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अमर उजाला कॉन्क्लेव 2025: बोले विशेषज्ञ, महाकुंभ में नदियों की स्वच्छता और संरक्षण का भी संदेश दिया जाए

Thu, 28 Nov 2024 09:13 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 28 Nov 2024 09:13 PM IST
सार

पहले सत्र में पर्यावरणविद् पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, दून विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सुरेखा डंगवाल और डीएवी पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर डॉ. राम विनय सिंह ने महाकुंभ संस्कृति से समाज तक विषय पर अपने विचार रखे।

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Amar Ujala Maha Kumbh Conclave 2025 Experts said, message of cleanliness of rivers should also be given
अमर उजाला महाकुंभ कॉन्क्लेव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला महाकुंभ कॉन्क्लेव 2025 में आए विशेषज्ञों ने गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों की स्वच्छता और संरक्षण का संदेश देने पर जोर दिया। कॉन्क्लेव के पहले सत्र में पर्यावरणविद् पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, दून विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सुरेखा डंगवाल और डीएवी पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर डॉ. राम विनय सिंह ने महाकुंभ संस्कृति से समाज तक विषय पर अपने विचार रखे।

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साधु-संत नदियों के संरक्षण का भी संदेश दें: डॉ. जोशी
हेस्को के संस्थापक पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि आस्था बहुत महत्वपूर्ण है। महाकुंभ की गहराई में जाएंगे, तो पता चलता है कि हम इससे कितने करीब से जुड़े हैं। लेकिन जब नदियां नहीं बचेंगी, उनकी स्वच्छता नहीं रहेगी तो कुंभ में स्नान कैसे होगा। उन्होंने सभी साधु-संत समाज से अपील की कि नदियों की वैज्ञानिक रिपोर्ट सबके सामने है। इस वैचारिक पहलू को आमजन के बीच ले जाएंगे, तो सही मायने में हम ब्रह्मांड का उपयोग कर सकेंगे। नदियों के संरक्षण का संदेश सबसे अहम है। हम प्रकृति को प्रणाम करके प्रभु को याद करेंगे, तो निश्चित तौर पर सबका उद्धार होगा।
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अमर उजाला कॉन्क्लेव: चार सत्रों में हुआ मंथन, महाकुंभ का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पहलू समझा गए विशेषज्ञ

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Amar Ujala Maha Kumbh Conclave 2025 Experts said, message of cleanliness of rivers should also be given

गंगा नहीं भगवती गंगा मानने से बचेगी पवित्रता : डॉ. रामविनय
डॉ. रामविनय सिंह ने कहा- गंगा को केवल नदी नहीं, भगवती गंगा समझेंगे तो आध्यात्मिक चेतना उत्पन्न होगी। जिससे इसकी पवित्रता की रक्षा होगी। जो धरती को जल से पूर्ण कर दे, वह कुंभ कहलाता है। पौराणिक युग में समुद्र मंथन के कथानक के साथ इसका प्रसंग आया है। स्कंद पुराण में कई प्रसंग आए हैं। समुद्र मंथन से जो अमृत कलश निकला, उसे इंद्र देवता के पुत्र लेकर भागते हैं। भागते समय 12 स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरती हैं। चार स्थान पृथ्वी और आठ स्थान देवलोक में हैं। देवलोक में भी कुंभ होता है। डॉ. सिंह ने कहा, धर्म मानव सभ्यता का सबसे बड़ा वैज्ञानिक अनुसंधान है।

सनातन संस्कृति का सेलिब्रेशन है महाकुंभ: डॉ. डंगवाल
डॉ. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि महाकुंभ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहलू हैं। यह सनातन संस्कृति का सेलिब्रेशन है। कुंभ का आयोजन वैज्ञानिकता के आधार पर होता है। यह पश्चिमी देशों के लिए भी अद्भुत है। यहां हठयोग, नागा साधु से लेकर संस्कृति के सभी संवाहकों को सम्मान मिलता है। कुंभ में समाधान है। पूरे विश्व की अराजक सोच का समाधान है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमें इतने बड़े सांस्कृतिक, धार्मिक आयोजन को विकास से भी जोड़ना है।

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