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Dehradun News: शासन सख्त, बिना मान्यता मदरसा नाम पर रहेगी रोक
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देहरादून। उत्तराखंड में बिना पंजीकरण और मान्यता के संचालित मदरसों को लेकर शासन ने अब हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण डॉ.पराग मधुकर धकाते ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण एवं जिला समाज कल्याण अधिकारियों को पत्र भेजकर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
मामला मदरसा इनामुल उलूम सोसायटी बनाम उत्तराखंड राज्य से जुड़ा है। 26 अगस्त 2025 के हाईकोर्ट के आदेश में स्पष्ट किया गया कि मदरसा बोर्ड से पंजीकृत या मान्यता प्राप्त नहीं होने वाले संस्थान अपने नाम में ‘मदरसा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। हालांकि, ऐसे संस्थानों को ‘मकतब’ के रूप में संचालित करने की अनुमति दी गई है।
अदालत के समक्ष राज्य की ओर से बताया गया था कि मदरसा बोर्ड के साथ 416 संस्थान पंजीकृत थे, जबकि करीब 88 संस्थानों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। वहीं, बोर्ड से मान्यता नहीं रखने वाले संस्थानों द्वारा ‘मदरसा’ नाम इस्तेमाल किए जाने पर राज्य ने आपत्ति जताई थी। हाईकोर्ट ने संबंधित याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे एसडीएम के समक्ष हलफनामा देकर वचन दें कि मदरसा बोर्ड में पंजीकरण होने तक न तो मदरसा चलाएंगे और न ही संस्थान के नाम में ‘मदरसा’ शब्द का इस्तेमाल करेंगे। इसके बाद परिसरों को डी-सील करने का निर्देश दिया गया। साथ ही अदालत ने कहा कि वचन का उल्लंघन होने पर अधिकारी आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं। शासन के ताजा पत्र की प्रतिलिपि सभी जिलाधिकारियों, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष को भी भेजी गई है।
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मामला मदरसा इनामुल उलूम सोसायटी बनाम उत्तराखंड राज्य से जुड़ा है। 26 अगस्त 2025 के हाईकोर्ट के आदेश में स्पष्ट किया गया कि मदरसा बोर्ड से पंजीकृत या मान्यता प्राप्त नहीं होने वाले संस्थान अपने नाम में ‘मदरसा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। हालांकि, ऐसे संस्थानों को ‘मकतब’ के रूप में संचालित करने की अनुमति दी गई है।
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अदालत के समक्ष राज्य की ओर से बताया गया था कि मदरसा बोर्ड के साथ 416 संस्थान पंजीकृत थे, जबकि करीब 88 संस्थानों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। वहीं, बोर्ड से मान्यता नहीं रखने वाले संस्थानों द्वारा ‘मदरसा’ नाम इस्तेमाल किए जाने पर राज्य ने आपत्ति जताई थी। हाईकोर्ट ने संबंधित याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे एसडीएम के समक्ष हलफनामा देकर वचन दें कि मदरसा बोर्ड में पंजीकरण होने तक न तो मदरसा चलाएंगे और न ही संस्थान के नाम में ‘मदरसा’ शब्द का इस्तेमाल करेंगे। इसके बाद परिसरों को डी-सील करने का निर्देश दिया गया। साथ ही अदालत ने कहा कि वचन का उल्लंघन होने पर अधिकारी आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं। शासन के ताजा पत्र की प्रतिलिपि सभी जिलाधिकारियों, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष को भी भेजी गई है।
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