{"_id":"67043e994917dd9aea0632d4","slug":"a-workshop-on-saukhyam-reusable-pads-was-organized-dehradun-news-c-5-1-drn1030-520052-2024-10-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: कार्यशाला में मासिक धर्म स्वच्छता की आवश्यकता पर दिया जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: कार्यशाला में मासिक धर्म स्वच्छता की आवश्यकता पर दिया जोर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Iहिम ज्योति स्कूल में सौख्यम रीयूजेबल पैड्स पर आयोजित हुई कार्यशालाI
हिम ज्योति स्कूल में सोमवार को सौख्यम रीयूजेबल पैड्स पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मासिक धर्म स्वच्छता की आवश्यकता पर जोर दिया गया। हिम वैली सोशल फाउंडेशन की अध्यक्ष अनीता नौटियाल ने कपास और केले के रेशों से बने पुन: उपयोगी पैड्स के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया।
अनीता नौटियाल ने पारंपरिक सैनिटरी पैड्स के नकारात्मक प्रभावों पर जानकारी दी। बताया कि माता अमृतानंदमयी मठ की सौख्यम नाम से एक पहल की गई है। इसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों को एक सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल उत्पाद प्रदान करना है। सौख्यम कपड़े के पैड्स केले के रेशों से बने होते हैं और इनमें कोई हानिकारक रसायन नहीं होते हैं। इससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की रक्षा होती है। इसके अतिरिक्त इन पैड्स के उपयोग से महिलाओं को आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। ये पुन: उपयोगी पैड्स 4 से 5 वर्षों तक उपयोग किए जा सकते हैं। केले के ऐसे पौधे जो फलने के बाद अनुपयोगी हो जाते हैं, उनके रेशों से सौख्यम पैड्स बनाए जाते हैं। नौटियाल ने बच्चों को यह भी बताया कि नीति आयोग की ओर से सौख्यम को मान्यता प्रदान की गई है और इसे वीमेन ट्रांसफार्मिंग इंडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इसे मासिक धर्म स्वच्छता में सर्वश्रेष्ठ सामाजिक पहल के लिए भी पुरस्कार मिला है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के उन्नत भारत अभियान के तहत फाउंडेशन विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और आस-पास के गांवों में कार्यशालाएं आयोजित कर रही हैं। कार्यक्रम में प्राचार्य रूमा मल्होत्रा, प्रियंका रंधावा और अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
हिम ज्योति स्कूल में सोमवार को सौख्यम रीयूजेबल पैड्स पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मासिक धर्म स्वच्छता की आवश्यकता पर जोर दिया गया। हिम वैली सोशल फाउंडेशन की अध्यक्ष अनीता नौटियाल ने कपास और केले के रेशों से बने पुन: उपयोगी पैड्स के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया।
अनीता नौटियाल ने पारंपरिक सैनिटरी पैड्स के नकारात्मक प्रभावों पर जानकारी दी। बताया कि माता अमृतानंदमयी मठ की सौख्यम नाम से एक पहल की गई है। इसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों को एक सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल उत्पाद प्रदान करना है। सौख्यम कपड़े के पैड्स केले के रेशों से बने होते हैं और इनमें कोई हानिकारक रसायन नहीं होते हैं। इससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की रक्षा होती है। इसके अतिरिक्त इन पैड्स के उपयोग से महिलाओं को आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। ये पुन: उपयोगी पैड्स 4 से 5 वर्षों तक उपयोग किए जा सकते हैं। केले के ऐसे पौधे जो फलने के बाद अनुपयोगी हो जाते हैं, उनके रेशों से सौख्यम पैड्स बनाए जाते हैं। नौटियाल ने बच्चों को यह भी बताया कि नीति आयोग की ओर से सौख्यम को मान्यता प्रदान की गई है और इसे वीमेन ट्रांसफार्मिंग इंडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इसे मासिक धर्म स्वच्छता में सर्वश्रेष्ठ सामाजिक पहल के लिए भी पुरस्कार मिला है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के उन्नत भारत अभियान के तहत फाउंडेशन विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और आस-पास के गांवों में कार्यशालाएं आयोजित कर रही हैं। कार्यक्रम में प्राचार्य रूमा मल्होत्रा, प्रियंका रंधावा और अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।
विज्ञापन