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भ्रष्टाचार के मामले में पहली बार जज को किया गया बर्खास्त, ये है पूरा मामला...

Thu, 18 Jul 2019 10:19 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 18 Jul 2019 10:19 PM IST
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ACJM Anuradha Garg suspended kashipur
प्रतीकात्मक

हाईकोर्ट की संस्तुति पर राजभवन ने काशीपुर (ऊधमसिंह नगर) की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक न्यायाधीश अनुराधा गर्ग को भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त कर दिया है। उत्तराखंड शासन ने बृहस्पतिवार को बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया। एसीजेएम गर्ग 2015 से निलंबित चल ही थीं। उत्तराखंड के गठन से लेकर अब तक किसी भी न्यायिक अफसर की बर्खास्तगी का यह पहला मामला बताया जा रहा है।

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वर्ष 2008 न्यायिक सेवा बैच की अधिकारी अनुराधा गर्ग के खिलाफ हाईकोर्ट ने चार वर्ष पहले कार्रवाई की थी। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का एक मामला था। इसके बाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल डीपी गैरोला ने मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर 2015 को आदेश जारी कर एसीजेएम काशीपुर अनुराधा गर्ग को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में अनियमितताएं व भ्रष्टाचार की बात सामने आने पर निलंबित कर दिया था।
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मामले में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल नरेंद्र दत्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। उनकी ओर से की गई प्रारंभिक जांच के बाद 24 मार्च 2015 को रिपोर्ट चीफ जस्टिस के समक्ष पेश की गई। रिपोर्ट में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि हुई। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल डीपी गैरोला ने निलंबन आदेश जारी किए थे। इसके बाद हाईकोर्ट ने गर्ग की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति की, जिसपर शासन ने उनको बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया है। 

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दो वर्षों तक काशीपुर में एसीजेएम रहीं अनुराधा गर्ग

काशीपुर में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर रहीं अनुराधा गर्ग का कार्यकाल विवादों में रहा। एक ही प्रकृति के अपराधों में जमानत अर्जी स्वीकारने और अस्वीकार करने को लेकर उनकी कार्यशैली चर्चा में रही। सीजे के निर्देश पर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल डीपी गैरोला ने उनके निलंबन का आदेश दिया था। इसके बाद से वह जिला न्यायालय से संबद्ध चल रही थी। 

देहरादून में स्थित एक संपत्ति के विवाद को लेकर भी वह आरोपों के घेरे में थीं। काशीपुर के कुछ अधिवक्ताओं ने उनके न्यायिक कार्यों में अनियमितता बरतने की शिकायत उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से की थी।

इस मामले में जांच हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल नरेंद्र दत्त की ओर से की गई। प्रारंभिक जांच के बाद रिपोर्ट 24 मार्च 2015 को मुख्य न्यायाधीश को सौंपी गई। रिपोर्ट में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार की बात कही गई थी। 2003 बैच की पीसीएस (जे) अनुराधा 17 अप्रैल 2013 से 27 मार्च 2015 तक काशीपुर की एसीजेएम रहीं।

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