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अभिनेता मोहन भंडरी का उत्तराखंड से था गहरा नाता

Sun, 27 Sep 2015 01:07 PM IST
नवीन भट्ट/ अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)
नवीन भट्ट/ अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा) Updated Sun, 27 Sep 2015 01:07 PM IST
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actor mohan bhandari connection from uttarakhand.

मूल रूप से अल्मोड़ा के मवड़ा गांव निवासी सिने अभिनेता स्व. मोहन भंडारी और उनके परिवार की ग्वेल देवता में बहुत श्रद्धा थी। वह अपने परिवार के साथ पांच साल पूर्व तक यहां अपने पैतृक गांव आकर मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे।

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ग्रामीणों के अनुसार उनके पिता हंसा दत्त भंडारी कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र की 4 कुमाऊं में मेजर थे। वह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लापता हो गए थे। स्व. मोहन की माता गंगा भंडारी प्रतिदिन गांव के ग्वेल देवता मंदिर में उनके सकुशल होने के लिए नियमित रूप से पूजा-अर्चना करती थीं। ग्वेल देवता की कृपा से ही ढाई साल बाद यूनिट की तरफ से पिता के सकुशल होने की खबर आ गई थी।
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मालूम हो कि 68 वर्षीय प्रख्यात सिने अभिनेता स्व. मोहन भंडारी का गत दिवस ब्रेन ट्यूमर के चलते निधन हो गया। वह ताड़ीखेत विकासखंड के मवड़ा गांव के रहने वाले थे। उनके चचेरे भाई और बाल सखा ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी अपने बचपन की याद साझा करते हुए बताते हैं कि वह और मोहन बचपन में साथ ही खेला करते थे।
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मोहन को एक्टिंग करने का शौक बचपन से ही था। पिता सेना में होने के कारण उनका तबादला होता रहता था तो मोहन भी उनके साथ बाहर चले गए। हल्द्वानी और पुणे में उनकी शिक्षा हुई। न्याय के देवता ग्वेल देवता पर स्व. मोहन और उनके परिवार की आस्था थी।

पिता के ढाई साल सकुशल होने की खबर के बाद यह आस्था और परवान चढ़ गई थी। वह बताते हैं कि पांच साल पूर्व तक जब भी यहां आते थे तो साधारण तरीके से बाजार में घूमते थे और मिलने वाले हर परिचित से वह कुमाऊंनी में ही वार्तालाप करते थे।

उनके दूसरे चचेरे भाई पूर्व जिला पंचायत सदस्य घनानंद भंडारी ने भी स्व. मोहन भंडारी को साधारण और सरल इंसान बताया। तबियत ठीक नहीं होने के कारण वह पिछले पांच सालों से यहां नहीं पहुंचे। उनकी मृत्यु की सूचना पर मवड़ा गांव निवासी उनके चचरे भाई दया भंडारी, पूर्व राजदूत सीएम भंडारी सहित तमाम ग्रामीणों में शोक की लहर व्याप्त है।  

मराठी थियेटर में सीखी कला की बारीकियां
सिने अभिनेता स्व. मोहन भंडारी को एक्टिंग का शौक बचपन से था, इसी शौक ने उन्हें मुंबई पहुंचा दिया। वहां उन्होंने काफी साल तक मराठी थियेटर में कला की बारीकियां सीखीं। बाद में उन्हें चुनौती नामक पहले धारावाहिक में कार्य मिला, जहां से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।


इधर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. मदन मोहन उपाध्याय के पुत्र हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि 1987 में जब वह रानीखेत आए थे तो उनके होम फार्म हेरिटेज होटल भी पहुंचे थे, तब वह कमर दर्द की पीड़ा से जूझ रहे थे।

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