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अमर उजाला अपनत्व अभियान : कोरोना ने छीना पिता का साया, कैसे चलेगी जिंदगी
Thu, 10 Jun 2021 04:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 10 Jun 2021 04:05 PM IST
सार
39 वर्षीय वाहन चालक यहां एक स्कूल की बस चलाता था। नौ मई को उसे अचानक सिरदर्द और बुखार की शिकायत हुई। परिजन उसे कोटद्वार अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोटद्वार भाबर के त्रिलोकपुर वार्ड के एक गांव के निवासी दो बच्चों से कोरोना महामारी ने उनके पिता का साया छीन लिया। एक मात्र कमाऊ सदस्य की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किराए के मकान में रह रहे परिवार को अब बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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परिजनों ने बताया कि 39 वर्षीय वाहन चालक यहां एक स्कूल की बस चलाता था। नौ मई को उसे अचानक सिरदर्द और बुखार की शिकायत हुई। परिजन उसे कोटद्वार अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। उसका एक बेटा 14 साल तो दूसरा 12 साल का है। पति की मौत के बाद 33 वर्षीय पत्नी को यह समझ नहीं आ रहा है कि वह दोनों बच्चों का लालन पालन और पढ़ाई कैसे करवाएगी। उसे बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
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कोरोना से पिता की मौत, मजदूरी कर बच्चों को पाल रही मां
रुद्रपुर में रामनगर के ग्राम बैलपड़ाव निवासी एक व्यक्ति की दिल्ली में कोरोना संक्रमण से मौत के बाद परिवार के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है। तीनों बच्चों के भरण-पोषण और पढ़ाई के लिए पत्नी को मजदूरी करनी पड़ रही है। मृतक की पत्नी ने बताया कि बड़ी बेटी एमएससी कर रही है, जबकि दूसरी बेटी बीएससी और छोटा बेटा 11वीं में पढ़ता है। आर्थिक स्थिति खराब होने पर मजदूरी का ही सहारा लेना पड़ा। उन्होंने सरकार से परिवार में भरण पोषण के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
पिता की मौत के बाद इलाज का पांच लाख का कर्ज सिर पर
खटीमा में खेतलसंडा खाम निवासी दो बच्चों के पिता की बीती सात मई को कोरोना के चलते मौत हो गई थी। घर में मृतक की पत्नी के अलावा 14 साल की बेटी और 10 साल का बेटा है। परिवार के मुखिया की मौत के बाद से मां और बच्चों के समक्ष आर्थिक तंगी पैदा हो गई है। परिवार पर पिता की मौत के बाद अस्पताल में हुए पांच लाख रुपये के खर्च की अदायगी भी नहीं हो पा रही है। परिजनों ने सरकार से आर्थिक सहायता देने की गुहार लगाई है।
कोविड से मौत के बाद आजीविका का संकट
हल्द्वानी में भवाली के पास कैंची निवासी चार बहनों के पिता की कोविड से हुई मौत के बाद परिवार पर भरण पोषण का संकट आ पड़ा है। पिता प्राइवेट जॉब करते थे। कोविड संक्रमण होने पर तबियत ज्यादा खराब होने पर पिछले साल नवंबर शुरुआत में उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था। 10 नवंबर को उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि तीन बहनों की शादी हो चुकी है लेकिन छोटी बेटी अभी अविवाहित है। अब छोटी बहन और मां के सामने बआर्थिक संकट खड़ा हो गया है।