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Amar Ujala Samvad: उत्तराखंड के विकास पर धुर विरोधी दिग्गजों की राह एक, दो पूर्व सीएम के पढ़ें बेबाकी से जवाब

Mon, 05 Aug 2024 11:35 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 05 Aug 2024 11:35 AM IST
सार

संवाद के मंच पर राज्य के दो पूर्व सीएम ने सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। कहा कि सरकारें बेशक बदल जाएं पर विकास के रोडमैप पर काम चलता रहना चाहिए।

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Amar Ujala Samvad Dehradun Uttarakhand On the stage two former CM of the state answered the questions frankly
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला संवाद में भाजपा व कांग्रेस के दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और हरीश रावत उत्तराखंड राज्य गठन की अवधारणा के अनुरूप विकास और अन्य ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए आमने-सामने थे। धुर विरोधी विचारधारा के इन दोनों सियासी दिग्गजों की विकास के मुद्दे पर राह जुदा नहीं दिखी।

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उनका मानना है कि जिन उम्मीदों को लेकर राज्य का गठन हुआ, उन सपनों को पूरा करने के लिए विकास का लक्ष्य चिह्नित कर रोडमैप होना चाहिए। सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन विकास के लिए फोकस एरिया नहीं बदलने चाहिए। कार्यक्रम के मॉडरेटर अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री ने दोनों दिग्गजों से जो प्रश्न किए, उनके उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और वैचारिक प्रतिबद्धताओं के आधार पर जवाब दिए।

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पलायन और बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती : हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, संवाद में नामचीनी हस्तियों के विचार व कार्य गाथा को सुनने का अवसर मिलता है, लेकिन अमर उजाला ने विपक्ष को भी संवाद का हिस्सा बनाकर नई पहल की है। पक्ष-विपक्ष के बिना लोकतांत्रिक जीवन पूरा नहीं हो सकता है। मेरा मानना है कि सपने पूरे करने के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहना चाहिए। उत्तराखंड राज्य का आगाज शानदार था।

कहा, हमने राज्य की बुनियादी चीजें और निर्माण के कारक को भूल गए, जबकि ये प्रेरणा के स्रोत होने चाहिए। धीरे-धीरे हम फिर से उत्तर प्रदेश की कॉपी कर रहे हैं। 2014 में कांग्रेस सरकार के समय हमने यह प्रयास किया था कि उत्तराखंड किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए उत्तराखंडियत का नाम दिया। दुख है कि 2017 के बाद से उत्तराखंडियत की तरफ बढ़ते कदम रुक गए। राज्य गठन के बाद वर्ष 2004 में टैक्स होली डे स्कीम के तहत प्रदेश में औद्योगिकीकरण का फायदा हुआ।

प्रतिव्यक्ति आय को तीन गुना कर सकते
तत्कालीन तिवारी सरकार के समय प्रदेश में नए सिडकुल क्षेत्र विकसित हुए। प्रदेश में आज सबसे बड़ी चुनौती पलायन और बेरोजगारी की है। प्रदेश की बेरोजगारी दर 9.5 प्रतिशत से अधिक है। प्रतिव्यक्ति आय भी पिछले सात साल में थम सी गई है। यदि संसाधनों का ठीक से नियोजन करें तो प्रतिव्यक्ति आय को तीन गुना कर सकते हैं।

कहा, राज्य के विकास के लिए रोडमैप बनाकर आगे बढ़ना होगा। बार-बार मुख्यमंत्री बदलते हैं और विकास की सोच भी बदल जाती है। एक सवाल के जवाब में कहा, मोदी के संगीत में हम लोगों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाए, लेकिन देश में बदलाव आ रहा है। रावत ने अग्निवीर के मुद्दे पर कहा, उत्तराखंड की पहचान सैनिकों व पूर्व सैनिकों से है, लेकिन इस योजना से रेजिमेंट आधारित हमारी सैन्य परंपरा खत्म हो जाएगी।

 

देश का मॉडल राज्य बनने की उत्तराखंड में क्षमता : निशंक

पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, उत्तराखंड आंदोलन में अमर उजाला संघर्ष का साथी रहा है। जब आंदोलन चल रहा था, तब हम उत्तर प्रदेश का हिस्सा थे। चूंकि उत्तर प्रदेश इतना बड़ा राज्य था कि यहां से पर्वतीय क्षेत्र में आने से अफसर और कर्मचारी कतराते थे, लेकिन यूपी से अलग होने के बाद प्रदेश में विकास के मार्ग खुल गए हैं।

कहा, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने आंदोलन का सम्मान कर उत्तराखंड राज्य का गठन किया। राज्य बनने से पहले और वर्तमान में उत्तराखंड काफी बदल चुका है। अवस्थापना और औद्योगिक विकास में नवोदित राज्यों में उत्तराखंड श्रेष्ठ है। विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। उत्तराखंड में देश का मॉडल राज्य बनने की क्षमता है। औद्योगिक पैकेज और विशेष राज्य के दर्जा मिलने से राज्य में नए उद्योग लगे। इसमें पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी का योगदान रहा।

उपलब्ध संसाधनों के आधार पर होना चाहिए रोडमैप
कहा, राज्य के विकास के लिए लक्ष्य और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर रोडमैप होना चाहिए। हरीश रावत के तंज पर निशंक ने कहा, दुनिया में मोदी संगीत चल रहा है। इस संगीत में झंकार भारत की है। पर्यटन व तीर्थाटन के साथ शिक्षा हब के रूप में उत्तराखंड की देश दुनिया में पहचान है। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब केंद्र में दूसरी पार्टी की सरकार थी।

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कहा, केंद्र व राज्य में अलग-अलग दल की सरकार होती है, तो काम करना मुश्किल होता है। उन्होंने डबल इंजन की सरकार के महत्व को रखा। कहा, डबल इंजन की सरकार में उत्तराखंड में ऐतिहासिक विकास कार्य हुए। अग्निवीर योजना पर हरीश रावत के सवाल पर पलटवार करते हुए कहा, योजना से पहचान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसका दुष्प्रचार किया जा रहा है। योजना से युवाओं को सेना में आने के और अवसर मिलेंगे और इस बात को उत्तराखंड भी समझ रहा है।

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