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यौन शोषण पीड़िता का देहरादून से पुराना नाता

Fri, 29 Nov 2013 10:29 AM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 29 Nov 2013 10:29 AM IST
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amar ujala found molestation victim house

अपर सचिव गृह पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली युवती का ठिकाना अमर उजाला ने खोज निकाला है। युवती जीएमएस रोड स्थित शांति विहार में डेढ़ साल से रह रही थी।

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देहरादून में रही डेढ़ साल
यही वह जगह है जहां उसने पहली बार रेप होने की बात अपने बयानों में दर्ज कराई। इस बाबत मकान मालिक राहुल वर्मा का कहना है कि युवती ने जो कमरा किराये पर लिया था वह तीसरी मंजिल पर है और इसका रास्ता घर के बीच से होकर जाता है।
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राहुल के मुताबिक युवती इस घर में लगभग डेढ़ साल रही लेकिन इस दौरान उससे कोई भी मिलने नहीं आया। सितंबर माह में युवती अचानक घर छोड़कर चली गई। राहुल का कहना था कि परिवार के लोगों ने उससे कमरा छोड़ने का कारण पूछा लेकिन उसने कुछ बताया नहीं।

सिर्फ इतना ही बोली कि उसे कहीं और कमरा मिल गया है। अपने बारे में जानकारी भी बस यही दी थी कि वह हल्द्वानी की रहने वाली है और अविवाहित है। उसने अपना जो नाम बताया था वह मुस्लिम था। उन्होंने बताया उससे मिलने भी कभी कोई नहीं आता था। वह सुबह ड्यूटी पर चली जाती थी और शाम को घर लौटती थी।

खौफ में है मकान मालिक का परिवार
युवती के बयान के बाद अब मकान मालिक का परिवार खौफ में है। उनका मानना है कि युवती के बयान से उनके घर की बदनामी हो रही है। उन्हें डर है कि अब पुलिस उनसे पूछताछ करने आएगी तो पूरे शांति विहार में उनकी प्रतिष्ठा खराब होगी।

युवती के बयानों में झोल
युवती ने दिल्ली पुलिस को जो तहरीर दी थी उसमें उसने कहीं नहीं बताया कि वह विवाहिता है। जबकि अपने मकान मालिक को भी युवती ने नहीं बताया था कि वह विवाहिता है। युवती ने अपने मकान मालिक से यह भी झूठ बोला कि वह हल्द्वानी की रहने वाली है।

जबकि वह कभी हल्द्वानी रही ही नहीं। दिल्ली पुलिस को दी गई तहरीर में युवती की जन्मतिथि और फैमिली कोर्ट में जमा किए दस्तावेजों में उसकी विवाह की तिथि में भी गड़बड़झाला है।

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फैमिली कोर्ट में उसने अपनी विवाह का वर्ष 1997 दर्शाया है और दिल्ली पुलिस को दी गई तहरीर में अपनी उम्र 29 साल बताई है। ऐसे में उसके विवाह 13 साल की उम्र में होने की बात सामने आ रही है।

आसाराम गिरफ्तार, अपर सचिव क्यों नहीं?
सुप्रीम कोर्ट का साफ आदेश है कि दुराचार के मामलों में पीड़िता के 164 के बयान (मजिस्ट्रेट के समक्ष) ही गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त हैं। इसी आधार पर आसाराम बापू और कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई है।


वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में अग्रिम जमानत मिलने का प्रावधान नहीं है। हालांकि गिरफ्तारी में अपर सचिव को स्टे मिल सकता है। यही बात अपर सचिव की तरफ से युवती के खिलाफ दर्ज मुकदमे में भी लागू होती है।

अब दिल्ली पुलिस का आसरा
उत्तराखंड पुलिस को अभी तक पीड़ित युवती नहीं मिली है। युवती को तलाशने के लिए एक टीम ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। गुरुवार को पुलिस टीम की अगुवाई कर रहीं एएसपी ममता वोहरा ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से मदद मांगी है।

पीड़ित युवती आखिर गई कहां, इस गुत्थी को सुलझाने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। उसकी तलाश में दिल्ली में डटी पुलिस टीम का कहना है कि आगे की कार्रवाई के लिए युवती के बयान (161 के बयान) की जरूरत है।

उधर, अपर सचिव की गिरफ्तारी न होने से अब पुलिस पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। जबकि इस मामले में युवती के मजिस्ट्रेटी बयान हो चुके हैं। आईजी लॉ एंड ऑर्डर राम सिंह मीणा ने बताया कि आगे की कार्रवाई के लिए युवती के बयान जरूरी हैं।

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