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अच्युतानंद, वासुदेवानंद और नरेंद्रानंद की कुंभ में नो एंट्रीः अखाड़ा परिषद

Mon, 29 May 2017 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला,हरिद्वार Updated Mon, 29 May 2017 09:20 AM IST
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All India Akhara Parishad upset with Achyutanand, Vasudevanand and Narendranand
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ, वासुदेवानंद सरस्वती और नरेंद्रानंद सरस्वती को शंकराचार्य मानने से साफ इनकार कर दिया। परिषद ने तीनों संतों को सलाह दी है कि वे शंकराचार्य पदनाम का दुरुपयोग करना तत्काल बंद करें। शंकराचार्य के रूप में तीनों को ही आने वाले प्रयाग अर्द्धकुंभ और हरिद्वार कुंभ में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

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बड़ा अखाड़ा उदासीन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। संत जगत की वे सबसे बड़ी हस्ती हैं। शंकराचार्य पद की केवल चार पीठ हैं, जिन पर तीन शंकराचार्य आसीन हैं। द्वारिका और ज्योर्तिपीठ का प्रभार स्वरूपानंद सरस्वती के पास है।
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जगन्नाथ पुरी में मिश्रानंद सरस्वती और श्रृंगेरी पीठ पर स्वामी भारती तीर्थ आसीन हैं। इनके पद पर रहते अन्य कोई भी इन पीठों पर अपना दावा प्रस्तुत करता है तो ऐसा लगता है, मानो कोई जनपद के गली मोहल्ले में जाकर स्वयं को मुख्यमंत्री बताने लगे। 

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इन तीनों संतों के कृत्य पर समूचा हिंदू समाज आश्चर्यचकित

All India Akhara Parishad upset with Achyutanand, Vasudevanand and Narendranand
स्वामी अच्युतानंद तीर्थ, वासुदेवानंद सरस्वती और नरेंद्रानंद सरस्वती

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि इन तीनों संतों के कृत्य पर समूचा हिंदू समाज आश्चर्यचकित है और संत जगत इन्हें किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं करता। ये तीनों अपने आश्रमों में बैठकें कर महिमा मंडित हो रहे हैं। देश की धर्म प्राण जनता आदि जगद्गुरु द्वारा स्थापित चार पीठों से खिलवाड़ करने वालों को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

इलाहाबाद अर्द्धकुंभ में एक संत के रूप में स्थान मांगेंगे तो स्थान मिलेगा, शंकराचार्य के रूप में केवल तीन शंकराचार्यों के ही कैंप लग पाएंगे। उन्होंने कहा कि भगवा पहनकर सनातन धर्म को बदनाम करना शोभा नहीं देता। इन तीनों साधुओं ने परंपरा का नहीं बल्कि साधुत्व का भी भारी नुकसान किया है।       

श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि अखाड़ा परिषद पहले ही इन्हें अमान्य कर चुकी है और संत जगत से तीनों का कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश भर में जागरण अभियान चलाने के लिए वे आज हरिद्वार पहुंचे हैं। सभी तीर्थों पर जाकर इन कथित साधुओं के खिलाफ अलख जगाई जाएगी। आग्रह किया जाएगा कि कोई भी आश्रम इन छद्म पदनामधारी साधुओं को आमंत्रित न करे।   

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