पिता की अर्थी पहुंची इधर बेटे का हुआ जन्म
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शिक्षक सुभाष और उनका परिवार दो दिन पहले घर में आने वाले नए मेहमान के स्वागत की तैयारियों में जुटे थे। घर में हलचल और परिजनों में खुशियों के पंख हिलोरे ले रहे थे। शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।
बागेश्वर में हुए सड़क हादसे ने उनके पूरे परिवार की खुशियां छीन ली। मंगलवार को सुभाष चंद्र की अर्थी घर पहुंची तो दूसरी तरफ अस्पताल में उनके बेटे ने जन्म लिया। लेकिन घर में बच्चे की किलकारी की खुशियों की जगह मातम पसरा हुआ है।
सोमवार को बागेश्वर के पास टाटा सूमो दुर्घटना में सुभाष चंद्र की मौत हो गई थी। कोटद्वार के पदमपुर सुखरौ निवासी सुभाष चंद्र (34) वर्ष 2013 में शारीरिक शिक्षक पद पर नियुक्त हुए थे। नौकरी लगने के एक साल बाद ही उसकी शादी रेनू के साथ हुई थी।
डिलीवरी पर किया था घर आने का वादा
सुभाष कुछ दिन पहले ही छुट्टी से लौटे थे। तब उन्होंने परिजनों से पत्नी की डिलीवरी के समय घर आने की बात कही थी।
डॉक्टर ने रेनू को डिलीवरी की तारीख 20-21 अप्रैल की दी थी। 20 को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जबकि इसी दिन बागेश्वर में हुए सड़क हादसे में सुभाष की मौत हो गई।
मंगलवार को तीनों बडे़ भाई उसका शव कोटद्वार लाए तो घर में कोहराम मच गया। 66 वर्षीय बूढ़ी मां पंचमा देवी बेटे का शव देखकर बिलख पड़ी।
पत्नी को नहीं खबर
यही हाल उसके बडे़ भाई प्रेम सिंह, प्रदीप, दीपू और अन्य परिजनों का है। प्रदीप ने बताया कि मंगलवार दोपहर पत्नी रेनू ने बेटे को जन्म दिया। उन्हें इस हादसे की खबर अभी नहीं दी गई है।