अमर उजाला संवाद: व्यापारी बोले, प्लास्टिक पैकिंग छोड़ देंगे, कुल्हड़ के लिए मिट्टी कहां से लाएंगे?
प्लास्टिक की पैकिंग तो छोड़ देंगे, पर कुल्हड़ के लिए मिट्टी कहां से लाएंगे? सोमवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में व्यापारियों ने यह मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि प्रशासन ने मिट्टी के खनन पर रोक लगाई हुई है, ऐसे में कुल्हड़ आदि कैसे बनेंगे?
हलवाई समिति देहरादून के आनंद स्वरूप गुप्ता ने कहा कि मौजूदा समय में प्लास्टिक का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। जिसके चलते मिट्टी के कुल्हड़ बनाने का कार्य राजधानी में काफी हद तक बंद हो चुका है। आज मिट्टी की एक ट्रॉली आठ से 10 हजार रुपये की मिलती है। मिट्टी के खनन पर रोक है। ऐसे में कुल्हड़ कैसे बनेंगे। बताया कि यमुना कॉलोनी के पास स्थित कुम्हार मंडी में अब कुम्हार भी कम हैं, जो हैं वे इस काम को छोड़ चुके हैं।
पहले कुम्हारों को मिट्टी उपलब्ध करानी होगी, साथ ही उन्हें पर्याप्त मुनाफा भी मिले, इसका भी ध्यान रखना होगा। तभी वह अपने पुराने व्यवसाय पर लौटेंगे। अन्य व्यापारियों ने भी इस पर चिंता जताई। वहीं, चिलीज रेस्टोरेंट के मालिक संजीव नारंग ने कहा कि कुल्हड़ के अलावा आज बाजार में बायो डिग्रेडेबल डिस्पोजल आ रहे हैं, उसका प्रयोग भी किया जा सकता है।
मिट्टी के कुल्हड़ के फायदे
- कुल्हड़ मिट्टी से बनता है, जो शरीर स्वस्थ रखता है।
- कुल्हड़ में चाय पीने से पाचन तंत्र नहीं बिगड़ता है।
- कुल्हड़ की चाय से हड्डियां मजबूत होती हैं।
- कुल्हड़ की मिट्टी में कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में होती है, जो शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करता है।
- मिट्टी से बने होने की कारण इससे भीनी खुशबू आती है, जिससे इसका स्वाद भी अच्छा लगता है।
कारोबारियों ने लिया संकल्प, प्लास्टिक यूज नहीं करेंगे
अमर उजाला संवाद में सोमवार को कारोबारियों ने संकल्प लिया कि वह सिंगल यूज प्लास्टिक (प्लास्टिक के कैरीबैग, चम्मच, प्लेट, ग्लास, स्ट्रॉ और थर्माकोल आदि) का इस्तेमाल नहीं करेंगे। साथ ही लोगों से भी अपील करेंगे कि वह इसका प्रयोग बंद करें।
कारोबारी आनंद स्वरूप गुप्ता ने कहा कि प्लास्टिक का उत्पादन बंद कर देना चाहिए, साथ ही लाइसेंस भी रद्द करना चाहिए। ये दोनों काम होने से प्लास्टिक खुद ब खुद पूरी तरह से बंद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अभियान और जागरुकता के जरिये प्लास्टिक के इस्तेमाल में कमी तो आ सकती है, लेकिन पूरी तरह से बंद नहीं हो सकती, बल्कि कालाबाजारी बढ़ने की आंशका बनी रहेगी। पेपर एंड प्लास्टिक कारोबारी सुनील माटा ने कहा कि वह अब सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर देंगे।
अधिकतर कारोबारियों का कहना था कि कागज भी काफी महंगा है, ऐसे में सरकार को सस्ते विकल्पों पर काम करने की जरूरत है। ताकि उपभोक्ता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। व्यापारी विपिन नागलिया, मीत अग्रवाल, सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल, सुनील मैसोन, विजेंद्र थपलियाल आदि ने भी सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने का संकल्प लिया।
प्लास्टिक की बजाय ये कैरीबैग करें प्रयोग
कॉटन बैग : कॉटन कपड़े से बने काफी मजबूत होते हैं। अंदर के हिस्से के लिए अलग-अलग कपड़ा प्रयोग होता है।
जूट बैग : मौजूदा समय में जूट बैग का काफी क्रेज है। इसमें आप सब्जी, कपड़े आदि अन्य सामान ला सकते हैं। इसके अलावा पर्स के रूप में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है।
पेपर बैग : प्लास्टिक बैग के स्थान पर पेपर बैग का भी प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन इसमें अधिक भारी सामान नहीं ले जाया जा सकता है। इसमें कपड़े या हल्के सामान ही लाए और ले जा सकते हैं।
बायो डिग्रेडेबल प्लास्टिक बैग
बाजार में बायो डिग्रेडेबल प्लास्टिक बैग भी उपलब्ध हैं। जो प्रकृति को किसी भी तरह की हानि नहीं पहुंचाते हैं। इस्तेमाल के बाद ये आसानी से गल जाते हैं।
हमारे लिए लोगों के स्वास्थ्य से बड़ी चीज कुछ नहीं है। इसको लेकर ही निगम ने प्लास्टिक के खिलाफ अभियान शुरू किया है। अभी दुकानदारों, व्यापारियों और कारोबारियों से प्लास्टिक छोड़ने की अपील कर रहे हैं। प्लास्टिक दान दे दो अभियान के जरिये उनसे प्लास्टिक एकत्र की जा रही है। सभी का सहयोग भी मिल रहा है। इसका दून में असर भी दिख रहा है। जो प्यार से मानेगा, उसे मनाएंगे। दो अक्तूबर के बाद भी इसका इस्तेमाल मिलता है तो सख्ती करेंगे और डंडा भी चलाएंगे।
- सुनील उनियाल गामा, मेयर
निगम ने अभी तक चले अभियान में किसी दुकानदार, व्यापारी और कारोबारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। शहर की अधिकतर नालियों के चोक होने की वजह सिंगल यूज प्लास्टिक ही है। ये दून की खूबसूरती में दाग की तरह है, जिसे खत्म किया जाएगा। शहर की दुकानों पर स्लोगन लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। 54 हजार लोेग प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने की शपथ ले चुके हैं। हम 50 किमी मानव शृखंला बनाकर दून में इसके खिलाफ जागरूकता करेंगे।
- विनय शंकर पांडेय, नगर आयुक्त