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पेयजल योजना पर करोड़ों खर्चने के बावजूद मातली गांव में बनी हुई है पेयजल किल्लत
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उत्तरकाशी। मातली गांव में अनियमित पेयजल आपूर्ति से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने गांव के लिए करीब ढाई करोड़ लागत से बनी पेयजल योजना में धरातल पर सही काम नहीं होने का आरोप लगाते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
मातली गांव के उपप्रमुख भरत बिष्ट, सूर्यप्रकाश नौटियाल, प्रेमलाल, जयवीर पंवार, चमनलाल शाह आदि ने बताया कि बीते सालों में आसपास के गांवों से हुए पलायन के चलते मातली गांव की आबादी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में पुरानी पेयजल योजनाएं ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है। ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने गांव के लिए नई पेयजल योजना की घोषणा की। वर्ष 2014-15 में 2.52 करोड़ रुपये लागत से बड़ेथी गाड़ से मातली गांव के लिए पेयजल योजना स्वीकृत हुई। ठेकेदार ने गांव के एक छोर तक ही योजना का पानी पहुंचाकर इतिश्री कर दी। पेयजल योजना के नाम पर करोड़ों खर्चने के बावजूद प्यास बुझाने लायक पानी भी नहीं मिल पाने से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने इस संबंध में डीएम को पत्र लिखकर पेयजल योजना की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति की मांग की है।
बताया कि मातली गांव के लिए लिंगलियाणी तोक से बनी पुरानी पेयजल योजना के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए 75 हजार रुपये लागत से चाल खाल का निर्माण स्वीकृत हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त स्थान पर एक धेले का काम भी नहीं हुआ और जल संस्थान ने ठेकेदार को पूरा भुगतान भी कर दिया। उन्होंने डीएम से मामले की जांच करने की मांग की है। वहीं ईई बीएस डोगरा का कहना है कि बड़ेथी गाड़ से मातली गांव के लिए बनी पेयजल योजना का कार्य बजट के अभाव में रुका हुआ है। पूरा बजट प्राप्त होते ही अनुबंध के अनुसार कार्य पूरा कराया जाएगा। लिंगलियाणी तोक में हुए काम का भुगतान जेई और एई की संस्तुति पर किया गया है। यदि शिकायत है तो इसकी पड़ताल की जाएगी।
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मातली गांव के उपप्रमुख भरत बिष्ट, सूर्यप्रकाश नौटियाल, प्रेमलाल, जयवीर पंवार, चमनलाल शाह आदि ने बताया कि बीते सालों में आसपास के गांवों से हुए पलायन के चलते मातली गांव की आबादी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में पुरानी पेयजल योजनाएं ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है। ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने गांव के लिए नई पेयजल योजना की घोषणा की। वर्ष 2014-15 में 2.52 करोड़ रुपये लागत से बड़ेथी गाड़ से मातली गांव के लिए पेयजल योजना स्वीकृत हुई। ठेकेदार ने गांव के एक छोर तक ही योजना का पानी पहुंचाकर इतिश्री कर दी। पेयजल योजना के नाम पर करोड़ों खर्चने के बावजूद प्यास बुझाने लायक पानी भी नहीं मिल पाने से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने इस संबंध में डीएम को पत्र लिखकर पेयजल योजना की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति की मांग की है।
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बताया कि मातली गांव के लिए लिंगलियाणी तोक से बनी पुरानी पेयजल योजना के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए 75 हजार रुपये लागत से चाल खाल का निर्माण स्वीकृत हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त स्थान पर एक धेले का काम भी नहीं हुआ और जल संस्थान ने ठेकेदार को पूरा भुगतान भी कर दिया। उन्होंने डीएम से मामले की जांच करने की मांग की है। वहीं ईई बीएस डोगरा का कहना है कि बड़ेथी गाड़ से मातली गांव के लिए बनी पेयजल योजना का कार्य बजट के अभाव में रुका हुआ है। पूरा बजट प्राप्त होते ही अनुबंध के अनुसार कार्य पूरा कराया जाएगा। लिंगलियाणी तोक में हुए काम का भुगतान जेई और एई की संस्तुति पर किया गया है। यदि शिकायत है तो इसकी पड़ताल की जाएगी।
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