उत्तराखंड में PM मोदी की रैली पर घिरा प्रशासन, गिर सकती है गाज
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजय संकल्प रैली की अनुमति न होने के मामले में हरिद्वार प्रशासन घिर गया है। कांग्रेस के बाद अब भाजपा ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि अनुमति नहीं थी तो डीएम ने रैली की व्यवस्थाएं कैसे की। रिटर्निंग अफसर लेवल से चूक पहले ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से कुबूली जा चुकी है। ऐसे में मामला तूल पकड़ने पर किसी अधिकारी पर गाज भी गिर सकती है।
भाजपा के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 10 फरवरी को हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में विजय संकल्प रैली को संबोधित किया था। रैली के लिए मैदान की अनुमति ऋषिकुल विद्यापीठ से जरूर ली गई थी, पर रिटर्निंग अफसर या जिला निर्वाचन अधिकारी से इसकी परमिशन ही नहीं ली गई।
किशोर उपाध्याय ने भेदभाव का आरोप लगाया
इससे भी बड़ी ताज्जुब की बात यह है कि प्रशासन ने कई दिन तक इस बात को दबाए रखा। मतदान के बाद हलचल होने पर भाजपा जिलाध्यक्ष को नोटिस जारी किया गया। बिना अनुमति मोदी की रैली का मामला सुर्खियों में आने के बाद कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना दिया है।
खासकर देर रात तक रोड़ शो करने पर राहुल गांधी मुख्यमंत्री हरीश रावत पर तत्काल मुकदमा दर्ज कराने के चलते कांग्रेस हमलावर हो गई। प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग उठाई थी। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने भी इसे रिटर्निंग अफसर लेवल से चूक माना है।
रविवार को पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने भी कहा कि अगर अनुमति नहीं थी तो प्रशासन किस बात की व्यवस्था करने आया था। हमारे साथ बैठकें और निरीक्षण तक के सभी कार्य डीएम और अन्य अधिकारियों ने खुद संभाले थे।
यदि अनुमति नहीं थी तो प्रशासन ने रैली की व्यवस्थाएं कैसे पूरी की। वहीं निशंक ने संगठन का बचाव करते हुए यह भी कहा कि रैली की अनुमति के लिए आवेदन किया गया था। हालांकि अनुमति मिले बगैर रैली करने के सवाल का वह सीधा जवाब नहीं दे पाए। कुल मिलाकर कांग्रेस के निशाने पर आने के बाद अब निशंक ने भी प्रशासन के पाले में गेंद डाल दी है। जिससे प्रशासन की फजीहत होनी तय है। ऐसे में किसी अधिकारी पर गाज गिरने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
प्रशासन ने क्यों दबाए रखा मामला
कांग्रेस आरोप लगा रही है कि प्रशासन ने राहुल गांधी का रोड शो देर रात तक निकालने पर मुकदमा दर्ज कराने में देर नहीं लगाई। वहीं प्रशासन की चुप्पी पर कई और भी सवाल उठ रहे हैं।
बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई प्रशासन को रैली की अनुमति न होने की जानकारी समय से नहीं मिल पाई। यदि ऐसा है तो यह और भी गंभीर मामला है।
अनुमति के बारे में जानकारी किए बिना रैली की तमाम व्यवस्थाएं कैसे संपन्न करा दी गई। यदि पूरा मामला प्रशासन के संज्ञान में था, तो मतदान तक किस कारण से चुप्पी साधी गई। कारण जो भी हो, पर प्रशासन हर तरफ से घिरा हुआ दिखाई दे रहा है।