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मेधावी छात्र सम्मान: सम्मान के उत्साह में मीलों दूर से पहुंचे, घंटों तक डटे रहे मेधावी

Sun, 28 Jul 2019 10:13 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 28 Jul 2019 10:13 AM IST
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Amar ujala Medhavi samman 2019 student reached from very far to get honor
दूर-दूर से सम्मान पाने को पहुंचे मेधावी - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय के हाथों मेधावियों में सम्मान का उत्साह साफ नजर आया। वह मीलों दूर दुर्गम इलाकों से दून पहुंचे। कई घंटे तक कार्यक्रम में जमे रहे। मेधावियों के साथ-साथ अभिभावक भी उत्साहित नजर आए।

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जीएमएस रोड स्थित होटल में अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान के लिए सुबह से होनहारों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। सब मंत्री और मुख्यमंत्री का बेसब्री से इंतजार करने लगे। जैसे ही शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय पहुंचे तो सबने तालियों से उनका स्वागत किया। मंत्री भी छात्रों-अभिभावकों के उत्साह के बीच खुद को रोक नहीं पाए। वह सीधे उनके बीच चले गए। उनसे बातें की। उनका उत्साह महसूस किया।
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छात्रों ने भी मंत्री के साथ जमकर सेल्फी ली। बच्चे खुद को मंत्री के बीच पाकर बेहद खुश नजर आए। उसके बाद मुख्यमंत्री पहुंचे तो उनका भी जोरदार तालियों से स्वागत किया। इससे पूरा माहौल खुशनुमा हो गया। बच्चे हों या अभिभावक, सभी मुख्यमंत्री-मंत्री के हाथों सम्मान को लेकर बेहत उत्साहित नजर आए।
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मंत्री से फेस-टू-फेस बात है इतिहास
कई मेधावी तो मंत्री के सामने अपनी बात रखने को भी उत्साहित नजर आए। उनका कहना था कि मंत्री को फेस करना उनके जीवन में एक इतिहास की तरह है। 
 

स्कूल पहुंचने को किया रोजाना 20 किमी का सफर 

घर से करीब 20 किमी दूर स्कूल। रोजाना सुबह स्कूटी से करीब एक घंटे का सफर तय कर स्कूल पहुंचना और लौटना। धूप हो या बारिश। सर्दी हो या गर्मी। सुबह घर से निकलना और पढ़ाई करने के बाद देर से लौटना। लेकिन, मन में कुछ करने की ललक  थी, इसलिए यह चुनौती ज्यादा परेशान नहीं कर पाई। यह कहानी है उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में प्रदेश में पहला स्थान हासिल करने वाली शताक्षी तिवारी की। शताक्षी के पिता अनूप तिवारी इंजीनियर और मां सुनीता तिवारी सीएचसी छाम में कार्यरत हैं।

रोजाना करीब 20 किमी का सफर तय कर शताक्षी कंडीसौड़ स्थित अपने घर से सरस्वती विद्या मंदिर चिन्यालीसौड़ पहुंचती और शाम को घर लौटती थी। करीब 20 किमी दूर स्कूल आने-जाने के लिए माता-पिता ने शताक्षी को स्कूटी खरीदकर दी। आने-जाने में इतना ज्यादा समय लग जाता कि शताक्षी के पास ट्यूशन जाने का भी समय नहीं बचता था। ऐसे में वह घर पर रोजाना करीब छह घंटे तक पढ़ाई करती थी। शताक्षी ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों को भी दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने समर्पित होकर मेहनत की, जिससे विद्यालय के कई छात्र सफलता हासिल करने में कामयाब हुए। 

निजी विद्यालय छोड़कर विद्या मंदिर में लिया प्रवेश

अच्छी शिक्षा और सफलता हासिल करने के लिए एक तरफ जहां निजी स्कूलों में प्रवेश की मारामारी लगी है। वहीं, अनंता सकलानी ने इसके ठीक उलट निजी विद्यालय छोड़कर विद्या मंदिर में प्रवेश लिया। उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल प्रवेश परीक्षा में प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल कर अनंता ने निजी स्कूलों को सफलता का पर्याय मानने वालों के मुंह पर ताला जड़ दिया। 

अनंता के पिता प्रशांत सकलानी पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिल्ला रायपुर में सहायक अध्यापक और मां सुनीता सकलानी प्राथमिक विद्यालय भोपालपानी में शिक्षिका हैं। अनंता की तीसरी तक की पढ़ाई चमोली जिले में और उसके बाद सातवीं तक पढ़ाई दून इंटरनेशनल स्कूल में हुई। आठवीं में अनंता ने दून इंटरनेशनल छोड़कर सरस्वती विद्या मंदिर नथुआवाला में प्रवेश लिया। तब लोगों ने अनंता के माता-पिता से कहा कि बाकि सब निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए चक्कर काट रहे हैं और आप उल्टी गंगा बहा रहे हो। लेकिन दो साल में अनंता ने अपनी मेहनत और लगन से उन सबको गलत साबित कर दिया। 
अनंता ने बताया कि वह विज्ञान से बारहवीं की पढ़ाई करने के बाद मानविकी लेकर सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहती हैं। 

शिक्षकों ने बढ़ाया हौसला
निजी विद्यालय छोड़कर जब अनंता ने विद्या मंदिर में प्रवेश लिया तो रिश्तेदारों और परिचितों ने सवाल उठाए। तब शिक्षकों ने उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बताया कि फिजिक्स टीचर मुकेश ममगाई और मैथ्स टीचर रामेंद्र ने कहा कि अपनी मेहनत से वह सबको जवाब दे सकती है।

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