उत्तराखंडः राजनीति का अखाड़ा न बनें लोकतंत्र के मंदिर - ओम बिरला
- कहा, विरोध में भी गतिरोध न हो, यही विधायिका की मर्यादा और खूबसूरती है
- ठासीन अधिकारियों के 79वें सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में संसदीय मर्यादाओं पर दिया जोर
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोस, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद लोकतंत्र के मंदिर हैं और ये राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने चाहिए। सभा में वाद विवाद, असहमति और चर्चा होनी चाहिए, लेकिन व्यवधान नहीं होने चाहिए।
वे देहरादून के प्रेमनगर स्थित एक होटल में आयोजित विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों के 79वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। दीप जलाकर सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन पीठासीन अधिकारियों को देश में लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूती प्रदान करने की दृष्टि से अनुभवों और नए विचारों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
सभा में वाद-विवाद, असहमति और चर्चा होनी चाहिए परंतु व्यवधान नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र की गरिमा और परंपरा यही है कि विरोध करते समय भी गतिरोध न हो। लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए यह जरूरी है कि सदन तमाम असहमति और विरोध के बावजूद संचालित होता रहा। क्योंकि गतिरोध से लोकतंत्र की मूल भावना आहत होती है। इससे सदस्यों के अधिकारों का हनन होता है।
उन्होंने कहा कि 17वीं लोक सभा के पहले सत्र के दौरान व्यवधानों और गतिरोधों के कारण समय की जरा भी बर्बादी नहीं हुई। 37 बैठकों में 35 विधेयकों को पारित हुए, जिससे सभा की उत्पादकता में वृद्धि हुई। दूसरा सत्र भी इसी प्रकार उत्पादक रहा और दोनों सत्रों में नवनिर्वाचित सदस्यों को सभा में मामलों को उठाने के लिए अधिकाधिक अवसर प्रदान किए गए।
लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए यह आवश्यक है कि विधायिका की एक वर्ष में निर्धारित बैठकें हों। उन्होंने कहा कि हालांकि विधानमंडल संचालन प्रक्रिया के संबंध में स्वतंत्र हैं, फि र भी समय की मांग है कि इसमें एकरूपता हो। क्योंकि विधानमंडलों को लोगों की आकांक्षाओं और आस्था का मंदिर माना जाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हमारी संस्थाओं में लोगों के विश्वास को सुदृढ़ किया जाए और इसे और मजबूत बनाया जाए। लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए विधायिकाओं की एक वर्ष में निर्धारित बैठकें सुनिश्चित होनी चाहिए।
कई अवसरों पर विपक्ष अध्यक्ष पर दबाव बनाता है
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कई अवसरों पर विपक्ष अध्यक्ष पर दबाव बनाता है जिससे असहज स्थिति पैदा होती है। अध्यक्ष के लिए संयम, शालीनता, कड़ाई और अनुशासन के गुणों का सामंजस्य बनाना एक कठिन कार्य है। जितना अधिक हम सार्वजनिक मुद्दों पर शोध और विचार विमर्श में समय लगाएंगे, उतना ही अधिक सार्थक परिणाम मिलेगा। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वे सभा में होने वाली उद्देश्यपूर्ण चर्चा को कवर करें और रिपोर्ट करें, जिसका दूरगामी प्रभाव होगा। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी अभिभावक की भूमिका में होते हैं।
उन्होंने लोकसभा के कुशल संचालन के लिए ओम बिरला की सराहना की। कहा कि 17वीं लोक सभा के दौरान बजट सत्र में लोक सभा की कार्य उत्पादकता 135 प्रतिशत और शीतकालीन सत्र में 116 प्रतिशत थी। लोक सभा अध्यक्ष ने कुशलता से कार्यवाही का संचालन किया। उन्होंने कहा कि यदि विधानसभा संसद के प्रदर्शन का अनुकरण करती है, तो न्यू इंडिया का सपना जल्द ही पूरा होगा। उन्होंने सदन के कुशल संचालन में उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की भूमिका और कार्यकुशलता तारीफ की।
उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाएं सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्थाएं हैं। उनका जनादेश कार्यपालिका पर नजर रखना और लोगों की आवाज़ को मुखर करना है। इन्हीं निकायों के माध्यम से आम लोगों की आकांक्षाओं और इच्छाओं को अभिव्यक्ति मिलती हैए जिससे यह सिद्ध होता है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है। उन्होंने उत्तराखंड के भौगोलिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार रोशनी डाली।
राज्य विधानसभा के सदस्यों को उन लोगों के प्रति ईमानदार रहना चाहिए जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए और अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करना चाहिए। यही संसदीय लोकतंत्र की सफलता के मूल तत्व हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति कोई व्यवसाय नहीं है, बल्कि एक मिशन है और लोकतंत्र की सफ लता के लिए सक्रिय वार्तालाप और चर्चा बहुत महत्वपूर्ण है।
अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि विधायी कार्य के सुचारू और व्यवस्थित संचालन के लिए पीठासीन अधिकारियों के साथ विपक्ष का सयि योगदान आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस सम्मेलन से विधानमंडलों के बीच सहयोग और वार्ता के नए मार्ग खुलेंगे। विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने उपस्थित अतिथियों का धन्यवाद किया। समारोह में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद अजय भट्ट, माला राज्यलक्ष्मी शाह, तीरथ सिंह रावत समेत प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक और भाजपा के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
गर्मजोशी से स्वागत
लोकसभा अध्यक्ष का देहरादून पहुंचने पर भाजपा नेताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। सुबह पांच बजे रेल मार्ग से पहुंचे बिरला का स्वागत करने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट, मेयर सुनील उनियाल गामा, महानगर अध्यक्ष विनय गोयल समेत विधायक व अन्य नेता हर्रावाला रेलवे स्टेशन पहुंचे। कार्यक्रम स्थल पर लोकसभा अध्यक्ष को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। फिर बिरला ने उत्तराखंड के विभिन्न संगठनों और कैदियों द्वारा बनाई गई वस्तुओं और कलाकृतियों को दर्शाती एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
2021 में सभी विधानमंडलों को विशेष सत्र करने का आह्वान
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2021 में पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के 100 वर्ष पूरे हो जाएंगे और इस विशेष अवसर पर देश भर की विधानसभाओं में एक विशेष सत्र बुलाया जाए जिसमें लोकतंत्र की मजबूती और सदस्यों के क्षमता विकास पर चर्चा हो। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के हरसंभव प्रयास हों कि विधायिका के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही को पूरी तरह सुनिश्चित हो।