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Dehradun News: होर्डिंग टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी से 300 करोड़ के घोटाले का आरोप
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II- कांग्रेस नेता अभिनव थापर ने पत्रकार वार्ता में नगर निगम प्रबंधन पर उठाए सवाल
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I- 10 वर्ष में चहेती कंपनी को टेंडर देने में हाईकोर्ट के आदेशों को गलत तरह से बताया
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I- थापर बोले, नगर निगम को हुआ कम से कम 50 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान
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नगर निगम पर अब होर्डिंग कंपनी को टेंडर देने में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। कांग्रेस नेता अभिनव थापर ने कहा है कि 10 वर्ष के भीतर तीन चहेती कंपनी को टेंडर दिए गए। इनसे करीब 300 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। साथ ही नगर निगम को करीब 50 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। आरोप लगाया कि इन कंपनियों को काम देने के लिए नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेशों को भी गलत तरह से पेश किया। थापर ने नगर निगम से इस मामले में जांच कराने की मांग की है। जांच न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में अपील करने की बात भी कही है।
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Iथापर ने रविवार को कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता बुलाई थी। उन्होंने कहा कि नगर निगम को करोड़ों रुपये की हानि हुई है। निगम ने योग्य कंपनियों को काम देने से रोका है। टेंडर की शर्तों में न सिर्फ पार्टी के चयन का खेल हुआ बल्कि एक्सटेंशन के नाम पर करोड़ों रुपये के कार्य का अपने चहेतों को बिना टेंडर के ही आवंटित कर दिया। तकनीकी रूप से 2013 से 2023 तक पांच से सात टेंडर होने थे। लेकिन, इस दरम्यान केवल तीन ही टेंडर हुए।
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Iकहा कि इन सभी टेंडरों में सारा काम केवल तीन कंपनियों को ही मिला। निगम ने होर्डिंग्स के जो टेंडर निकाले उनमें उत्तराखंड की अधिप्राप्ति प्राप्ति नियमावली 2008 का भारी उल्लंघन हुआ है। नियमावली में स्पष्ट लिखा है कि किसी भी टेंडर कार्य को दो प्रतिशत से ज्यादा ईएमडी नहीं ली जाएगी। लेकिन, निगम ने इसे 10 फीसदी कर दिया। थापर ने इस घपले में थर्ड पार्टी ऑडिट कराने और जांच करने की मांग की है।
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Iथापर ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में मेयर सुनील उनियाल गामा से गत 11 अगस्त को मुलाकात की थी। उसके बाद 12 सितंबर को नगर आयुक्त को भी पत्र लिखा। अब शासन ने आठ नवंबर को नगर निगम से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। लेकिन, निगम की अंतिम बोर्ड बैठक 28 नवंबर को होनी है और इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। थापर ने निगम पर इन कंपनियों के साथ साठ-गांठ का आरोप लगाया। थापर ने निगम से इन कंपनियों से राजस्व हानि को ब्याज सहित वसूलने की मांग की है।
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Iएक ही कंपनी को बार-बार छूट और दोबारा दिया ऑर्डर
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Iथापर ने आगे कहा कि निगम ने 2022 में एक टेंडर निकाला। जिसमें, एक कंपनी को बार-बार लापरवाही के बावजूद बोलीदाता घोषित किया गया। टेंडर की शर्तों के अनुसार, तीन दिन के अंदर उनको जमानत राशि जमा करानी थी। इसके साथ ही एग्रीमेंट के लिए दो फीसदी की स्टांप ड्यूटी भी देनी होती है। लेकिन, नोटिस देने के बाद भी कंपनी ने यह काम नहीं किया। कई नोटिस दिए गए लेकिन कंपनी का रवैया नहीं सुधरा। इसके बाद अंतिम नोटिस दिया और तीन दिन में कार्रवाई न होने पर ऑर्डर कैंसल करने की बात कही। फिर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाना था। बावजूद इसके कुछ महीने बाद नौ सितंबर 2022 को उसकी कंपनी को दोबारा ऑर्डर दे दिया गया और 30 मार्च 2023 को सफल बोलीदाता घोषित कर दिया गया।
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Iहाईकोर्ट के आदेश को गलत तरह से पेश किया
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Iइन टेंडर में हाईकोर्ट नैनीताल के वर्ष 2017 के ऑर्डर को भी गलत तरह से पेश किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश किया की इस टेंडर में जो भी कार्यवाही की जाएगी वो हाईकोर्ट के संज्ञान में लेकर अनुमति के बाद ही की जाएगी। लेकिन, निगम ने इसका उल्टा इस आदेश को ही घुमा दिया। अपने हर आदेश में यह लिखा है कि हाईकोर्ट ने आगे यह कार्रवाई से मना कर दिया है। ऐसे में अपनी चहेती कंपनियों को ही काम देते गए। थापर ने कहा कि इस तरह निगम ने कोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना की।
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I‘अवैध होर्डिंग के मामले में नहीं की कोई कार्रवाई’
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I2019 में नगर निगम ने एक सर्वे समिति बनाई। समिति ने 325 अवैध होर्डिंग की रिपोर्ट दी लेकिन आजतक यह नहीं बताया कि अवैध होर्डिंग कौन बेच रहा है। जो कंपनियां यह काम कर रही हैं उन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई इस बात की जानकारी भी निगम ने नहीं दी। थापर ने 27 मार्च 2015 को भाजपा के 10 पार्षदों एक पत्र को भी दिखाया। इससे नगर निगम को आर्थिक हानि होने की संभावनाएं जताई गई थीं। सब शिकायतों को नजरंदाज करते हुए निगम ने उन्हीं कंपनियों को काम दिया जिसके खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायत थी।
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II- कांग्रेस नेता अभिनव थापर ने पत्रकार वार्ता में नगर निगम प्रबंधन पर उठाए सवाल
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I- 10 वर्ष में चहेती कंपनी को टेंडर देने में हाईकोर्ट के आदेशों को गलत तरह से बताया
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I- थापर बोले, नगर निगम को हुआ कम से कम 50 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान
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नगर निगम पर अब होर्डिंग कंपनी को टेंडर देने में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। कांग्रेस नेता अभिनव थापर ने कहा है कि 10 वर्ष के भीतर तीन चहेती कंपनी को टेंडर दिए गए। इनसे करीब 300 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। साथ ही नगर निगम को करीब 50 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। आरोप लगाया कि इन कंपनियों को काम देने के लिए नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेशों को भी गलत तरह से पेश किया। थापर ने नगर निगम से इस मामले में जांच कराने की मांग की है। जांच न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में अपील करने की बात भी कही है।
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Iथापर ने रविवार को कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता बुलाई थी। उन्होंने कहा कि नगर निगम को करोड़ों रुपये की हानि हुई है। निगम ने योग्य कंपनियों को काम देने से रोका है। टेंडर की शर्तों में न सिर्फ पार्टी के चयन का खेल हुआ बल्कि एक्सटेंशन के नाम पर करोड़ों रुपये के कार्य का अपने चहेतों को बिना टेंडर के ही आवंटित कर दिया। तकनीकी रूप से 2013 से 2023 तक पांच से सात टेंडर होने थे। लेकिन, इस दरम्यान केवल तीन ही टेंडर हुए।
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Iकहा कि इन सभी टेंडरों में सारा काम केवल तीन कंपनियों को ही मिला। निगम ने होर्डिंग्स के जो टेंडर निकाले उनमें उत्तराखंड की अधिप्राप्ति प्राप्ति नियमावली 2008 का भारी उल्लंघन हुआ है। नियमावली में स्पष्ट लिखा है कि किसी भी टेंडर कार्य को दो प्रतिशत से ज्यादा ईएमडी नहीं ली जाएगी। लेकिन, निगम ने इसे 10 फीसदी कर दिया। थापर ने इस घपले में थर्ड पार्टी ऑडिट कराने और जांच करने की मांग की है।
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Iथापर ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में मेयर सुनील उनियाल गामा से गत 11 अगस्त को मुलाकात की थी। उसके बाद 12 सितंबर को नगर आयुक्त को भी पत्र लिखा। अब शासन ने आठ नवंबर को नगर निगम से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। लेकिन, निगम की अंतिम बोर्ड बैठक 28 नवंबर को होनी है और इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। थापर ने निगम पर इन कंपनियों के साथ साठ-गांठ का आरोप लगाया। थापर ने निगम से इन कंपनियों से राजस्व हानि को ब्याज सहित वसूलने की मांग की है।
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Iएक ही कंपनी को बार-बार छूट और दोबारा दिया ऑर्डर
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Iथापर ने आगे कहा कि निगम ने 2022 में एक टेंडर निकाला। जिसमें, एक कंपनी को बार-बार लापरवाही के बावजूद बोलीदाता घोषित किया गया। टेंडर की शर्तों के अनुसार, तीन दिन के अंदर उनको जमानत राशि जमा करानी थी। इसके साथ ही एग्रीमेंट के लिए दो फीसदी की स्टांप ड्यूटी भी देनी होती है। लेकिन, नोटिस देने के बाद भी कंपनी ने यह काम नहीं किया। कई नोटिस दिए गए लेकिन कंपनी का रवैया नहीं सुधरा। इसके बाद अंतिम नोटिस दिया और तीन दिन में कार्रवाई न होने पर ऑर्डर कैंसल करने की बात कही। फिर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाना था। बावजूद इसके कुछ महीने बाद नौ सितंबर 2022 को उसकी कंपनी को दोबारा ऑर्डर दे दिया गया और 30 मार्च 2023 को सफल बोलीदाता घोषित कर दिया गया।
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Iहाईकोर्ट के आदेश को गलत तरह से पेश किया
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Iइन टेंडर में हाईकोर्ट नैनीताल के वर्ष 2017 के ऑर्डर को भी गलत तरह से पेश किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश किया की इस टेंडर में जो भी कार्यवाही की जाएगी वो हाईकोर्ट के संज्ञान में लेकर अनुमति के बाद ही की जाएगी। लेकिन, निगम ने इसका उल्टा इस आदेश को ही घुमा दिया। अपने हर आदेश में यह लिखा है कि हाईकोर्ट ने आगे यह कार्रवाई से मना कर दिया है। ऐसे में अपनी चहेती कंपनियों को ही काम देते गए। थापर ने कहा कि इस तरह निगम ने कोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना की।
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I‘अवैध होर्डिंग के मामले में नहीं की कोई कार्रवाई’
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I2019 में नगर निगम ने एक सर्वे समिति बनाई। समिति ने 325 अवैध होर्डिंग की रिपोर्ट दी लेकिन आजतक यह नहीं बताया कि अवैध होर्डिंग कौन बेच रहा है। जो कंपनियां यह काम कर रही हैं उन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई इस बात की जानकारी भी निगम ने नहीं दी। थापर ने 27 मार्च 2015 को भाजपा के 10 पार्षदों एक पत्र को भी दिखाया। इससे नगर निगम को आर्थिक हानि होने की संभावनाएं जताई गई थीं। सब शिकायतों को नजरंदाज करते हुए निगम ने उन्हीं कंपनियों को काम दिया जिसके खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायत थी।
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