Dhanteras 2022: देहरादून में धनतेरस पर जमकर हुई खूब धनवर्षा, इस बार कारोबार में हुआ कई गुना इजाफा
धनतेरस पर सुबह से ही बाजारों में लोगों की चहलपहल दिखाई दी। इससे दुकानदारों के चेहरे खिले दिखाई दिए। लोगों ने सोने-चांदी के सिक्के, गहने, वाहन, पटाखे, खील-बतासे, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और बर्तनों की जमकर खरीदारी की।
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धनतेरस पर महंगाई को धता बताते हुए शहरवासियों ने बाजार पर जमकर धनवर्षा की। पिछले साल की तुलना में इस बार धनतेरस के कारोबार में कई गुना इजाफा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक, देहरादून में शनिवार को ढाई से 300 करोड़ तक का कारोबार हुआ। इस बार धनतेरस दो दिन मनाई जा रही है। लिहाजा आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
धनतेरस के साथ ही शनिवार से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो गई। हालांकि, मुख्य रूप से धनतेरस का पर्व आज मनाया जाएगा। इसके मद्देनजर दुकानदारों ने दुकानों को खास तौर से सजाया है। धनतेरस पर सुबह से ही बाजारों में लोगों की चहलपहल दिखाई दी। इससे दुकानदारों के चेहरे खिले दिखाई दिए। लोगों ने सोने-चांदी के सिक्के, गहने, वाहन, पटाखे, खील-बतासे, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और बर्तनों की जमकर खरीदारी की।
टीवी, फ्रिज, एलइडी, गीजर सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों की खूब बिक्री हुई। लोगों ने आकर्षक ऑफर का भी लाभ उठाया। पलटन बाजार, हनुमान चौक, झंडा बाजार, धामावाला में सुबह से देर रात तक लोग खरीदारी करते नजर आए। दून वैली महानगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज मैसॉन के अनुसार धनतेरस पर पहले 300 करोड़ के आसपास का कारोबार हुआ।
करीब 22 करोड़ के सोने-चांदी की हुई खरीददारी
धनतेरस पर शगुन के लिए लोगों ने सोने-चांदी के सिक्के खरीदे। आभूषणों की भी खूब बिक्री हुई। आगामी विवाह अवसरों के लिए भी कुछ लोग धनतेरस के शुभ मुहूर्त में देवर खरीदने पहुंचे। चांदी के सिक्कों पर पक्षियों, जानवरों और थ्री डी पैटर्न का ट्रेंड रहा। लक्ष्मी, गणेश, कुबेर की चांदी की मूर्तियों, पूजा के लिए चांदी के बर्तन और श्रीयंत्र की खरीदारी की गई। सराफा कारोबारी पंकज मैसॉन के मुताबिक, शनिवार को सोनेे-चांदी का करीब 22 करोड़ का कारोबार हुआ। अभी रविवार को भी धनतेरस है। लिहाजा यह आंकड़ा और बढ़ेगा।
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फूलों की बढ़ी मांग
दिवाली के मद्देनजर फूलों की मांग भी तेजी से बढ़ गई है। इस कारण विक्रेता जगह-जगह स्टाल लगाकर फूलों की बिक्री कर रहे हैं। गेंदे का फूल 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिका। वहीं, फूलों की छोटी माला 50 रुपये की मिल रही थी।