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एक साल बाद भी अखाड़ा परिषद् के प्रवक्ता महंत मोहनदास का नहीं लगा कोई सुराग, पुलिस ने किए हाथ खड़े

Sun, 16 Sep 2018 09:16 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 16 Sep 2018 09:16 PM IST
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Akhara parishad spokesman mahant mohan das No clue after one year of missing
महंत मोहनदास

हरिद्वार से मुंबई जाते वक्त संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए बड़ा अखाड़ा उदासीन के कोठारी महंत मोहनदास का एक साल बाद भी कुछ पता नहीं चला है। उत्तराखंड पुलिस के साथ इसमें उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी कई स्तरों पर जांच की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। सूत्रों के मुताबिक पुलिस इस प्रकरण में फाइनल रिपोर्ट लगाने पर विचार कर रही है। 

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बड़ा अखाड़ा के कोठारी महंत व अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत मोहनदास पिछले साल 15 सितंबर को हरिद्वार से मुंबई के लिए लोकमान्य तिलक एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सवार हुए थे। इसके बाद भोपाल (मध्यप्रदेश) स्टेशन पर उनका एक शिष्य उन्हें खाना देने के लिए आया तो मोहनदास अपनी सीट पर नहीं थे।
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पुलिस ने जांच शुरू की और पता चला कि मोहनदास को मेरठ स्टेशन पर देखा गया था। इस पर उत्तर प्रदेश पुलिस का सहयोग भी लिया गया। दोनों राज्यों की पुलिस ने महंत मोहनदास को मेरठ, दिल्ली, भोपाल, गुजरात के सूरत और मुंबई आदि शहरों में तलाश किया। हालांकि, पुलिस की यह दौड़भाग बेकार साबित हुई। इसके बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर इस मामले की निगरानी की जाने लगी। मुख्यालय ने इसकी जांच एसपी सिटी हरिद्वार ममता वोहरा को सौंप थी। एसपी सिटी ममता वोहरा का कहना है कि अभी जांच जारी है। 
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सीबीआई जांच से किया इंकार 
महंत मोहनदास के गायब होने से कुछ दिन पहले ही अखाड़ा परिषद ने फर्जी संतों की सूची जारी की गई थी। चूंकि, महंत मोहनदास परिषद के प्रवक्ता थे, इसीलिए उनके गायब होने के पीछे आपराधिक साजिश की आशंका जताई जा रही थी। पिछले साल सरकार ने सीबीआई जांच के लिए भी कहा था, लेकिन संतों ने ही इससे इंकार कर दिया था। 

तो खुद गए मोहनदास 
अब तक की पुलिस की जांच में सामने आ रहा है कि मोहनदास अपनी मर्जी से गए हैं। बताया जा रहा है कि उनके पास बहुत से पैसे भी थे। ऐसे में वे कहां गए, इस बात का पता लगाना चुनौती बना हुआ है। माना यह भी जा रहा है कि मोहनदास विदेश चले गए हैं। लिहाजा पुलिस इसकी भी पड़ताल कर रही है। 


मामले में अभी जांच की जा रही है। अभी तक की जांच में सामने आ रहा है कि महंत अपनी मर्जी से ही गए हैं। लेकिन, यदि इसमें कोई षडयंत्र है तो इसकी भी जांच की जा रही है। फिलहाल तीन महीने से इस प्रकरण में कोई नया अपडेट नहीं आया है। 
-अशोक कुमार, एडीजी (कानून व्यवस्था)
 

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