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उत्तराखंड में निजी मेडिकल कॉलेजों का एडमिशन से इंकार

Thu, 27 Jul 2017 01:45 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 27 Jul 2017 01:45 PM IST
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admission stops in private medical university
Doctor

एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओर से आवंटित की गई एमबीबीएस सीटों पर निजी मेडिकल कॉलेजों ने दाखिला देने से इंकार कर दिया है।

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कॉलेजों का तर्क है कि वह विश्वविद्यालय हैं, लिहाजा शुल्क यह करने का अधिकार उनका है। शुल्क पर स्थिति साफ न होने की वजह से उन्होंने दाखिले रोक दिए हैं। इस साल पहली बार सरकारी के साथ ही निजी मेडिकल कालेजों की स्टेट कोटा और मैनेजमेंट कोटा की एमबीबीएस व बीडीएस सीटों के लिए सेंट्रलाइज काउंसिलिंग आयोजित की गई।
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एचएनबी मेडिकल विवि को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। विवि ने 24 जुलाई को पहले चरण का सीट आवंटन कर दिया। इस साल हिमालयन मेडिकल कॉलेज और एसजीआरआर मेडिकल कालेज में स्टेट कोटे की सीटों की संख्या भी 75-75 तय हो गई। आवंटित सीटों पर दाखिला लेने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है।
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एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज ने शुल्क की स्थिति साफ न होने की वजह से दाखिलों पर 29 जुलाई तक रोक लगा दी है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि वह एसजीआरआर यूनिवर्सिटी का हिस्सा हैं। यूनिवर्सिटी का शुल्क निर्धारित करने का अधिकार है। उन्होंने गत वर्ष 19 लाख रुपये शुल्क करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था जिस पर अभी तक न तो सरकार ने कोई शुल्क समिति बनाई और न ही कोई फैसला लिया है। फिलहाल सरकार को सूचित कर दिया गया है और दाखिले रोक दिए गए हैं। 

दूसरी ओर, हिमालयन यूनिवर्सिटी पहले ही शुल्क निर्धारण संबंधी विज्ञापन जारी कर चुका है। नोटिस मिलने पर जवाब भी दे चुका है कि वह विवि का कालेज चला रहे हैं तो शासन की शुल्क में दखलांदाजी नहीं हो सकती है। बुधवार को एडमिशन न मिलने से परेशान कुछ छात्र एचएनबी मेडिकल विवि पहुंचे। यहां उन्होंने हंगामा किया। इसके बाद उन्होंने कुलसचिव को लिखित शिकायत की। शिकायत के आधार पर कुलसचिव डॉ. आशुतोष सयाना ने शासन को पत्र भेजने के साथ ही हिमालयन मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी करते हुए तत्काल दाखिला करने को कहा है।

शुल्क पर फैसला नहीं ले पाई सरकार
निजी मेडिकल कॉलेजों की शुल्क को लेकर सरकार अभी तक कोई साफ फैसला नहीं ले पाई है। इस साल भी नीट की काउंसिलिंग से ठीक पहले यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। बाद में शासन ने तय किया कि एसजीआरआर मेडिकल कालेज का शुल्क तय है। इसके तहत स्टेट कोटा सीट का शिक्षण शुल्क चार लाख और मैनेजमेंट कोटा सीट का शुल्क पांच लाख होगा। इस साल हिमालयन मेडिकल कालेज में नितांत अस्थाई व्यवस्था बताते हुए शासन ने आदेश जारी किया था कि एसजीआरआर मेडिकल जितना ही शुल्क वसूला जाएगा।

शुल्क और सीटों को लेकर सरकार का रुख साफ है। हम बता चुके हैं कि अभी एसजीआरआर और हिमालयन में समान शुल्क रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और एमसीआई व शासन के आदेशों के तहत ही सीटें आवंटित हुई हैं। जो कॉलेज नहीं मानेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

- डॉ. आशुतोष सयाना, कुलसचिव, एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी

फीस पर फैसले को 29 को होगा मंथन
निजी चिकित्सा विवि के फीस का मामला लंबे समय से फंसा हुआ है। अपर मुख्य सचिव के अनुसार इस पर उत्तराखंड अनानुदानित प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति 29 जुलाई को सुनवाई करेगी। बीते दिनों शासन में अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें शासन ने साफ कर दिया था कि जो भी संस्थान फीस को लेकर कोई संशोधन चाहते हैं, वह चिकित्सा-शिक्षा निदेशालय के माध्यम से उत्तराखंड अनानुदानित प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति को प्रस्ताव भेजे।

इसी बीच काउंसिलिंग शुरू हो गई, तो शासन ने अस्थायी तौर पर हिमालयन इंस्टीट्यूट की फीस के संबंध में आदेश जारी किया था। निजी चिकित्सा विवि के अनुसार वह विवि एक्ट से संचालित होते हैं, ऐसे में नियम लागू नहीं होता है। शासन के अनुसार इस बात का भी फैसला समिति के माध्यम से होना चाहिए। बहरहाल, अब सभी की निगाह 29 को होने वाली सुनवाई पर लगी है। अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के अनुसार जो भी समिति फैसला लेगी, उसे लागू कर दिया जाएगा। 

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