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Dehradun News: ‘नशा भारत की जवानी खा गया, हंसती खेलती जिंदगानी खा गया’
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- साहित्य संगम पछवादून ने किया मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन
फोटो...
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। साहित्य संगम पछवादून ने नगर स्थित संतोष गोयल के आवास पर मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में कवि-शायरों ने अपनी पंक्तियों से समाज में फैल रही बुराइयों पर कटाक्ष किए। कवयित्री सरस्वती उनियाल ने समाज में बढ़ रही नशे की लत पर कटाक्ष करते हुए कहा नशा भारत की जवानी खा गया, हंसती खेलती जिंदगानी खा गया। इस दौरान हांस्य कवियों ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
काव्य गोष्ठी की शुरूआत सरस्वती वंदना से की गई। इसके पश्चात कवियत्री सरिता गुप्ता ने राजा राम हैं सब गुण आगर, सहनशील है दया के सागर रचना सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कवयित्री नीलम शर्मा ने तेरी यादों को सजाया मैंने, दिल बसेरा ही बनाया मैने गजल सुनाते हुए श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। शायर मजाहिर खान ने किसी की आरजू मेरे दिल मे यूं मचलती है, जब भी बाद ए सबा गली से मेरी गुजरती है गजल पेश की। कवि पवन शर्मा ने धूप की कैसे निभेगी बादलों से दोस्ती गीत सुनाया। संतोष गोयल ने हांस्य गीत लवली सी मैडम अर्जेंट ढूंढेंगे, नोट टेम्परेरी परमानेंट ढूंढेंगे की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। इस अवसर पर बालकवि क्यांश ने मेरे कान्हा जल्दी आना, साथ में मेरे भजन सुनाया। इसके पहले प्रमुख समाजसेवी व डाकपत्थर के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पूर्व प्रधान सुबोध गोयल ने दीप प्रज्वलित कर काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ कवि व साहित्यकार डॉ. मदनपाल बिरला गजब ने किया। गोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।
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विकासनगर। साहित्य संगम पछवादून ने नगर स्थित संतोष गोयल के आवास पर मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में कवि-शायरों ने अपनी पंक्तियों से समाज में फैल रही बुराइयों पर कटाक्ष किए। कवयित्री सरस्वती उनियाल ने समाज में बढ़ रही नशे की लत पर कटाक्ष करते हुए कहा नशा भारत की जवानी खा गया, हंसती खेलती जिंदगानी खा गया। इस दौरान हांस्य कवियों ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
काव्य गोष्ठी की शुरूआत सरस्वती वंदना से की गई। इसके पश्चात कवियत्री सरिता गुप्ता ने राजा राम हैं सब गुण आगर, सहनशील है दया के सागर रचना सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कवयित्री नीलम शर्मा ने तेरी यादों को सजाया मैंने, दिल बसेरा ही बनाया मैने गजल सुनाते हुए श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। शायर मजाहिर खान ने किसी की आरजू मेरे दिल मे यूं मचलती है, जब भी बाद ए सबा गली से मेरी गुजरती है गजल पेश की। कवि पवन शर्मा ने धूप की कैसे निभेगी बादलों से दोस्ती गीत सुनाया। संतोष गोयल ने हांस्य गीत लवली सी मैडम अर्जेंट ढूंढेंगे, नोट टेम्परेरी परमानेंट ढूंढेंगे की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। इस अवसर पर बालकवि क्यांश ने मेरे कान्हा जल्दी आना, साथ में मेरे भजन सुनाया। इसके पहले प्रमुख समाजसेवी व डाकपत्थर के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पूर्व प्रधान सुबोध गोयल ने दीप प्रज्वलित कर काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ कवि व साहित्यकार डॉ. मदनपाल बिरला गजब ने किया। गोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।
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