संत बनने से पहले किए किसी भी अपराध के लिए नहीं होगी कोई कार्रवाई- अखाड़ा परिषद्
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद दीपावली के बाद फर्जी बाबाओं की दूसरी सूची जारी करने की तैयारियों में जुटी हुई है। कुछ अखाड़े उन साधुओं का इतिहास उनके मूल शहरों से खंगाल रहे हैं, जहां से आकर उन्होंने दीक्षा ली थी।
अलबत्ता अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का मानना है कि साधु बनने से पहले यदि कोई अपराधी था, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाएगी। संत बनने पर किए गए अपराधों के लिए दंडित किया जाएगा।
गौरतलब है कि अखाड़े अपने भीतर से फर्जी बाबाओं को तलाशने का काम शुरू कर चुके हैं। पहली सूची में उन साधुओं को छेड़ा गया था, जो अखाड़ा परंपरा से नहीं आते। इस बार कई अखाड़ों ने अपने चर्चित बाबाओं का रिकार्ड तलाशना शुरू कर दिया है।
उदाहरण के तौर पर एक अखाड़े से जुड़े हरिद्वार के ही एक बाबा के खिलाफ दिल्ली के एक थाने में 36 मुकदमे चल रहे हैं। एक बाबा के विरुद्ध उज्जैन में आयकर विभाग द्वारा मामला दर्ज किया गया था और कार्रवाई हुई है। इसी प्रकार विभिन्न शहरों में साधु बनने से पूर्व एक नहीं अनेक बाबाओं का आपराधिक इतिहास रहा है।
साधु बनने के बाद उनकी गतिविधियां स्पष्ट रूप से नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से सामने आई है। भगवा की आड़ में बहुत कुछ हो रह है, जिसे तब तक प्रमाणित नहीं किया जा सकता, जब तक की बाबाओं का आपराधिक रिकार्ड कुछ थानों से एकत्रित कर लिया जाए।
इसके लिए अखाड़ों द्वारा कुछ चर्चित बाबाओं का पूर्व इतिहास गूगल पर भी खंगाला गया है। जानकारी के मुताबिक एक बाबा की गतिविधियों का कच्चा चिट्ठा लेने के लिए अखाड़े के एक प्रतिनिधि को हरिद्वार से बाहर भेजा गया है। इसी प्रकार अन्य कुंभ नगरों और तीर्थों को साधुओं से भी कहा गया है कि वे अपने शहर के उन बाबाओं का ब्योरा इकट्ठा करें जो विवादास्पद माने गए हैं।
अलबत्ता अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी पूर्व इतिहास में जाने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि दीक्षा लेने से पहले कोई क्या था, इससे हमें मतलब नहीं। वास्तव में तो निशाने पर वे फर्जी बाबा हैं जो अपने आप ही खुद को संत बताने लगे हैं। साधु बनने से पहले पूर्व जीवन में व्यक्ति जो कुछ भी रहा हो, वह संन्यास दीक्षा लेने के बाद अर्थहीन हो जाता है।
माना तो यह भी गया है कि संन्यास से व्यक्ति का नया जीवन प्रारंभ हो जाता है। संत बनने के बाद यदि कोई भी आपराधिक मामले में फंसेगा तो तत्काल उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। दूसरी सूची जारी करने का काम इन दिनों चल रहा है। दीपावली के बाद तय किया जाएगा कि परिषद की बैठक कब और कहा हो। संत जगत को बदनाम करने वालों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा।