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'मोदी लहर' के बाद तीन साल में कहां पहुंचा किस पार्टी ग्राफ?
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 22 Feb 2017 10:17 AM IST
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- फोटो : ANI
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बहुमत हासिल करने तक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की चिंता तीन साल में उनके जनाधार के आंकलन को लेकर भी है। लोकसभा चुनाव की छाया ‘मोदी करिश्मा’ तीन साल में कितना घटा या बढ़ा है, इसको लेकर पार्टी में मंथन तेज हो गया है।
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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के पीएम चेहरे को 54.5 प्रतिशत वोट शेयर मिला। जबकि इस बीच चार सीटों के उपचुनाव में मोदी तिलिस्म टूटता नजर आया है। इसके अलावा उत्तराखंड में विस चुनाव से ठीक पहले विधायकों का दल बदल और स्टिंग आपरेशन के खेल से सियासी समीकरण बदले हैं।
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राजनीतिक विश्लेषक मतदान के प्रतिशत और बस्तों-बूथों से आए रुझानों के अनुसार कांग्रेस भाजपा में कांटे की टक्कर मान रहे हैं। वहीं, कुल मतदान प्रतिशत में इजाफा न होना दोनों दलों की दुविधा बढ़ाता दिख रहा है।
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भाजपा एक बार फिर इस फार्मूले को लेकर उतरी है कि कि पीएम वोट दिला देंगे, सीएम बाद में किसी को भी बना देंगे। उत्तराखंड में पार्टी को कितना मतदान प्रतिशत मिलेगा, इससे पार्टी 2019 के चुनावों की रणनीति भी तय करेगी। हालांकि वर्ष 2002 से अब तक हुए तीन विधानसभा चुनाव में अभी तक कोई भी दल वोट शेयर में 35 का आंकड़ा पार नहीं कर पाया है।
उधर, लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी को बढ़त दिलाने वाली विधानसभा सीटों के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो 70 सीटों में से 63 पर भाजपा आगे थी। लेकिन पिछले तीन साल में कई सियासी समीकरण भी बदले हैं। भाजपा में कांग्रेस के एक दर्जन विधायक आ चुके हैं, तो वहीं दो भाजपा विधायकों ने कांग्रेस का दामन थामा है। इससे दोनों दलों के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।
लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को जिन विधानसभा सीटों से बढ़त मिली थी, उन पर पार्टी उपचुनाव में हारी। धारचूला, सोमेश्वर, भगवानपुर और डोईवाला में भाजपा को झटका लगा, जबकि भगवानपुर को अन्य तीन सीटें भाजपा के सांसद बनने से खाली हुई थी। वहीं पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के साथ मंत्रियों और विधायकों के आने से कांग्रेस के खिलाफ एंटी इंकंबेंसी फैक्टर होने को लेकर अस्पष्ट स्थिति है। भाजपा ने इसी के चलते पूरे चुनाव को मोदी सरकार के ढाई साल बनाम हरीश रावत का मुकाबला बनाने की कोशिश की है।
कैसे पार होगा लोकसभा का रिकार्ड
भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 54.5 प्रतिशत मत हासिल किए थे, जिसमें पार्टी को ऊधमसिंह नगर और पौड़ी लोकसभा सीटों के अंतर्गत आने वाली 28 विधानसभाओं में बढ़त मिली थी। टिहरी क्षेत्र में केवल चकराता विधानसभा, हरिद्वार में ज्वालापुर, भगवानपुर, कलियर और मंगलौर सीट में भाजपा पिछड़ी, जबकि अल्मोड़ा में केवल जागेश्वर और धारचूला सीट से कांग्रेस को बढ़त मिली।
विधानसभा चुनावों में मतप्रतिशत
वर्ष 2002 - भाजपा 25.81, कांग्रेस 26.91
वर्ष 2007- भाजपा 31.6, कांग्रेस 29.9
वर्ष 2012 - भाजपा 33.13, कांग्रेस 34.03