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नहीं मिली बावला नंदप्रयाग जलविद्युत परियोजना को अनुमति
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नहीं मिली बावला नंदप्रयाग जलविद्युत परियोजना को अनुमति
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड जलविद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक बावला नंदप्रयाग जल विद्युत परियोजना सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की ओर से ‘टेक्नो इकोनामिक क्लीयरेंस (टीईसी) नहीं मिलने से अधर में पड़ी है। जबकि ‘रन ऑफ रिवर’ तकनीक पर आधारित इस परियोजना के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण, ऊर्जा मंत्रालय समेत संबंधित मंत्रालय इसके लिए स्वीकृति प्रदान कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की ओर से चमोली जिले के नंदप्रयाग में बावला जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया जाना है। 300 मेगावाट क्षमता वाली इस महत्वाकांक्षी जल विद्युत परियोजना को लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय समेत केंद्र एवं राज्य सरकार के तमाम संबंधित मंत्रालयाें ने इजाजत दे दी है लेकिन मामला मामला टीईसी पर लटका है। यूजेवीएनएल के प्रबंधक निदेशक एसएन वर्मा के मुताबिक अब सेंट्रल इलेक्ट्रिीसिटी अथारिटी ने टेक्नो इकोनॉमिक्स क्लीयरेंस में पेंच लगा दिया है। जिससे परियोजना अधर में लटकी पड़ी है। योजना की अनुमति मिल जाए, इसके यूजेवीएनएल की ओर से हरसंभव पैरवी की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि 2600 करोड़ लागत वाली इस महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना के पूरा होने से 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। यदि ऐसा होता है तो राज्य में न सिर्फ बिजली संकट को दूर करने में मदद मिलेगी, बल्कि बिजली बेचने से यूजेवीएनएन की आय में भारी इजाफा होगा। बावला जलविद्युत परियोजना जैसी 30 से अधिक जलविद्युत परियोजनाएं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के साथ ही एनजीटी में लटकी हैं।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड जलविद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक बावला नंदप्रयाग जल विद्युत परियोजना सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की ओर से ‘टेक्नो इकोनामिक क्लीयरेंस (टीईसी) नहीं मिलने से अधर में पड़ी है। जबकि ‘रन ऑफ रिवर’ तकनीक पर आधारित इस परियोजना के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण, ऊर्जा मंत्रालय समेत संबंधित मंत्रालय इसके लिए स्वीकृति प्रदान कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की ओर से चमोली जिले के नंदप्रयाग में बावला जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया जाना है। 300 मेगावाट क्षमता वाली इस महत्वाकांक्षी जल विद्युत परियोजना को लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय समेत केंद्र एवं राज्य सरकार के तमाम संबंधित मंत्रालयाें ने इजाजत दे दी है लेकिन मामला मामला टीईसी पर लटका है। यूजेवीएनएल के प्रबंधक निदेशक एसएन वर्मा के मुताबिक अब सेंट्रल इलेक्ट्रिीसिटी अथारिटी ने टेक्नो इकोनॉमिक्स क्लीयरेंस में पेंच लगा दिया है। जिससे परियोजना अधर में लटकी पड़ी है। योजना की अनुमति मिल जाए, इसके यूजेवीएनएल की ओर से हरसंभव पैरवी की जा रही है।
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उल्लेखनीय है कि 2600 करोड़ लागत वाली इस महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना के पूरा होने से 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। यदि ऐसा होता है तो राज्य में न सिर्फ बिजली संकट को दूर करने में मदद मिलेगी, बल्कि बिजली बेचने से यूजेवीएनएन की आय में भारी इजाफा होगा। बावला जलविद्युत परियोजना जैसी 30 से अधिक जलविद्युत परियोजनाएं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के साथ ही एनजीटी में लटकी हैं।
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