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ऑल इंडिया मेयर कांफ्रेंस में जुटे देशभर के मेयर
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 26 Aug 2014 10:44 AM IST
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नगर निगमों की समस्याओं और कामयाबी पर चर्चा के मकसद से 46वीं आल इंडिया मेयर कांफ्रेंस में देशभर के मेयर जुटे।
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देहरादून में आयोजित कांफ्रेंस में सभी मेयरों ने संविधान के 74वें संशोधन को सभी राज्यों के निकायों में जल्द लागू करने की मांग पुरजोर ढंग से उठाई। निकायों को स्वायत्तता के साथ और मजबूती प्रदान करने की भी वकालत की गई।
व्यावहारिक दिक्कतों पर भी हुई चर्चा
इस दौरान विभिन्न निगमों में लागू योजनाओं और इनके क्रियान्वयन में पेश आई व्यावहारिक दिक्कतों पर भी मेयरों ने चर्चा की।
सोमवार को पटेलनगर स्थित एक होटल में कांफ्रेंस का उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत, शहरी विकास मंत्री प्रीतम पंवार, भारतीय महापौर परिषद के संगठन महामंत्री उमाशंकर गुप्ता, दून के मेयर विनोद चमोली ने किया।
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परिषद के संगठन महामंत्री और मध्य प्रदेश के शिक्षा एवं तकनीकी मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि नगर निगम के पार्षद और मेयर जनता के चुने गए प्रतिनिधि होते हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त अधिकार हासिल नहीं हैं। कहा कि उत्तराखंड और यूपी में मेयर, पार्षदों के वित्तीय अधिकार बेहद सीमित हैं।
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गुप्ता ने कहा कि स्थिति यह रहती है कि पार्षद किसी की मदद करने थाने जाए तो थानेदार उन्हें झिड़क देते हैं। जबकि पड़ोसी देश नेपाल में निकायों, पंचायतों को विधिक अधिकार दिए गए हैं। गुप्ता ने कहा कि मेयर के वोटरों की संख्या कई विधायकों के बराबर होती है, लेकिन उनके प्रोटोकॉल का कोई ख्याल नहीं रखा जाता।
बताया कि एमपी में मेयर का प्रोटोकॉल विधायकों से ऊपर है। मेयर विनोद चमोली ने कहा कि सरकारें यह मानकर चलती हैं कि निकाय दोयम दर्जे के हैं। यही वजह है कि मेयर को अधिकार नहीं दिए जाते।
उन्होंने कहा कि यदि वह विधायक का चुनाव लड़ें तो उन्हें मेयर के मुकाबले कम क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मिलेगा, वोट भी मेयर के मुकाबले कम पाने होंगे। लेकिन, तब उन्हें मेयर से कहीं अधिक अधिकार मिल जाएंगे।
कहा कि यह व्यवस्था सरकार की दोहरी सोच दर्शाती है। अगर इसमें बदलाव नहीं किया गया तो शहरों के विकास की अवधारणा साकार नहीं हो सकेगी।
अधिवेशन में अखिल भारतीय महापौर परिषद के अध्यक्ष और नागपुर के मेयर अनिल शोले, दून की पूर्व मेयर मनोरमा शर्मा डोबरियाल, संसदीय कार्य सचिव राजकुमार, विधायक उमेश शर्मा, पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष अशोक वर्मा, शहरी विकास सचिव जीएस गर्ब्याल, मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत, एएमएनए हर्षर्द्धन मिश्रा, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरके सिंह और सभी पार्षद मौजूद रहे। हरिद्वार के मेयर मनोज गर्ग ने कार्यक्रम का संचालन किया।
‘अपने पैरों पर खड़े हों निकाय’
कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मेयरों की अधिकार देने की मांग का समर्थन किया। कहा कि देश की करीब 38 प्रतिशत आबादी का नेतृत्व स्थानीय निकाय सरकार कर रही है। ऐसे में उन्हें अधिकार देने ही होंगे।
इस दौरान मुख्यमंत्री रावत ने देशभर में निकायों की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों पर भी चिंता जताई। कहा कि निकायों को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। देहरादून का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां निकाय के पास बेशकीमती जमीनें हैं, लेकिन कचरा निस्तारण प्लांट के लिए ही जमीन नहीं मिल पा रही।
इससे शहर की बड़ी समस्या से निजात का रास्ता अटक गया है। सीएम ने निकायों को अपने पैरों पर खड़ा होने के विकल्प तलाशने की नसीहत भी दी।
‘प्रदेश में संशोधन के 13 बिंदु लागू’
उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री प्रीतम पंवार ने कांफ्रेंस में जानकारी दी कि प्रदेश सरकार निकायों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बताया कि प्रदेश में 74वें संविधान संशोधन के 18 में से 13 बिंदु लागू किए जा चुके हैं। कुछ बिंदुओं में अभी ढांचा तैयार किया जाना है। जल्द ही इन्हें भी लागू किया जाएगा।
प्रमुख मांगें
- निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं
- निकायों और पंचायतों के पास हों विधिक अधिकार भी
- प्रदेश सरकारें मेयरों के प्रोटोकॉल पर करें गंभीर विचार
- निकायों से सरकारों का दोयम दर्जे का बर्ताव बंद करें
- दिल्ली, चंडीगढ़ में मेयर का एकवर्षीय कार्यकाल बढ़ाया जाए
नहीं पहुंचे नायडू
तय कार्यक्रम के अनुसार मेयर कांफ्रेंस में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू को भी शिरकत करनी थी। लेकिन सोमवार को आयोजकों ने बताया कि दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक के चलते वह दून नहीं पहुंच सके। बताया गया कि केंद्रीय मंत्री ने जल्द ही दिल्ली में सभी मेयरों से मुलाकात और उनकी समस्याओं पर चर्चा करने का आश्वासन दिया है।
चमोली चुने गए राष्ट्रीय अध्यक्ष
कांफ्रेंस में दून के मेयर विनोद चमोली को राष्ट्रीय महापौर परिषद का अध्यक्ष चुन लिया गया। कांफ्रेंस में शामिल मेयरों और पार्षदों ने चमोली को बधाई दी।
चमोली ने कहा कि अब उन पर दोहरी जिम्मेदारी है। परिषद की नई जिम्मेदारी के तहत उन्होंने देश के सभी निकायों में 74वां संविधान संशोधन लागू कराने की लड़ाई लड़ने की बात कही।