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उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त करने तक मत रुको...
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
स्वामी विवेकानंद जयंती सप्ताह समारोह में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर न्यास संस्था की ओर से ‘स्वामी विवेकानंद’ नाटक के मंचन की शुरुआत ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त करने तक मत रुको’ कथन से हुई।
रविवार को कौलागढ़ स्थित ओेएनजीसी के एएमएनघोष सभागार में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम दर्ज करा चुके रंगकर्मी मुजीब खान के निर्देशन में नाटक का मंचन किया गया। कलाकारों ने नाटक में स्वामी विवेकानंद के विचारों से लेकर उनके जन्म और समाधि तक की यात्रा को दर्शाया। नाटक में स्वामी विवेकानंद के बालपन का भी मंचन किया गया। 45 मिनट के नाटक में मानव सेवा करने का संदेश दिया गया। नाटक में बताया गया कि विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। लेकिन, राजस्थान के राजा अजीत सिंह ने उन्हें स्वामी विवेकानंद नाम दिया। तीन पाठ में दर्शाए गए नाटक में स्वामी के जीवन से जुडे़ हर पहलुओं का मंचन किया गया। नाटक में बंगाली भाषा का भी इस्तेमाल किया गया। युक्तात्र श्रीवास्तव ने स्वामी का किरदार निभाया। जबकि, शर्मिला डे ने उनकी माता भूवनेश्वरी देवी का किरदार निभाया। मुजीब खान ने कहा कि नाटक का उद्देश्य देश के युवाओं को स्वामी के संदेशों के प्रति जागरूक करना है।
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प्रेमचंद की 313 पुस्तकों पर कर चुके हैं नाटक का मंचन
साल 2015 से निर्देशन कर रहे रंगकर्मी मुजीब खान ने कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक नाटकों का मंचन उनकी पहली पसंद है। वह अब तक देशभर में विभिन्न नाटकों का मंचन कर चुके हैं। खान ने बताया कि वह मुंशी प्रेमचंद की लिखी 313 पुस्तकों पर भी नाटक का मंचन कर चुके हैं। इसके लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि नाटकों से न केवल सीख मिलती है, बल्कि इससे हमें अपने इतिहास की जानकारी भी मिलती है।
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स्वामी विवेकानंद जयंती सप्ताह समारोह में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर न्यास संस्था की ओर से ‘स्वामी विवेकानंद’ नाटक के मंचन की शुरुआत ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त करने तक मत रुको’ कथन से हुई।
रविवार को कौलागढ़ स्थित ओेएनजीसी के एएमएनघोष सभागार में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम दर्ज करा चुके रंगकर्मी मुजीब खान के निर्देशन में नाटक का मंचन किया गया। कलाकारों ने नाटक में स्वामी विवेकानंद के विचारों से लेकर उनके जन्म और समाधि तक की यात्रा को दर्शाया। नाटक में स्वामी विवेकानंद के बालपन का भी मंचन किया गया। 45 मिनट के नाटक में मानव सेवा करने का संदेश दिया गया। नाटक में बताया गया कि विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। लेकिन, राजस्थान के राजा अजीत सिंह ने उन्हें स्वामी विवेकानंद नाम दिया। तीन पाठ में दर्शाए गए नाटक में स्वामी के जीवन से जुडे़ हर पहलुओं का मंचन किया गया। नाटक में बंगाली भाषा का भी इस्तेमाल किया गया। युक्तात्र श्रीवास्तव ने स्वामी का किरदार निभाया। जबकि, शर्मिला डे ने उनकी माता भूवनेश्वरी देवी का किरदार निभाया। मुजीब खान ने कहा कि नाटक का उद्देश्य देश के युवाओं को स्वामी के संदेशों के प्रति जागरूक करना है।
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प्रेमचंद की 313 पुस्तकों पर कर चुके हैं नाटक का मंचन
साल 2015 से निर्देशन कर रहे रंगकर्मी मुजीब खान ने कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक नाटकों का मंचन उनकी पहली पसंद है। वह अब तक देशभर में विभिन्न नाटकों का मंचन कर चुके हैं। खान ने बताया कि वह मुंशी प्रेमचंद की लिखी 313 पुस्तकों पर भी नाटक का मंचन कर चुके हैं। इसके लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि नाटकों से न केवल सीख मिलती है, बल्कि इससे हमें अपने इतिहास की जानकारी भी मिलती है।
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