देखिए, लहसुन की खीर से कैसे फेमस हुई यह गृहणी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घर की मास्टर सेफ का हुनर बाहर आया तो अच्छे से अच्छे सेफ भी हैरत में पड़ गए। जी हां, देहरादून की मनू अग्रवाल की रेसिपी ने एक कार्यक्रम में उन्हें फेमस कर दिया।
मौका था हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड, सहेली और अमर उजाला रूपांतरण महिलाओं के लिए आयोजित खुशियों के पल कार्यक्रम का। यहां महिलाओं ने एक से बढ़कर एक रेसिपी बनाकर जजेज का दिल जीत लिया। लहसुन की खीर ने मनू अग्रवाल को कुकिंग कांटेस्ट का विजेता बनाया।
वहीं गढ़वाली व्यंजन पत्यूड़ बनाने वाली मीनाक्षी व्यास को दूसरा और मुगलाई पराठे बनाने वाली कविता जिंदल थर्ड आईं। महिलाओं की पुरानी रेसिपी को नए अंदाज में पेश करने का अंदाज जजेज के साथ सबको भाया।
शनिवार को कुकरेजा इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एडीएम झरना कमठान, मैक्स हास्पिटल की गायनोलॉजिस्ट डॉ. लूना, डायटीशियन भावना और कुकरेजा इंस्टीट्यूट से हिमांशु कुकरेजा, विभागीय अध्यक्ष (एचओडी) बीएस नेगी, पैसिफिक होटल के सैफ कमल ने दीप प्रज्वलित करके किया।
खूब हुए मनोरंजक कार्यक्रम
महिलाओं को कई विषय पर जागरूक करने के साथ कई मनोरंजन के कार्यक्रम भी हुए। एक ओर कुकिंग कांटेस्ट के प्रतिभागी प्रतियोगिता की तैयारियों में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर अन्य महिलाओं ने रैंप वाक, डांस और सिंगिंग में धमाल मचाया। बीच-बीच में कई मनोरंजन के लिए प्रतियोगिताएं हुई, जिनके विजेताओं को आकर्षक उपहार दिए गए।
दून आइडिल में फस्ट रनअरप रही आस्था वत्स ने गीतों से समा बांधा। वहीं नन्हें डांस मास्टर आर्यन ने भी खूब तालियां बटोरी। कुकरेजा इंस्टीट्यूट में विभागीय अध्यक्ष ( एचओडी) बीएस नेगी और पैसिफिक होटल के सैफ कमल जज की भूमिका में रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में कुकरेजा इंस्टीट्यूट एवं यहां के छात्रों का विशेष सहयोग रहा।
अमर उजाला का धन्यवाद। घर पर रोज खाना बनाते हैं लेकिन अमर उजाला ने महिलाओं को घरों से बाहर निकलकर कुछ करने का यह मौका दिया। मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मेरी लहसुन की खीर को इतना पसंद किया गया।
- मनू अग्रवाल
पहली बार इस तरह के कांटेस्ट में हिस्सा लिया। उम्मीद नहीं थी। अमर उजाला का आभार व्यक्त करती हूं और निर्णायकों का भी। जिन्होंने पारंपरिक पकवान को महत्व दिया।
- मीनाक्षी व्यास
आलू, प्याज, गोभी के परांठे तो सबने खाए हैं, लेकिन मैंने ये मुगलई पराठा पेश किया। थैंक्स टू अमर उजाला की, जिसने हमें ऐसा मंच दिया जहां हम नए-नए प्रयोग भी कर रहे हैं।
- कविता जिंदल