अमर उजाला एक्सक्लूसिव: गंगा और सहायक नदियां 52 योजनाओं से होंगी निर्मल
- सात साल में 50 फीसदी बजट ही खर्च कर पाई है उत्तराखंड सरकार
- 31 जुलाई 2020 तक राज्य को 1514 करोड़ रुपये हो चुके हैं मंजूर
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उत्तराखंड में गंगा और उसकी सहायक नदियों को निर्मल और स्वच्छ बनाने को नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 52 योजनाएं जमीन पर उतारी जानी हैं। इन योजनाओं पर 1514 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्र सरकार ने यह धनराशि पिछले सात सालों के दौरान मंजूर की है लेकिन राज्य में बजट खर्च की रफ्तार बहुत तेज नहीं है। सात सालों में इन योजनाओं पर अभी तक करीब 50 फीसदी बजट ही खर्च हो पाया है।
यह तथ्य हाल ही में राज्यसभा के दौरान आतारांकित प्रश्न के उत्तर में उजागर हुआ है। जल शक्ति मंत्री रतन लाल कटारिया ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और नमामि गंगे में उत्तराखंड राज्य को गंगा और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए जो धनराशि दी, उसकी आधी ही अभी तक खर्च हो सकी है।
पिछले सात वर्षों के दौरान उत्तराखंड राज्य को गंगा स्वच्छता अभियान के नाम पर करीब 2315 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। जानकारों का मानना है कि सभी योजनाओं को यदि समयबद्ध ढंग से धरातल पर उतार दिया जाए तो गंगोत्री से लेकर हरिद्वार तक गंगा और उसकी सहायक नदियों के पानी गुणवत्ता में काफी सुधार आ जाएगा।
कोरोनाकाल में धीमी पड़ी रफ्तार
कोविड-19 महामारी का असर नमामि गंगे की योजनाओं पर भी पड़ा है। मार्च में लॉकडाउन के बाद अगस्त तक कार्य की रफ्तार धीमी रही। मानसून के बाद इसमें तेजी आने के आसार हैं।
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत परियोजनाएं
प्रोजेक्ट संख्या स्वीकृत लागत पूर्ण कुल खर्च
सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर 34 1151.18 26 524.11
घाट और शव दाह गृह 13 259.83 10 177.18
वनीकरण 04 84.34 03 77.19
घाटों की सफाई 01 15.90 0 2.07
नदी तल की सफाई 3.01 0 0.91 -
नोट: (धनराशि करोड़ में)
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन में जारी धनराशि
वर्ष धनराशि
2014-15 4.26
2015-16 37.04
2016-17 43.97
2017-18 242.49
2018-19 341.44
2019-20 128.20
2020-21 4.12
नोट: (धनराशि करोड़ में)