अमर उजाला महाकुंभ कॉन्क्लेव 2025: संतों ने बताया कुंभ का धार्मिक महत्व, लोगों की जिज्ञासाओं को किया दूर
Amar Ujala Maha Kumbh Conclave 2025: संतों ने नदियों के प्रदूषित होने पर चिंता जताते हुए गंगा, यमुना और सरस्वती की पवित्रता बनाने का संकल्प लिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाकुंभ कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में साधु-संतों ने कुंभ का धार्मिक और पौराणिक महत्व बताने के साथ लोगों की जिज्ञासाओं को भी दूर किया। कहा कि कुंभ कोई मेला नहीं है। इसे न तो मेले के रूप में लेना चाहिए और न ही यह कि वहां जाना चाहिए। संतों ने नदियों के प्रदूषित होने पर चिंता जताते हुए गंगा, यमुना और सरस्वती की पवित्रता बनाने का संकल्प लिया।
कुंभ में आध्यात्म, ब्रह्म व आत्मविद्या पर मंथन की जरूरत : हरिचेतना गिरी
महामंडेश्वर हरिचेतना गिरी महाराज ने कहा कि प्रयागराज में पूर्ण कुंभ होने जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, दो ही कुंभ होते हैं। पहला अर्द्ध और दूसरा पूर्ण कुंभ। कई लोग सवाल करते हैं, कुंभ कब शुरू हुआ। पांच हजार साल पहले समुद्र मंथन के बाद कुंभ प्रारंभ हुआ। कुंभ मेला नहीं है। न ही मेले के रूप में वहां देखने जाना चाहिए। समुद्र मंथन का अर्थ मनोमंथन से है। पूर्ण कुंभ में मनो मंथन जरूरी है। प्रयागराज कुंभ का इसलिए विशेष महत्व है कि वहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है। कुंभ सिर्फ साधु-संतों का नहीं, बल्कि यह मनुष्य व जीव मात्र का है, जिसमें ब्रह्म, आत्म व आध्यात्म विद्या पर चर्चा करने की जरूरत है। गंगा जल का महत्व बताते हुए कहा, पानी और जल में अंतर है। पानी तो टैंक से आता है। गंगा, यमुना और सरस्वती के जल को पानी बोलने पर पाप लगेगा, लेकिन जल बोलने पर पुण्य मिलेगा। आज हमें वृक्ष को फलदार, नदी को जलधार और आदमी को वफादार बनाना है। यह तभी संभव है, जब धर्म और आध्यात्म से जुड़ेंगे। जब राम राज्य आएगा, तो किसी के घर में ताला नहीं होगा। वह समय आने वाला है। अखंड भारत का सपना साकार हो रहा है। पवित्र नदियों को मैला करने के लिए पवित्रता का ध्यान रखना होगा। इसके लिए उन्होंने संकल्प दिलाया। कहा, कुंभ से एक प्रेरणा लें और एक दें। यह खुशी की बात है कि प्रयागराज का पूर्ण कुंभ एक योगी करा रहा है।
अमर उजाला कॉन्क्लेव 2025: बोले विशेषज्ञ, महाकुंभ में नदियों की स्वच्छता और संरक्षण का भी संदेश दिया जाए
कुंभ से मिलती है सकारात्मक ऊर्जा : दर्शन भारती
निरंजनी अखाड़ा परिषद के महंत दर्शन भारती ने कुंभ में अखाड़ों के महत्व के बारे में बताया। कहा, कुंभ में संत-महात्माओं के दर्शन से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसे मैंने महसूस किया है। उन्होंने अपने संन्यासी जीवन को साझा करते हुए बताया, मैं 1972 में साधु बना। इसके बाद अखाड़ों में रहने का मौका मिला। साधु-संतों के भी मन और विचार होते हैं। जिससे कई बार मतभेद भी हो जाता है। 1977 में मैं नागा बना, लेकिन आज तो सीधे डिग्री मिलती है। गुरु महाराज को ध्वज लेकर हरिद्वार कुंभ में आया, तो दिव्य साधु के दर्शन प्राप्त हुए। जिससे मुझे ऊर्जा मिली।
गंगा का स्मरण और दर्शन मात्र से होते हैं पवित्र : गोविंद दास
पंचायती बड़ा अखाड़ा के महंत गोविंद दास महाराज ने कहा, गंगा का स्मरण और दर्शन मात्र से मनुष्य पवित्र हो जाता है। कुंभ का हमारे शास्त्रों में बहुत ही महत्व है। प्राचीन परंपरा रही है कि धर्म की सत्ता साधु-संतों के पास होती है, लेकिन धर्म की रक्षा करना राज सत्ता का काम है। साधु का काम जनकल्याण करना है। कुंभ में एक घाट पर साधु-संत स्नान करते हैं, वहीं दूसरे घाट पर पक्षी और पशु स्नान करते देखे जा सकते हैं। कुंभ मनुष्य के साथ जीव प्राणी का भी है। नदियों की दूषित होने से बचाना होगा। आज लोग स्नान कर अंग वस्त्र वहीं फेंक देते हैं। लोगों को लगता है पाप अंगवस्त्र में है। गंगा और यमुना हमारी धरोहर हैं। इनकी पवित्रता को बनाए रखना है।
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए धार्मिक चेतना की जरूरत : नितिन
गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा, गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए धार्मिक चेतना की जरूरत है। हमें इस बात को समझना होगा कि गंगा धरती पर क्यों आईं। यह तो स्वर्ग लोक में बहने वाली मां गंगा थीं। धरती में कोई ऐसा तत्व नहीं था, तो स्वर्ग तारण करे। इसलिए मां गंगा का आह्वान किया गया। तब गंगा धरती पर प्रकट हुई। शास्त्रों में कहा गया कि शिव की जटाओं में गंगा है। गंगा जल में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का तत्व देखने को मिलता है। गंगा प्रदूषित होगी तो पूरी सनातन धर्म पर प्रभाव देखने को मिलेगा। प्रकृति में प्रकृति का मिलन होता है, तो प्रदूषण नहीं होता, लेकिन मानवीय अपशिष्ट मिलने पर गंगा प्रदूषित होती है।
नियमित योग का लें संकल्प: आचार्य अर्शदेव
पतंजलि योगपीठ के आचार्य अर्शदेव ने योग के महत्व को बताया। कहा, पूर्ण कुंभ पर हमें सभी को नियमित योगाभ्यास का संकल्प लेना होगा। योग भी हमारी प्राचीन संस्कृति से जुड़ा है। योगाभ्यास से हम खुद को स्वस्थ व निरोग रख सकते हैं। हमारी धर्मों में स्नान, तप व स्वाध्याय की परंपरा रही है। घर पर योगाभ्यास करना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन योग की क्रियाएं सही होनी चाहिए। बाबा रामदेव योग से हर बीमारियों को दूर करने के बारे में बताते हैं। योग संजीवनी है। कुंभ पर योग का संकल्प लें।
गंगा के प्रति मां का भाव लाने की जरूरत : उज्जवल पंडित
युवा पंडा समाज के अध्यक्ष उज्जवल पंडित ने पंडों की भूमिका के बारे में जानकारी दी। कहा, हमें गंगा को समझना होगा। स्वामी विवेकानंद शिकागो गए तो उनसे सवाल किया पवित्र नदी कौन सी है। जवाब दिया कि यमुना है। उनके इस जवाब ने सवाल पूछने वाले ने आश्चर्य जताया। लोग गंगा को पवित्र नदी मानते हैं। इस पर विवेकानंद ने कहा, गंगा तो हमारी मां है। वह गंगा कैसी हो सकती है। हमें भी गंगा के प्रति इस तरह का भाव लाने की जरूरत है। गंगा जल सैकड़ों वर्ष तक खराब नहीं होता है।