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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : होटल कारोबार से किनारा, नहीं ले रहे लोन का भी सहारा 

Thu, 10 Sep 2020 03:32 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal नरेंद्र देव सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी
नरेंद्र देव सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 10 Sep 2020 03:32 PM IST
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amar ujala exclusive : Avoiding hotel business, not even taking loan
रुपये - फोटो : pixabay

एक जमाना था जब होटल और रिजॉर्ट खोलना न सिर्फ शान समझा जाता था बल्कि इसे मुनाफे के लिए भी मुफीद माना जाता था। अब हाल यह है कि जिले में होटल, वेलनेस सेंटर और रिजॉर्ट के कारोबार में निवेश करने से लोग किनारा करने लगे हैं। इस वित्तीय वर्ष में अब तक होटल, रिजॉर्ट के लिए जिला उद्योग केंद्र में एक भी आवेदन नहीं आया है। 

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इस कारोबार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से सूक्ष्म लघु एवं मध्यम नीति 2015 के अंतर्गत होटल रिजॉर्ट उद्यमियों को पूंजी निवेश उपादान एवं ब्याज उपादान प्रोत्साहन और सहायता दी जाती है। भारत सरकार की ओर से घोषित औद्योगिक विकास योजना 2017 के अंतर्गत पूंजी निवेश उपादान एवं बीमा प्रीमियम में छूट देने का भी प्रावधान है। इसके बावजूद अब लोग इस क्षेत्र में निवेश करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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सब्सिडी से भी घाटे में ही रहेंगे

मुक्तेश्वर, रामगढ़, रामनगर में रिजॉर्ट और वेलनेस सेंटर खोलने के लिए लोगों ने काफी निवेश किया। 2017 से पहले तक इसमें 60 से 70 करोड़ तक का निवेश प्रतिवर्ष हुआ था, लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष में यह घटकर 35 करोड़ तक आ गया। जिले में 100 होटल, रिजॉर्ट ही संचालित हैं जबकि 2000 बंद पड़े हैं। होटल व्यवसायी कमल जगाती के अनुसार सरकार सब्सिडी वाली योजना देती है तब भी लोग घाटे में रहेंगे। 
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इस वित्तीय वर्ष में अभी तक होटल, रिजॉर्ट निर्माण को लेकर आवेदन नहीं आए हैं। पिछले वर्षों तक इसमें काफी निवेश होता था। - विपिन कुमार, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, हल्द्वानी


जिला प्राधिकरण के नियम भी आड़े आ रहे

होटल व्यवसायियों के अनुसार जिला विकास प्राधिकरण के नए नियमों के चलते होटल, रिजॉर्ट का निर्माण काफी मुश्किल हो गया है। प्राधिकरण के नियमों में व्यावसायिक भवनों को बनाने पर पार्किंग के लिए काफी जगह छोड़नी पड़ती है। जमीन के दाम इतने बढ़ गए हैं कि पार्किंग के लिए भूमि छोड़ पाना सबके बस की बात नहीं होती। इसके अलावा टाउनशिप प्लानिंग सहित करीब सात विभागों से एनओसी लेनी पड़ती है। इस कारण व्यावसायिक भवनों का निर्माण मुश्किल हो रहा है।

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