खुलासा: पहले नारी निकेतन परिसर में ही दबाया गया था भ्रूण
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एक झूठ को छिपाने के लिए नारी निकेतन का व्यवस्था तंत्र अपराध के दलदल में धंसता चला गया। मूक बधिर संवासिनी का गर्भपात कराने के बाद पहले उसके भ्रूण को नारी निकेतन के परिसर में दबाया गया, लेकिन जब मामला मीडिया में उछला तो भ्रूण को निकालकर दूधली के जंगल में दबा दिया। इस बार पहले के राजदारों को भ्रूण का स्थान बदलने की भनक नहीं लगने दी। लेकिन एसआईटी कड़ी से कड़ी जोड़कर भ्रूण को खोज लाई।
नारी निकेतन के व्यवस्था तंत्र का झूठ पूरी तरह परदाफाश हो गया है। मूक बधिर संवासिनी का शारीरिक शोषण और गर्भपात छिपाने के लिए गैर कानूनी कार्रवाई अंजाम देने में उन्हें हिचक नहीं हुई। संवासिनी के गर्भवती होने के बाद नानी निकेतन तंत्र के हाथ-पैर फूल गए।
योजनाबद्ध तरीके से 15 नवंबर की शाम संवासिनी को दवा पिलाकर भ्रूण हत्या को अंजाम दिया गया। इसके बाद भ्रूण को नारी निकेतन परिसर में ही दबा दिया गया। जब संवासिनी की ब्लीडिंग नहीं थमी तो 16 नवंबर की सुबह उसे दून अस्पताल ले जाया गया।
गर्भपात के बाद संवासिनी के जीवन से किया खिलवाड़
अस्पताल में डॉक्टर ने भर्ती करने की बात कही तो नारी निकेतन तंत्र को अपने कृत्य की पोल खुलती नजर आई। यही वजह रही कि संवासिनी के जीवन से खिलवाड़ करते हुए उसे चुपचाप अस्पताल से लेकर भाग गए। मामला उछलने पर जांच के आदेश हुए तो पोल खुलने का डर सताने लगा। इसके बाद नारी निकेतन परिसर दबाये गए भ्रूण को निकालकर दूधली गांव के जंगल में दबा दिया गया।
सच छिपा रहे इस कारण इसके राजदार चंद लोग ही थे। 25 नवंबर की रात एसआईटी एक महिला कर्मचारी को भ्रूण बरामद करने के लिए नारी निकेतन ले गई।
परिसर में कई जगह ढूंढने केबाद भी भ्रूण नहीं मिला तो आशंका जताई गई कि उसे दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। अगले दिन किसी अन्य कर्मचारी के हलक से भ्रूण का सच बाहर आया, तब जाकर एसआईटी को दूधली के जंगल से भ्रूण मिल सका।
जानिए, किस अपराध में कितनी हो सकती है सजा
376 (2)डी - किसी कारागार, संप्रेक्षण गृह, नारी निकेतन में कस्टडी का प्रबंधन वर्ग या कर्मचारी द्वारा किसी महिला के साथ दुराचार किया जाना। इस मामले में आरोपी को कम से कम दस साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
34 आईपीसी/201-आईपीसी-जब कोई आपराधिक कृत्य कई व्यक्तियों के द्वारा सामान्य आशय से किया जाता है। उन्हें बराबर जुर्म का भागीदार माना जाएगा। अपराध के साक्ष्यों को छिपाना या फिर अपराधी को बचाने के लिए झूठी सूचना देना। इसमें तीन साल की सजा का प्रावधान है।
218 आईपीसी/ 120 बी-किसी व्यक्तिको दंड से बचाने के लिए लोक सेवक द्वारा पत्रावली में छेड़छाड़ करना और या साक्ष्य छिपाने का प्रयास करना। इस अपराध में तीन साल की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है।