदलने चाहिए।
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पारिवारिक वातावरण से मिली लेखक बनने की प्रेरणा
मेरा बचपन, मेरी जिंदगी कांग्रेस में रही है। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा कि राजनीति में जाऊं। मैं हमेशा से जानती थी कि मुझे लेखिका बनना है। मैं जिस वातावारण में पली-बढ़ी हूं, वह ही मेरी प्रेरणा है। गांधीजी और मेरे मामा पंडित जवाहर लाला नेहरू के साथ मेरे पिता रंजीत सीताराम पंडित, मां विजय लक्ष्मी पंडित ने देश को आजाद करने के लिए जो अहिंसा की लड़ाई लड़ी उसी ने मुझे लेखक बनने की प्रेरणा दी। इसलिए मेरे साहित्य में भी इसकी छाप देखने को मिलती है।
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राजधानी बनने के बाद मिले जुले बदलाव
राजधानी बनने के बाद से देहरादून में बहुत बदलाव आया है। एक ओर ज्यादा बिल्डिंग बनने से देहरादून का ग्रीन कवर कम हो रहा है। तो वहीं दूसरी ओर राजधानी बनने के बाद से दून में बड़े अस्पताल, स्कूल, मॉल खुले और अन्य कई सुविधाएं भी मिली हैं। नयनतारा सहगल ने कहा कि गैंरसैंण में राजधानी बननी चाहिए। गैरसैंण के लिए गढ़वाल ने बड़ी लड़ाई लड़ी है। इससे पहाड़ों में विकास होगा। देश में नोटबंदी यह कह कर की गई कि भ्रष्टाचार बंद हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नोटबंदी के लिए कोई तैयारी नहीं हुई। इसे एकदम से जनता पर लाद दिया गया। जिससे गरीब तबके को बहुत परेशानी हुई। मैं नोटबंदी के पक्ष में नहीं हूं।
 

नए और पुराने लेखकों के प्रोत्साहन की शानदार पहल

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Writer : Leeladhar Jaguri
‘यह खबर मेरे कानों में किसी खुशखबरी की तरह उतर रही है।’- अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ‘शब्द सम्मान’ दिए जाने की घोषणा पर बुधवार को प्रख्यात लेखक पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कुछ इस तरह से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमर उजाला की ओर से सम्मान की घोषणा होना पूरे हिंदी और भारतीय भाषा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। 

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में अखबारों और अन्य मीडिया माध्यमों में साहित्य, कला व लेखन की जगह पूरी तरह खत्म कर दी गई है। ज्यादातर मीडिया माध्यमों में इसके लिए कोई स्थान नहीं बचा। जबकि साहित्य, कला और अन्य रचनात्मक विधाओं के लिए हमारे सामाजिक जीवन में एक जगह जरूर होनी चाहिए। कहा भी कहा गया है कि ‘साहित्य, संगीत, कला विहीन:, साक्षात पशु पुच्छ विषाण हीन:’। इसलिए साहित्य व कलाओं की उपस्थिति में जीवन की सार्थकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपने विचारों से संस्कृति व सभ्यता को अंलकृत करने वाले रचनाकारों का अवदान सुरक्षित रखा जाना चाहिए। 

उन्होंने सम्मान की अलग-अलग श्रेणियां बनाए जाने पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि नए लेखकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही प्रतिष्ठित और स्थापित लेखकों की बेहतरी के लिए भी काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमर उजाला ने अलग-अलग श्रेणियां बनाकर सभी तरह के लेखकों की बेहतरी के लिए सोचा है। 

उन्होंने सुझाव दिया कि थाप में नए रचनाकारों और छाप में वरिष्ठ व स्थापित रचनाकारों को बराबर पुरस्कार राशि प्रदान की जा रही है। बेहतर होता कि वरिष्ठ लेखकों के लिए यह पुरस्कार राशि कुछ अधिक होती। उन्होंने आकाशदीप अलंकरण में पुरस्कार राशि पांच लाख रुपये रखने पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार राशि बेहद सम्मानजनक है। 
 

साहित्यकारों के लिए बेहद उत्साहजनक है ‘अमर उजाला शब्द सम्मान’

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Writer : Ruskin Bond
जितनी तेजी से तकनीक और इंटरनेट की दुनिया बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से साहित्य गुम होता जा रहा है। ऐसे विकट समय में यह जरूरी है कि न केवल पुराने साहित्यकार बल्कि युवा साहित्यकारों को भी प्रोत्साहित किया जाए।

ऐसे समय में ‘अमर उजाला शब्द सम्मान’ बेहद उत्साहजनक कदम है। निश्चित तौर पर इससे साहित्यकारों को एक नई ऊर्जा के साथ काम करने की प्रेरणा मिलेगी। साहित्य की दुनिया में बेहद सम्मान से नवाजे जाने वाले लेखक एवं साहित्यकार रस्किन बांड ने कुछ इन्हीं शब्दों के साथ ‘अमर उजाला शब्द सम्मान’ की तारीफ की।

उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बाजार आने के बाद बुक शॉप की संख्या घटती जा रही है। यहां किताबें तो रखी रहती हैं लेकिन कोई खरीदने वाला नहीं होता। इससे भी साहित्यकारों का उत्साह गिरता है। अमर उजाला ने पहल की है, जो दूर तक जाएगी। साहित्यकार प्रोत्साहित होंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ी भी साहित्य के प्रति रुचि रखेगी।
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