उल्लूओं को लेकर जारी हुआ हाईअलर्ट, पढ़ें दिवाली पर क्यों उल्लू की जान के दुश्मन बन जाते हैं लोग?
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संरक्षित श्रेणी में आने वाले उल्लू की जान दीपावली के दौरान सांसत में रहती है। तंत्र पूजा के कारण भी दिवाली के दौरान उल्लू के शिकारियों के सक्रिय होने की आशंका है। इसे रोकने के लिए वन विभाग ने हाईअलर्ट जारी कर दिया है।
उल्लू को भले ही अशुभ माना जाता हो, लेकिन यह संपन्नता का भी प्रतीक है। यही धार्मिक मान्यता ही इसकी दुश्मन बन गई है। इसी कारण दीपावली पर उल्लू की तस्करी बढ़ जाती है। विभिन्न क्षेत्रों में दीपावली की पूर्व संध्या पर उल्लू की बलि देने की आशंका रहती है।
इसी आशंका के मद्देनजर वन विभाग की ओर से अलर्ट जारी किया गया है। सभी वन प्रभागों, नेशनल पार्क, सेंचुरी, कंजर्वेशन रिजर्व प्रशासन को गाइडलाइन जारी की गई है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा के अनुसार सभी जंगलों के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में खास निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान उन स्थानों पर भी खास निगाह रखी जाएगी, जहां पक्षियों का व्यापार संभव है।
शिकारियों पर रहेगी पैनी नजर
शीत ऋतु में अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात होने पर जंगली जानवर निचले क्षेत्रों, घाटियों में आ जाते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में शिकारियों-तस्करों की सक्रियता की आशंका अधिक रहती है। इसे देखते हुए विभाग की ओर पूरे शीतकाल के लिए भी अलग से अलर्ट जारी किया है।
कॉर्बेट प्रशासन ने सर्पदुली, बिजरानी, झिरना, ढेला आदि रेंजों में विशेष सतर्कता के निर्देश दिए हैं। संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए पियर टू पियर कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। ताकि शिकारियों को आसानी से पकड़ा जाए।