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अब विभाग खुद चिह्नित करेंगे अपनी जमीन पर हुआ अतिक्रमण
Updated Sat, 04 Aug 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
अतिक्रमण हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को राहत देते हुए संबंधित सरकारी विभागों को खुद ही अपनी जमीन पर हुए अतिक्रमण को चिह्नित कर उसे हटाने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश शुक्रवार को नगर आयुक्त, देहरादून की ओर से दायर की गई याचिका पर दिया, जिससे नगर निगम को बड़ी राहत मिली है।
चार जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए तय किए गए तीन सप्ताह में चिह्नीकरण में आ रही दिक्कतों को लेकर नगर आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नगर निगम क्षेत्र में सरकारी विभागों की जमीन पर हुए अतिक्रमण के चिह्नीकरण और उस पर कार्रवाई के लिए अब संबंधित विभाग की जवाबदेही तय कर दी है। साथ ही इस पर कार्रवाई की समय सीमा बढ़ाकर छह महीने निर्धारित कर दी है। ऐसे में नगर निगम को अतिक्रमण हटाने के लिए समय के साथ ही राहत भी मिल गई है।
बताते चलें कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार, नगर निगम क्षेत्र से चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाया जाना था। अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो देहरादून निवासी सुनीता हांडा ने बीती चार जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अतिक्रमण ध्वस्तीकरण से पहले उनका पक्ष भी सुनने को कहा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम के सक्षम अधिकारी को निगम की मुख्य सड़कों को छोड़कर अन्य जगह मौजूद अतिक्रमण को चिह्नित कर तीन सप्ताह में उनकी सुनवाई और निस्तारण के आदेश दिए थे। इस समय सीमा में निगम ने करीब 12 हजार अतिक्रमण चिह्नित किए थे। जिनमें से तीन हजार से अधिक अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी भेजा गया था।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी अभी हमें नहीं मिली है। आदेश की कॉपी पढ़ने के बाद ही बताया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या निर्देश दिए हैं? निगम के अधिवक्ता ने फोन पर मुझे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण चिह्नीकरण और कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी दिए जाने के आदेश के बारे में बताया है। -विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त
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अतिक्रमण हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को राहत देते हुए संबंधित सरकारी विभागों को खुद ही अपनी जमीन पर हुए अतिक्रमण को चिह्नित कर उसे हटाने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश शुक्रवार को नगर आयुक्त, देहरादून की ओर से दायर की गई याचिका पर दिया, जिससे नगर निगम को बड़ी राहत मिली है।
चार जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए तय किए गए तीन सप्ताह में चिह्नीकरण में आ रही दिक्कतों को लेकर नगर आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नगर निगम क्षेत्र में सरकारी विभागों की जमीन पर हुए अतिक्रमण के चिह्नीकरण और उस पर कार्रवाई के लिए अब संबंधित विभाग की जवाबदेही तय कर दी है। साथ ही इस पर कार्रवाई की समय सीमा बढ़ाकर छह महीने निर्धारित कर दी है। ऐसे में नगर निगम को अतिक्रमण हटाने के लिए समय के साथ ही राहत भी मिल गई है।
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बताते चलें कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार, नगर निगम क्षेत्र से चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाया जाना था। अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो देहरादून निवासी सुनीता हांडा ने बीती चार जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अतिक्रमण ध्वस्तीकरण से पहले उनका पक्ष भी सुनने को कहा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम के सक्षम अधिकारी को निगम की मुख्य सड़कों को छोड़कर अन्य जगह मौजूद अतिक्रमण को चिह्नित कर तीन सप्ताह में उनकी सुनवाई और निस्तारण के आदेश दिए थे। इस समय सीमा में निगम ने करीब 12 हजार अतिक्रमण चिह्नित किए थे। जिनमें से तीन हजार से अधिक अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी भेजा गया था।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी अभी हमें नहीं मिली है। आदेश की कॉपी पढ़ने के बाद ही बताया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या निर्देश दिए हैं? निगम के अधिवक्ता ने फोन पर मुझे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण चिह्नीकरण और कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी दिए जाने के आदेश के बारे में बताया है। -विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त